बिमल पटेल को आईटीएलओएस जज चुने जाने पर जयशंकर ने दी बधाई, सितंबर में संभालेंगे पद
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में प्रो. बिमल एन. पटेल से मुलाकात कर उन्हें इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ऑफ द लॉ ऑफ द सी (आईटीएलओएस) के जज के रूप में चुने जाने पर बधाई और शुभकामनाएँ दीं। पटेल सितंबर 2026 में ट्रिब्यूनल में अपना पद ग्रहण करेंगे, जिससे इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय निकाय में भारत का प्रतिनिधित्व निरंतर बना रहेगा।
मुलाकात और बधाई का ब्यौरा
जयशंकर ने इस मुलाकात की तस्वीर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए लिखा, 'आज प्रो. डॉ. बिमल एन. पटेल से मिलकर खुशी हुई। इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ऑफ द लॉ ऑफ द सी के जज के तौर पर हाल ही में चुने जाने पर उन्हें बधाई दी। उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।' पटेल का यह चुनाव यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (यूएनसीएलओएस) के हस्ताक्षरकर्ता देशों द्वारा संपन्न हुआ।
चुनाव प्रक्रिया और मतदान
यह चुनाव समुद्री कानून कन्वेंशन के स्टेट्स पार्टीज की 36वीं बैठक के दौरान हुआ। इस वर्ष ट्रिब्यूनल की सात सीटों पर मतदान होना था, जिनमें से दो एशियाई क्षेत्र के लिए आरक्षित थीं। पटेल ने 168 वैध मतों में से 115 मत प्राप्त कर यह सीट जीती, जबकि दूसरी एशियाई सीट वियतनाम के गुयेन लैन-अन्ह थी को मिली। गौरतलब है कि पिछले वर्ष से ही भारतीय राजनयिक संयुक्त राष्ट्र में पटेल के पक्ष में सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे थे।
भारत का निरंतर प्रतिनिधित्व
पटेल के चुने जाने का विशेष महत्व यह है कि न्यायाधीश नीरू चड्ढा के नौ वर्षीय कार्यकाल के सितंबर में समाप्त होने के बाद भी आईटीएलओएस में भारत की उपस्थिति बनी रहेगी। भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने कहा है कि पटेल का चुनाव बहुपक्षवाद और समुद्र के कानून के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है।
बिमल पटेल: परिचय और योगदान
प्रो. बिमल एन. पटेल अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ हैं और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय कानून आयोग के सदस्य हैं। इसके साथ ही वे गुजरात स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) का दायित्व भी निभा रहे हैं। उनके पदों में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड की सदस्यता भी शामिल है।
आईटीएलओएस: भूमिका और महत्व
जर्मनी के हैम्बर्ग में स्थित इस ट्रिब्यूनल में 21 न्यायाधीश होते हैं, जो समुद्र और महासागरों से संबंधित विवादों पर फैसला सुनाते हैं तथा समुद्री कानून की व्याख्या करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सीमाओं को लेकर तनाव बढ़ रहा है और भारत की समुद्री कानून में सक्रिय भागीदारी की रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।