11 अगस्त 2026
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बिमल पटेल को आईटीएलओएस जज चुने जाने पर जयशंकर ने दी बधाई, सितंबर में संभालेंगे पद

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बिमल पटेल को आईटीएलओएस जज चुने जाने पर जयशंकर ने दी बधाई, सितंबर में संभालेंगे पद

सारांश

भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने बिमल एन. पटेल को आईटीएलओएस का जज चुने जाने पर बधाई दी। पटेल को 168 में से 115 मत मिले और वे सितंबर में पद संभालेंगे — जिससे नीरू चड्ढा के कार्यकाल के बाद भी इस अहम समुद्री कानून निकाय में भारत की उपस्थिति निर्बाध बनी रहेगी।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 10 अगस्त 2026 को बिमल एन.
पटेल से मुलाकात कर उन्हें आईटीएलओएस जज चुने जाने पर बधाई दी।
पटेल को 168 वैध मतों में से 115 मत मिले; वे सितंबर 2026 में ट्रिब्यूनल में शामिल होंगे।
यह चुनाव यूएनसीएलओएस स्टेट्स पार्टीज की 36वीं बैठक के दौरान हुआ; एशियाई क्षेत्र की दूसरी सीट वियतनाम को मिली।
नीरू चड्ढा के नौ वर्षीय कार्यकाल की समाप्ति के बाद भी हैम्बर्ग स्थित 21-सदस्यीय ट्रिब्यूनल में भारत का प्रतिनिधित्व जारी रहेगा।
पटेल वर्तमान में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गुजरात के कुलपति और यूएन अंतरराष्ट्रीय कानून आयोग के सदस्य हैं।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में प्रो. बिमल एन. पटेल से मुलाकात कर उन्हें इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ऑफ द लॉ ऑफ द सी (आईटीएलओएस) के जज के रूप में चुने जाने पर बधाई और शुभकामनाएँ दीं। पटेल सितंबर 2026 में ट्रिब्यूनल में अपना पद ग्रहण करेंगे, जिससे इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय निकाय में भारत का प्रतिनिधित्व निरंतर बना रहेगा।

मुलाकात और बधाई का ब्यौरा

जयशंकर ने इस मुलाकात की तस्वीर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए लिखा, 'आज प्रो. डॉ. बिमल एन. पटेल से मिलकर खुशी हुई। इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ऑफ द लॉ ऑफ द सी के जज के तौर पर हाल ही में चुने जाने पर उन्हें बधाई दी। उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।' पटेल का यह चुनाव यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (यूएनसीएलओएस) के हस्ताक्षरकर्ता देशों द्वारा संपन्न हुआ।

चुनाव प्रक्रिया और मतदान

यह चुनाव समुद्री कानून कन्वेंशन के स्टेट्स पार्टीज की 36वीं बैठक के दौरान हुआ। इस वर्ष ट्रिब्यूनल की सात सीटों पर मतदान होना था, जिनमें से दो एशियाई क्षेत्र के लिए आरक्षित थीं। पटेल ने 168 वैध मतों में से 115 मत प्राप्त कर यह सीट जीती, जबकि दूसरी एशियाई सीट वियतनाम के गुयेन लैन-अन्ह थी को मिली। गौरतलब है कि पिछले वर्ष से ही भारतीय राजनयिक संयुक्त राष्ट्र में पटेल के पक्ष में सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे थे।

भारत का निरंतर प्रतिनिधित्व

पटेल के चुने जाने का विशेष महत्व यह है कि न्यायाधीश नीरू चड्ढा के नौ वर्षीय कार्यकाल के सितंबर में समाप्त होने के बाद भी आईटीएलओएस में भारत की उपस्थिति बनी रहेगी। भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने कहा है कि पटेल का चुनाव बहुपक्षवाद और समुद्र के कानून के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है।

बिमल पटेल: परिचय और योगदान

प्रो. बिमल एन. पटेल अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ हैं और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय कानून आयोग के सदस्य हैं। इसके साथ ही वे गुजरात स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) का दायित्व भी निभा रहे हैं। उनके पदों में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड की सदस्यता भी शामिल है।

आईटीएलओएस: भूमिका और महत्व

जर्मनी के हैम्बर्ग में स्थित इस ट्रिब्यूनल में 21 न्यायाधीश होते हैं, जो समुद्र और महासागरों से संबंधित विवादों पर फैसला सुनाते हैं तथा समुद्री कानून की व्याख्या करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सीमाओं को लेकर तनाव बढ़ रहा है और भारत की समुद्री कानून में सक्रिय भागीदारी की रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिमल एन. पटेल को किस पद पर चुना गया है?
बिमल एन. पटेल को इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ऑफ द लॉ ऑफ द सी (आईटीएलओएस) का जज चुना गया है। यह जर्मनी के हैम्बर्ग स्थित 21-सदस्यीय ट्रिब्यूनल है जो समुद्री विवादों पर फैसला सुनाता है।
बिमल पटेल को कितने मत मिले और चुनाव कहाँ हुआ?
पटेल को 168 वैध मतों में से 115 मत मिले। यह चुनाव यूएनसीएलओएस स्टेट्स पार्टीज की 36वीं बैठक के दौरान हुआ, जिसमें एशियाई क्षेत्र की दो सीटें भारत और वियतनाम को मिलीं।
आईटीएलओएस में भारत का प्रतिनिधित्व पहले कौन कर रहे थे?
इससे पहले न्यायाधीश नीरू चड्ढा आईटीएलओएस में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। सितंबर में उनका नौ वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के बाद बिमल पटेल यह जिम्मेदारी संभालेंगे।
बिमल एन. पटेल कौन हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है?
प्रो. बिमल एन. पटेल अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ हैं। वे वर्तमान में गुजरात स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति, संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय कानून आयोग के सदस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य हैं।
आईटीएलओएस में भारत की उपस्थिति क्यों महत्वपूर्ण है?
आईटीएलओएस समुद्री कानून की व्याख्या करने वाला सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय न्यायिक निकाय है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते समुद्री विवादों के बीच इस ट्रिब्यूनल में भारतीय जज की उपस्थिति देश को समुद्री नीति-निर्माण में प्रभावशाली स्थान देती है और बहुपक्षवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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