झारखंड राज्यसभा चुनाव: परिमल नाथवानी के नामांकन पर आपत्तियां, 10 जून को सुबह 11 बजे सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव में एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र पर दर्ज आपत्तियों के चलते उनकी नामांकन जांच प्रक्रिया 10 जून तक स्थगित कर दी गई है। निर्वाचन पदाधिकारी रंजीत कुमार ने नाथवानी को आपत्तियों का बिंदुवार लिखित जवाब देने का निर्देश जारी किया है।
आपत्तियां किसने और क्यों दर्ज कीं
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के प्रस्तावक एवं कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी की ओर से नाथवानी के नामांकन पत्र में कथित त्रुटियों को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई गईं। निर्वाचन पदाधिकारी ने तत्काल निर्णय देने के बजाय सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने का फैसला किया।
सुनवाई की प्रक्रिया
निर्वाचन पदाधिकारी के जारी पत्र के अनुसार, परिमल नाथवानी को 10 जून को सुबह 11 बजे तक स्वयं अथवा अपने निर्वाचन अभिकर्ता, प्रस्तावक या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होकर आपत्तियों का जवाब देना होगा। इसी समय कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) उम्मीदवार बैद्यनाथ राम को भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार नाथवानी के नामांकन पत्र में त्रुटियां हैं, जिन्हें लेकर शिकायतें दर्ज की गई हैं। बघेल ने यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया में सभी उम्मीदवारों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए। गौरतलब है कि निर्वाचन अधिकारियों ने अभी तक नामांकन को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है।
चुनावी समीकरण
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है। सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन की ओर से झामुमो के बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा मैदान में हैं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी एनडीए के समर्थन से चुनाव लड़ रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सत्ता और विपक्ष के बीच राज्यसभा सीटों को लेकर सीधी टक्कर है।
आगे क्या होगा
नाथवानी का नामांकन स्वीकार होगा या खारिज, इसका फैसला 10 जून को आपत्तियों और उनके जवाब पर विचार के बाद लिया जाएगा। इस निर्णय का सीधा असर 18 जून को होने वाले मतदान की प्रतिस्पर्धी तस्वीर पर पड़ेगा।