राज्यसभा चुनाव 2025: परिमल नाथवानी की जीत पर एनडीए में जश्न, मरांडी बोले — 'विधायकों ने राज्यहित को दी प्राथमिकता'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और गठबंधन खेमे में उत्साह का माहौल है। 18 जून को घोषित परिणामों में नाथवानी को 28 प्रथम वरीयता मत मिले, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बैजनाथ राम 31 मतों से विजयी हुए।
मतगणना का पूरा विवरण
मतगणना के आँकड़ों के अनुसार, झारखंड विधानसभा के 81 विधायकों ने मतदान में भाग लिया। बैजनाथ राम को 31, परिमल नाथवानी को 28, और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार प्रणव झा को 19 मत प्राप्त हुए। तीन मत अवैध घोषित किए गए। इस प्रकार दोनों सीटें — एक झामुमो और एक एनडीए के खाते में गईं।
मरांडी की प्रतिक्रिया
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने एनडीए गठबंधन के सभी नेताओं और विधायकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि 'प्रथम वरीयता के आधार पर परिमल नाथवानी को 28 मत मिलना इस बात का संकेत है कि राज्य के विधायकों ने राज्यहित को प्राथमिकता देते हुए सोच-समझकर निर्णय लिया है।' मरांडी ने यह भी रेखांकित किया कि नाथवानी लगातार दो कार्यकाल से झारखंड का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और राज्य के विकास तथा जनहित के मुद्दों से जुड़े रहे हैं।
चंपई सोरेन की बधाई
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने भी नाथवानी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि नाथवानी 'केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को झारखंड के आम लोगों तक पहुँचाने में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे।' सोरेन ने इसे गठबंधन की महत्वपूर्ण जीत बताया।
नाथवानी का झारखंड से जुड़ाव
गौरतलब है कि परिमल नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े रहे हैं और झारखंड से तीसरी बार राज्यसभा पहुँचने वाले हैं। मरांडी के अनुसार, झारखंड और यहाँ के लोगों से उनका गहरा जुड़ाव रहा है, और दोबारा सेवा का अवसर मिलने से राज्य को लाभ मिलेगा। यह जीत ऐसे समय में आई है जब झारखंड में झामुमो नीत सरकार सत्ता में है और विधानसभा में एनडीए अल्पमत में है — इस पृष्ठभूमि में 28 मत जुटाना एनडीए के लिए उल्लेखनीय माना जा रहा है।
आगे की राह
नाथवानी की जीत के बाद एनडीए अब राज्यसभा में झारखंड की एक सीट पर अपनी उपस्थिति बनाए रखेगा। राज्य के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह परिणाम आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।