झारखंड राज्यसभा चुनाव: इंडिया गठबंधन में बड़ी दरार, कांग्रेस प्रभारी के. राजू का राजद-भाकपा (माले) पर धोखे का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में 18 जून 2026 को संपन्न राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। इंडिया गठबंधन के पास विधानसभा में 56 विधायकों का पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद वह अपने दोनों उम्मीदवारों को जिताने में नाकाम रहा। नतीजों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग हुई, जिसका सीधा लाभ एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को मिला।
चुनाव परिणाम: कौन जीता, कौन हारा
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम को 31 वोट मिले और वे विजयी घोषित हुए। एनडीए समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवानी को 30 वोट प्राप्त हुए, जिनमें से दो मत अमान्य घोषित किए गए — इस तरह 28 वैध मतों के आधार पर उन्होंने जीत दर्ज की। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 20 वोट मिले, जिनमें एक मत अमान्य रहा, और उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि सभी 81 विधायकों ने इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
क्रॉस वोटिंग का गणित
झारखंड विधानसभा में एनडीए के पास भारतीय जनता पार्टी (BJP), आजसू, जदयू और लोजपा सहित कुल 24 विधायक हैं। इसके बावजूद नाथवानी के खाते में 30 वोट पहुँचना यह स्पष्ट करता है कि उन्हें विपक्षी खेमे से कम से कम छह अतिरिक्त मत मिले। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कम से कम सात विधायकों ने गठबंधन की तय लाइन से अलग जाकर मतदान किया, हालाँकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन की संरचना पर नज़र डालें तो झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 4 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) (भाकपा-माले) के 2 विधायक गठबंधन के साथ हैं — यह संख्या दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त थी।
कांग्रेस का आरोप: राजद और भाकपा (माले) ने दिया धोखा
झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने सीधे आरोप लगाया कि राजद और भाकपा (माले) ने पार्टी को धोखा दिया, जिसके कारण कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार झेलनी पड़ी। हालाँकि, दोनों दलों की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। नतीजों के बाद से कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
इंडिया गठबंधन पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव ने एक बार फिर झारखंड की राजनीति में क्रॉस वोटिंग की परंपरा को रेखांकित किया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब इंडिया गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि संख्या बल कम होने के बावजूद नाथवानी की जीत यह दर्शाती है कि चुनावी गणित के पीछे राजनीतिक समीकरणों ने निर्णायक भूमिका निभाई।
कांग्रेस उम्मीदवार की हार ने इंडिया गठबंधन के भीतर समन्वय और आपसी विश्वास को लेकर नए और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में गठबंधन के भीतर जवाबदेही तय करने की माँग और तेज़ होने की संभावना है।