11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झारखंड राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस की हार के बाद इंडी गठबंधन में दरार, राजद-माले ने आरोप किए खारिज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झारखंड राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस की हार के बाद इंडी गठबंधन में दरार, राजद-माले ने आरोप किए खारिज

सारांश

झारखंड में राज्यसभा की सीट गँवाने के बाद कांग्रेस ने राजद और माले पर क्रॉसवोटिंग का आरोप लगाया — लेकिन दोनों दलों ने पलटकर कांग्रेस के अपने संगठनात्मक ढाँचे पर सवाल खड़े कर दिए। संख्याबल अनुकूल होने के बावजूद हार ने इंडी गठबंधन की आंतरिक एकता की कलई खोल दी।

मुख्य बातें

झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा; झामुमो के बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित परिमल नाथवाणी विजयी रहे।
कांग्रेस प्रभारी के.
राजू ने राजद और भाकपा (माले) के कुछ विधायकों पर क्रॉसवोटिंग का आरोप लगाया।
राजद महासचिव भोला यादव ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों ने लालू प्रसाद यादव के निर्देश पर इंडी उम्मीदवार को वोट दिया।
भाकपा (माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि बिना प्रमाण आरोप लगाने से गठबंधन की विश्वसनीयता को नुकसान होगा।
विधानसभा में इंडी गठबंधन का संख्याबल अनुकूल होने के बावजूद कांग्रेस की हार ने महागठबंधन के अंतर्विरोधों को उजागर किया।

झारखंड में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद इंडी गठबंधन के भीतर आपसी तनाव खुलकर सामने आ गया है। परिणाम घोषित होने के कुछ ही घंटों में कांग्रेस ने सहयोगी दलों — राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) — पर क्रॉसवोटिंग का आरोप मढ़ दिया, जिसके जवाब में दोनों दलों ने कांग्रेस के संगठनात्मक प्रबंधन और विधायकों पर उसकी पकड़ को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।

चुनाव परिणाम और संख्याबल का विरोधाभास

राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए इस चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी विजयी रहे। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। यह ऐसे समय में आया जब झारखंड विधानसभा में संख्याबल इंडिया गठबंधन के स्पष्ट पक्ष में था — इस विरोधाभास ने राजनीतिक हलकों में गठबंधन की आंतरिक मजबूती को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कांग्रेस के आरोप

झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने परिणाम के बाद कहा कि कांग्रेस और झामुमो की ओर से अपेक्षित वोट मिले, लेकिन राजद और भाकपा (माले) का समर्थन नहीं मिला। उन्होंने इन दोनों सहयोगी दलों के कुछ विधायकों पर एनडीए समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग का आरोप लगाया।

कांग्रेस विधायक एवं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भी सहयोगी दलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि महागठबंधन के घटक दलों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मतदान के दौरान उनका रुख क्या था।

राजद का पलटवार

राजद ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया। राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और शीर्ष नेतृत्व के निर्देशानुसार इंडी गठबंधन उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। उन्होंने दावा किया कि वे स्वयं अधिकृत एजेंट के रूप में मतदान के दौरान उपस्थित थे और विधायकों ने उन्हें वोट दिखाकर मतदान किया। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को 'तथ्यहीन और दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया।

राजद के प्रदेश अध्यक्ष एवं मंत्री संजय यादव ने कहा कि राजद हमेशा गठबंधन धर्म का पालन करने वाली पार्टी रही है और कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने संगठन और विधायकों की स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। राजद विधायक सुरेश पासवान ने भी यह दावा किया कि राजद के चारों विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में ही मतदान किया।

भाकपा (माले) का प्रतिवाद

भाकपा (माले) ने भी कांग्रेस के आरोपों का कड़ा खंडन किया। पार्टी के झारखंड राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि माले के दोनों विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार को ही वोट दिया और मतदान के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि मौजूद थे, जिन्होंने वोटिंग प्रक्रिया का सत्यापन किया।

भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि कांग्रेस अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए सहयोगी दलों पर आरोप लगा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना प्रमाण के सहयोगियों पर इस तरह के आरोप लगाने से इंडी गठबंधन की एकजुटता और विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव परिणाम ने महागठबंधन के भीतर मौजूद अंतर्विरोधों को सार्वजनिक मंच पर ला दिया है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इंडी गठबंधन के घटक दल किसी चुनाव के बाद परस्पर आरोप-प्रत्यारोप में उलझे हों — यह प्रवृत्ति गठबंधन की दीर्घकालिक एकजुटता के बारे में सवाल उठाती है। कांग्रेस जहाँ क्रॉसवोटिंग के लिए सहयोगियों को जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं राजद और माले का तर्क है कि कांग्रेस अपने ही विधायकों का पूरा समर्थन जुटाने में विफल रही। आने वाले दिनों में गठबंधन के भीतर इस विवाद का समाधान झारखंड की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह दर्शाता है कि गठबंधन के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही का तंत्र अभी तक नहीं बना। यह ऐसे समय में आया है जब 2024 के आम चुनावों में इंडी गठबंधन की सीमित सफलता के बाद इसकी प्रासंगिकता पहले से ही सवालों के घेरे में है। बिना आंतरिक अनुशासन तंत्र के, ऐसे सार्वजनिक विवाद गठबंधन को एकजुट रखने की बजाय उसे कमज़ोर करते हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड राज्यसभा चुनाव में कौन जीता और कौन हारा?
झारखंड मुक्ति मोर्चा के बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी विजयी रहे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। यह हार इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि विधानसभा में संख्याबल इंडी गठबंधन के पक्ष में था।
कांग्रेस ने राजद और माले पर क्या आरोप लगाए?
झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने आरोप लगाया कि राजद और भाकपा (माले) के कुछ विधायकों ने एनडीए समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की। कांग्रेस मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भी सहयोगी दलों से उनके मतदान के रुख पर सफाई माँगी।
राजद ने कांग्रेस के आरोपों का क्या जवाब दिया?
राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों ने लालू प्रसाद यादव के निर्देश पर इंडी उम्मीदवार को वोट दिया और वे स्वयं अधिकृत एजेंट के रूप में मौजूद थे। राजद प्रदेश अध्यक्ष संजय यादव ने कांग्रेस को पहले अपने संगठन की समीक्षा करने की सलाह दी।
भाकपा (माले) ने क्रॉसवोटिंग के आरोपों पर क्या कहा?
भाकपा (माले) के झारखंड राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि पार्टी के दोनों विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार को ही वोट दिया और अधिकृत प्रतिनिधि वोटिंग के दौरान उपस्थित थे। महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि बिना प्रमाण के आरोप लगाने से इंडी गठबंधन की एकजुटता को नुकसान होगा।
इस विवाद का इंडी गठबंधन पर क्या असर पड़ सकता है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद महागठबंधन के भीतर पहले से मौजूद अंतर्विरोधों को सार्वजनिक कर चुका है। आपसी आरोप-प्रत्यारोप और विश्वास की कमी गठबंधन की दीर्घकालिक एकजुटता और झारखंड में इसकी राजनीतिक प्रभावशीलता के लिए चुनौती बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले