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झारखंड राज्यसभा चुनाव: झामुमो का बड़ा बयान — छह विधायकों ने महागठबंधन से की गद्दारी

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झारखंड राज्यसभा चुनाव: झामुमो का बड़ा बयान — छह विधायकों ने महागठबंधन से की गद्दारी

सारांश

झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद महागठबंधन में भूचाल — झामुमो ने माना कि छह विधायकों ने विश्वासघात किया, लेकिन कार्रवाई पर चुप्पी। गठबंधन की एकजुटता अब सवालों के घेरे में है।

मुख्य बातें

झारखंड राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 21 वोट मिले, जिनमें से एक रद्द हो गया।
झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने स्वीकार किया कि छह विधायकों ने गठबंधन के साथ गद्दारी की।
भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को 28 वोट मिले और वे विजयी रहे।
महागठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन था — झामुमो 34 , कांग्रेस 16 , राजद 4 , भाकपा (माले) 2 ।
विश्वासघाती विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई के सवाल पर झामुमो ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
राजद और भाकपा (माले) के गठबंधन में बने रहने पर अभी तक कोई आधिकारिक स्थिति नहीं।

झारखंड राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद रांची की सियासत में भूचाल आ गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव एवं प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने सोमवार, 22 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुलासा किया कि गठबंधन के छह विधायकों ने मतदान के दौरान विश्वासघात किया, जिससे भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत का मार्ग प्रशस्त हुआ।

क्या हुआ राज्यसभा चुनाव में

झारखंड विधानसभा में महागठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन था — इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा (माले) के 2 विधायक शामिल हैं। इस संख्याबल के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 21 वोट मिले, जिनमें से एक वोट रद्द हो गया। बताया जा रहा है कि पाँच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की और एक मत अवैध घोषित हुआ। इन छह मतों के कारण नाथवानी की जीत सुनिश्चित हो गई।

सुप्रियो भट्टाचार्य का बयान

भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि गठबंधन के पक्ष में मतदान करने वाले 50 विधायकों के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हैं। वहीं, जिन 28 विधायकों ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी को वोट दिया, उनके नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं — यह भट्टाचार्य का सीधा राजनीतिक संदेश था। हालाँकि, विश्वासघात करने वाले विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और इस विषय को टाल गए।

कांग्रेस का पूर्व दावा और वित्त मंत्री का बयान

गौरतलब है कि चुनाव से दो दिन पहले कांग्रेस ने 12 विधायकों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की एकजुटता का दावा किया था। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने उस दौरान कहा था, 'हमें विष भी पीना पड़े तो पी लेंगे, लेकिन गठबंधन के अस्तित्व पर कोई आंच नहीं आने देंगे। हम एक थे, एक हैं और एक ही रहेंगे।' किशोर ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की कुछ टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए संवेदनशील समय में अनावश्यक बयानबाजी से बचने की अपील भी की थी।

गठबंधन के भविष्य पर सवाल

झामुमो के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में महागठबंधन के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। यह सवाल उठ रहा है कि क्या राजद और भाकपा (माले) के साथ गठबंधन में कोई फेरबदल होगा या उन्हें सरकार से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। अभी तक किसी भी दल की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में हुआ है जब झारखंड में महागठबंधन सरकार को विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। क्रॉस वोटिंग की यह घटना न केवल आंतरिक अनुशासन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आगामी विधानसभा सत्रों में गठबंधन की स्थिरता की परीक्षा भी लेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक विश्वासघाती विधायकों की पहचान सार्वजनिक नहीं होती और उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं होती, तब तक गठबंधन के भीतर अविश्वास की यह खाई और गहरी होती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जवाबदेही की नहीं। असली सवाल यह है कि 56 विधायकों की संख्या के बावजूद महागठबंधन अपने ही सदस्यों को अनुशासित क्यों नहीं कर सका। कार्रवाई पर चुप्पी यह संकेत देती है कि गठबंधन की आंतरिक दरारें उससे कहीं गहरी हैं जितनी सतह पर दिखती हैं, और राजद-माले को लेकर जो अनिश्चितता है वह आने वाले विधानसभा सत्रों में सरकार की स्थिरता के लिए बड़ा जोखिम बन सकती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग क्या हुई?
महागठबंधन के 56 विधायकों का समर्थन होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 21 वोट मिले, जिनमें से एक रद्द हो गया। झामुमो के अनुसार पाँच विधायकों ने गठबंधन के विरुद्ध मतदान किया और एक वोट अवैध हुआ, जिससे भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी जीत गए।
झामुमो ने क्रॉस वोटिंग पर क्या कहा?
झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने 22 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि छह विधायकों ने गठबंधन के साथ गद्दारी की। हालाँकि, उन्होंने इन विधायकों के नाम नहीं बताए और उनके विरुद्ध कार्रवाई के सवाल पर कोई स्पष्ट उत्तर देने से बचे।
परिमल नाथवानी कौन हैं और वे कैसे जीते?
परिमल नाथवानी भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार थे, जिन्हें राज्यसभा चुनाव में 28 वोट मिले। महागठबंधन के छह मतों (पाँच क्रॉस वोट और एक रद्द मत) के कारण कांग्रेस उम्मीदवार को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला और नाथवानी विजयी रहे।
महागठबंधन में कौन-कौन से दल शामिल हैं?
झारखंड महागठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 4 और भाकपा (माले) के 2 विधायक शामिल हैं, जो कुल 56 की संख्या बनाते हैं।
क्या महागठबंधन टूटेगा?
अभी तक किसी भी दल ने गठबंधन छोड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालाँकि, राजद और भाकपा (माले) के साथ संबंधों को लेकर अटकलें जारी हैं। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पहले कहा था कि गठबंधन 'अटूट' है, लेकिन क्रॉस वोटिंग की घटना के बाद यह दावा कमज़ोर पड़ गया है।
राष्ट्र प्रेस
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