झारखंड राज्यसभा चुनाव: झामुमो का बड़ा बयान — छह विधायकों ने महागठबंधन से की गद्दारी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद रांची की सियासत में भूचाल आ गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव एवं प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने सोमवार, 22 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुलासा किया कि गठबंधन के छह विधायकों ने मतदान के दौरान विश्वासघात किया, जिससे भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत का मार्ग प्रशस्त हुआ।
क्या हुआ राज्यसभा चुनाव में
झारखंड विधानसभा में महागठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन था — इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा (माले) के 2 विधायक शामिल हैं। इस संख्याबल के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 21 वोट मिले, जिनमें से एक वोट रद्द हो गया। बताया जा रहा है कि पाँच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की और एक मत अवैध घोषित हुआ। इन छह मतों के कारण नाथवानी की जीत सुनिश्चित हो गई।
सुप्रियो भट्टाचार्य का बयान
भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि गठबंधन के पक्ष में मतदान करने वाले 50 विधायकों के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हैं। वहीं, जिन 28 विधायकों ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी को वोट दिया, उनके नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं — यह भट्टाचार्य का सीधा राजनीतिक संदेश था। हालाँकि, विश्वासघात करने वाले विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और इस विषय को टाल गए।
कांग्रेस का पूर्व दावा और वित्त मंत्री का बयान
गौरतलब है कि चुनाव से दो दिन पहले कांग्रेस ने 12 विधायकों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की एकजुटता का दावा किया था। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने उस दौरान कहा था, 'हमें विष भी पीना पड़े तो पी लेंगे, लेकिन गठबंधन के अस्तित्व पर कोई आंच नहीं आने देंगे। हम एक थे, एक हैं और एक ही रहेंगे।' किशोर ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की कुछ टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए संवेदनशील समय में अनावश्यक बयानबाजी से बचने की अपील भी की थी।
गठबंधन के भविष्य पर सवाल
झामुमो के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में महागठबंधन के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। यह सवाल उठ रहा है कि क्या राजद और भाकपा (माले) के साथ गठबंधन में कोई फेरबदल होगा या उन्हें सरकार से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। अभी तक किसी भी दल की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में हुआ है जब झारखंड में महागठबंधन सरकार को विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। क्रॉस वोटिंग की यह घटना न केवल आंतरिक अनुशासन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आगामी विधानसभा सत्रों में गठबंधन की स्थिरता की परीक्षा भी लेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक विश्वासघाती विधायकों की पहचान सार्वजनिक नहीं होती और उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं होती, तब तक गठबंधन के भीतर अविश्वास की यह खाई और गहरी होती रहेगी।