झारखंड राज्यसभा चुनाव: झामुमो ने दोनों सीटों पर ठोका दावा, कांग्रेस से गठबंधन में दरार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर खुला टकराव सामने आ गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायकों ने 6 जून 2025 को मुख्यमंत्री आवास में हुई बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि पार्टी दोनों राज्यसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी — यह फैसला कांग्रेस द्वारा अपने उम्मीदवार प्रणव झा की घोषणा के महज़ करीब 12 घंटे बाद आया। इस घटनाक्रम ने गठबंधन की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
झामुमो विधायकों की बैठक और निर्णय
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में झामुमो विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। बैठक के बाद पार्टी नेता योगेंद्र प्रसाद और हफीजुल हसन ने मीडिया को बताया कि सभी विधायकों की सर्वसम्मत राय बनी है कि दोनों राज्यसभा सीटों पर झामुमो के प्रत्याशी उतारे जाएँ। विधायकों ने उम्मीदवारों के चयन का अंतिम अधिकार हेमंत सोरेन को सौंपा है। झामुमो नेताओं ने स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों के नामों की घोषणा 8 जून से पहले कर दी जाएगी।
कांग्रेस की उम्मीदवारी और गठबंधन की उम्मीदें
इससे पहले गुरुवार देर रात कांग्रेस ने एआईसीसी सचिव और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के राजनीतिक सलाहकार प्रणव झा को झारखंड से राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया था। इस घोषणा से पहले खड़गे ने स्वयं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत की थी। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने भी हाल के दिनों में रांची पहुँचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और राज्यसभा की एक सीट कांग्रेस को देने का आग्रह किया था।
कांग्रेस की घोषणा के बाद यह माना जा रहा था कि गठबंधन के भीतर सीटों के बँटवारे पर सहमति बन गई है, लेकिन झामुमो की बैठक के फैसले ने इस धारणा को पलट दिया।
झामुमो का तर्क: सबसे बड़े दल का स्वाभाविक दावा
झामुमो नेताओं ने अपनी दावेदारी का आधार यह बताया कि झारखंड में सबसे बड़े राजनीतिक दल होने के नाते दोनों राज्यसभा सीटों पर पार्टी का स्वाभाविक अधिकार बनता है। गौरतलब है कि झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्याबल उपलब्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब गठबंधन के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान और मतभेद अब सार्वजनिक रूप से सामने आ गए हैं।
गठबंधन की एकजुटता पर सवाल
कांग्रेस जहाँ अपने उम्मीदवार की घोषणा के बाद पीछे हटने के संकेत नहीं दे रही, वहीं झामुमो भी दोनों सीटों पर अपनी दावेदारी छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहा। नामांकन प्रक्रिया के बीच दोनों सहयोगी दलों के बीच बढ़ी यह खींचतान झारखंड की राजनीति का सबसे बड़ा घटनाक्रम बन गई है। अब सभी की निगाहें हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि गठबंधन बचता है या बिखरता है।