झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: सीट बंटवारे पर हेमंत सोरेन से कांग्रेस की तीन घंटे की मैराथन बैठक, फैसला अधर में
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर गठबंधन की सियासत तेज हो गई है। शुक्रवार, 29 मई को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के बीच करीब तीन घंटे की अहम बैठक हुई। दोनों सीटों पर उम्मीदवारों के नाम और सीट बंटवारे पर अब तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।
बैठक में कौन-कौन शामिल रहे
मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू, सह-प्रभारी डॉ. सिरिवेला प्रसाद, तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश उपस्थित रहे। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री सोरेन को यह संदेश दिया कि गठबंधन धर्म के तहत राज्यसभा की एक सीट कांग्रेस के खाते में आनी चाहिए।
झामुमो का रुख और संभावित उम्मीदवार
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने फिलहाल सीट बंटवारे पर अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया है। पार्टी के कई बड़े नेता दोनों सीटों पर झामुमो के ही उम्मीदवार उतारने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। झामुमो की ओर से जिन नामों की चर्चा है उनमें सीएम की पत्नी कल्पना सोरेन, उनकी बहन अंजनी सोरेन, पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी और पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर शामिल हैं।
कांग्रेस में उम्मीदवारी की दौड़
कांग्रेस के भीतर भी दावेदारों की लॉबिंग तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता, फुरकान अंसारी, प्रदीप बलमुचू और धीरज साहू के नामों पर विचार हो रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे और हार का सामना करने वाले पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर ने एक बार फिर अपनी दावेदारी जताते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखा है।
कांग्रेस प्रभारी का स्पष्ट संदेश
कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने साफ कहा कि इस बार पार्टी किसी बाहरी चेहरे को चुनावी मैदान में नहीं उतारेगी। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार झारखंड से जुड़ा, जमीनी स्तर पर सक्रिय और संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाला स्थानीय नेता ही होगा। यह बयान उन अटकलों को विराम देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है जिनमें किसी बाहरी या दिल्ली-केंद्रित नाम की संभावना जताई जा रही थी।
आगे क्या होगा
गठबंधन में सीट बंटवारे का अंतिम फैसला अभी बाकी है और दोनों दलों में मंथन का दौर जारी है। 18 जून की मतदान तिथि को देखते हुए नामांकन की समयसीमा नजदीक आने के साथ-साथ दबाव बढ़ता जाएगा। यह देखना अहम होगा कि क्या झामुमो कांग्रेस की एक सीट की माँग मानती है या दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारती है।