1 अक्टूबर 2026
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भारत-मर्कोसुर व्यापार समझौता विस्तार पर काम जारी, ब्राजील के मंत्री रोसा बोले — 'भारत दुनिया के लिए अहम'

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भारत-मर्कोसुर व्यापार समझौता विस्तार पर काम जारी, ब्राजील के मंत्री रोसा बोले — 'भारत दुनिया के लिए अहम'

सारांश

ब्राजील के मंत्री मार्सियो एलियास रोसा ने मिल्वौकी में पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद साफ किया — भारत-मर्कोसुर का मौजूदा 450 आइटम वाला टैरिफ समझौता बेहद सीमित है और अब एक व्यापक ढाँचे की तरफ बढ़ने के लिए 'काम की रूपरेखा' का मसौदा तैयार कर लिया गया है।

मुख्य बातें

ब्राजील के मंत्री मार्सियो एलियास रोसा ने 1 अक्टूबर 2026 को मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के इतर भारत के साथ व्यापार विस्तार पर बड़ा बयान दिया।
मौजूदा भारत-मर्कोसुर प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट में केवल 450 टैरिफ आइटम शामिल हैं, जिसे 'बेहद सीमित' बताया गया।
दोनों देशों ने आगे की वार्ता के लिए 'काम की रूपरेखा' का मसौदा तैयार कर लिया है।
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक को रोसा ने 'बेहतरीन' बताया।
सहयोग के संभावित क्षेत्रों में बायो-इकोनॉमी, डिजिटल इकोनॉमी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्किल डेवलपमेंट और रक्षा शामिल हैं।

ब्राजील के विकास, उद्योग, व्यापार और सेवा मंत्री मार्सियो एलियास रोसा ने 1 अक्टूबर 2026 को मिल्वौकी में आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के इतर कहा कि भारत, ब्राजील के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और दोनों देश मौजूदा भारत-मर्कोसुर प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट को व्यापक रूप देने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि फिलहाल के समझौते में केवल 450 टैरिफ आइटम शामिल हैं, जो इसकी संभावनाओं के लिहाज से बेहद सीमित है।

बैठक का संदर्भ

मंत्री रोसा ने यह बातचीत भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के तुरंत बाद की। रोसा ने बैठक को 'बेहतरीन' बताते हुए कहा, 'हमने अभी जिन चीजों पर चर्चा की, उनमें दोनों अर्थव्यवस्थाओं और मर्कोसुर के बीच एक व्यापक समझौते की संभावना शामिल है।' यह बैठक जी20 व्यापार मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान आयोजित हुई।

मर्कोसुर समझौते की सीमाएँ और विस्तार की ज़रूरत

रोसा ने स्पष्ट किया कि भारत और मर्कोसुर — जो कि ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पराग्वे जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों का व्यापार समूह है — के बीच मौजूदा समझौता बहुत संकीर्ण दायरे में सिमटा हुआ है। उनके शब्दों में, 'हमारे पास पहले से ही टैरिफ प्रेफरेंस एग्रीमेंट है, लेकिन यह बहुत सीमित है। इसमें सिर्फ 450 टैरिफ आइटम शामिल हैं। इस कारण हमें इसे बढ़ाने की जरूरत है।' गौरतलब है कि भारत और मर्कोसुर के बीच यह प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट पहले से अस्तित्व में है, लेकिन व्यापक मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था।

काम की रूपरेखा तैयार

रोसा के अनुसार, दोनों पक्षों ने अब 'काम की रूपरेखा' का मसौदा तैयार कर लिया है, जो आगे की वार्ता के लिए आधार बनेगा। उन्होंने बताया, 'यह वैसा ही है जैसा अभी अमेरिका के साथ तैयार किया जा रहा है।' यह रूपरेखा एक बार स्वीकृत हो जाने के बाद औपचारिक प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे और वार्ता का अगला चरण शुरू होगा। रोसा ने संकेत दिया कि आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया को गति मिलेगी।

सहयोग के संभावित क्षेत्र

मंत्री ने बताया कि ब्राजील और भारत के बीच केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित न रहकर कई नए क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएँ हैं। इनमें बायो-इकोनॉमी, सर्कुलर इकोनॉमी और डिजिटल इकोनॉमी प्रमुख हैं। इसके अलावा उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्किल डेवलपमेंट और रक्षा क्षेत्र में भी द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की बात कही। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर कई देशों के साथ व्यापार समझौतों का विस्तार कर रहा है।

आगे की राह

यह वार्ता दर्शाती है कि ब्राजील और भारत मौजूदा टैरिफ छूट से आगे बढ़कर अपने व्यापारिक संबंधों को और गहरा बनाने तथा उन क्षेत्रों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जहाँ बेहतर बाज़ार पहुँच के लिए बातचीत की जा सकती है। रोसा ने कहा कि भारत 'पूरी दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था' है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि 'काम की रूपरेखा' किस रफ्तार से औपचारिक वार्ता में परिणत होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इतिहास सतर्क रहने की सीख देता है — यह समझौता दो दशकों से अधिक समय से विस्तार की प्रतीक्षा में है और कई दौर की बातचीत के बावजूद 450 आइटम पर ही अटका रहा है। 'काम की रूपरेखा' का मसौदा तैयार होना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब राजनीतिक इच्छाशक्ति को कृषि, डेयरी और ऑटोमोबाइल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में टैरिफ रियायतों की कठिन बातचीत में उतारा जाएगा। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ब्राजील अमेरिका के साथ भी इसी तरह की रूपरेखा पर काम कर रहा है — यानी यह कदम भारत के लिए विशेष नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक रणनीति का हिस्सा है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-मर्कोसुर प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट क्या है?
यह भारत और मर्कोसुर व्यापार समूह (ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे, पराग्वे) के बीच एक टैरिफ रियायत समझौता है, जिसमें अभी केवल 450 टैरिफ आइटम शामिल हैं। ब्राजील के मंत्री के अनुसार यह समझौता व्यापार की वास्तविक क्षमता के मुकाबले बेहद सीमित है।
ब्राजील और भारत व्यापार समझौते को क्यों बढ़ाना चाहते हैं?
मंत्री रोसा के अनुसार, मौजूदा समझौते में शामिल 450 टैरिफ आइटम दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के व्यापार विस्तार की क्षमता को कहीं से भी नहीं दर्शाते। दोनों देश बायो-इकोनॉमी, डिजिटल इकोनॉमी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।
वार्ता का अगला चरण कब और कैसा होगा?
रोसा ने बताया कि 'काम की रूपरेखा' का मसौदा तैयार हो चुका है, जो औपचारिक प्रस्ताव बनाने का आधार बनेगा। आने वाले महीनों में इस पर और काम होने की उम्मीद जताई गई है, हालांकि कोई ठोस समयसीमा घोषित नहीं की गई।
पीयूष गोयल और मार्सियो रोसा की बैठक कहाँ हुई?
यह बैठक 1 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के मिल्वौकी शहर में जी20 व्यापार मंत्रियों के सम्मेलन के इतर हुई। रोसा ने इसे 'बेहतरीन' बैठक बताया।
मर्कोसुर क्या है और इसमें कौन-से देश शामिल हैं?
मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका का प्रमुख व्यापार समूह है, जिसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पराग्वे शामिल हैं। यह समूह आपसी व्यापार को बढ़ावा देने और सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं को एकीकृत करने के लिए काम करता है।
राष्ट्र प्रेस
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