बीजिंग में भारत-चीन सांस्कृतिक संवाद: मिड-ऑटम फेस्टिवल पर कथक, लालटेन और कविता का संगम
सारांश
मुख्य बातें
चीन स्थित भारतीय दूतावास, बीजिंग ने 24 सितंबर 2026 को मध्य-शरद उत्सव (मिड-ऑटम फेस्टिवल) के अवसर पर एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें कथक नृत्य, पारंपरिक लालटेन चित्रकारी और चीनी कविता के ज़रिए भारत-चीन सांस्कृतिक साझेदारी को एक नया आयाम मिला। इस आयोजन में भारत के चीन में राजदूत विक्रम दोराईस्वामी सहित दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
मुख्य घटनाक्रम
कार्यक्रम का केंद्र था भारत-चीन सांस्कृतिक साझेदारी सत्र, जिसमें मिड-ऑटम फेस्टिवल की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचय कराया गया। हॉराइजन इनसाइट्स सेंटर की टीम और भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से पारंपरिक लालटेन पर चित्र उकेरे — एक ऐसी गतिविधि जो त्योहार के उल्लास के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सहज संवाद का माध्यम भी बनी।
राजदूत विक्रम दोराईस्वामी, मिनिस्टर श्वेता सिंह और दूतावास के अन्य कर्मचारियों ने लैंटर्न पेंटिंग गतिविधि में सक्रिय रूप से भाग लिया।
कथक से जीवंत हुई चीनी कविता
कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण क्षण तब आया जब कलाकार डू जुआन ने कथक नृत्य की भाषा में चीन के प्रसिद्ध कवि सु शी की कविता 'प्रील्यूड टू वॉटर मेलोडी' को प्रस्तुत किया। कविता में कवि पूर्णिमा के चंद्रमा को निहारते हुए प्रश्न करता है कि चांद कब इतना उजला और पूर्ण होगा — और यह कल्पना करता है कि यदि वह स्वर्ग के महलों में चला जाए, तो क्या उस ऊंचाई की ठंड उसे मानवीय दुनिया से अलग कर देगी।
कविता की पंक्ति — 'अपनी परछाईं के साथ नाचना, इंसानों की दुनिया में होने से कैसे तुलना कर सकता है?' — भारतीय शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं में ढलकर इस सांस्कृतिक मेल का प्रतीक बन गई।
मिड-ऑटम फेस्टिवल का महत्व
मध्य-शरद उत्सव चीन के सबसे प्रतिष्ठित पारंपरिक त्योहारों में से एक है। यह चीनी पंचांग के अनुसार आठवें महीने की पंद्रहवीं तारीख को मनाया जाता है, जब चंद्रमा पूर्णतम होता है। यह त्योहार परिवार के पुनर्मिलन, सद्भाव और सामूहिक खुशी का प्रतीक माना जाता है। मूनकेक बाँटना, लालटेन सजाना और कविता पाठ इसकी प्रमुख परंपराएँ हैं।
गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब भारत और चीन के बीच राजनयिक और सांस्कृतिक संवाद को पुनः सक्रिय करने की कोशिशें जारी हैं।
सांस्कृतिक संवाद की व्यापक अर्थवत्ता
भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने यह दर्शाया कि संस्कृति, नृत्य और कला राजनयिक संबंधों को एक मानवीय और सहज धरातल पर ले जाने में सक्षम हैं। चांद, कविता, नृत्य और लालटेन — ये सब भिन्न सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ हैं, फिर भी इनमें लोगों को जोड़ने की साझा शक्ति है।
दूतावास कर्मचारियों और आमंत्रित अतिथियों ने मिलकर चीनी लोक संस्कृति में निहित एकता, परिवार और शुभकामनाओं के संदेश को करीब से अनुभव किया। आने वाले समय में भी ऐसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच जन-स्तरीय संपर्क को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।