चीन की 77वीं राष्ट्रीय दिवस पर वाशिंगटन में भव्य समारोह, 800 से अधिक मेहमान शामिल
सारांश
मुख्य बातें
चीनी दूतावास, वाशिंगटन डी.सी. ने 30 सितंबर 2026 को चीन लोक गणराज्य की स्थापना की 77वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया, जिसमें 800 से अधिक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस समारोह को चीन-अमेरिका संबंधों के वर्तमान दौर की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
समारोह में कौन-कौन शामिल हुए
समारोह में अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स के अलावा व्हाइट हाउस, विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय सहित विभिन्न अमेरिकी सरकारी विभागों के प्रतिनिधि, मित्रवत व्यक्तित्व और अमेरिका में तैनात कई देशों के राजदूत भी मौजूद रहे। इस स्तर की उपस्थिति इस बात का संकेत देती है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद के द्वार अभी खुले हुए हैं।
चीनी राजदूत का संबोधन
अमेरिका में चीनी राजदूत श्ये फंग ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह वर्ष चीन-अमेरिका संबंधों के लिहाज़ से विशेष महत्व रखता है। उन्होंने उल्लेख किया कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 11 वर्षों के अंतराल के बाद अमेरिका की राजकीय यात्रा की, और दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने छह महीने के भीतर एक-दूसरे के देशों की यात्राएँ पूरी कीं — जिसे उन्होंने चीन-अमेरिका संबंधों के इतिहास में एक असाधारण घटनाक्रम बताया।
श्ये फंग ने यह भी कहा कि यह वर्ष चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का पहला वर्ष है। उनके अनुसार, चीन एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण और राष्ट्रीय पुनरुत्थान की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है, और वैश्विक मंच पर स्थिरता तथा सकारात्मकता का स्रोत बन रहा है।
द्विपक्षीय सहयोग पर ज़ोर
राजदूत श्ये फंग ने कहा कि चीन का विकास दुनिया के लिए एक अवसर है, न कि खतरा। उन्होंने तर्क दिया कि चीन-अमेरिका सहयोग केवल दोनों देशों के लिए नहीं, बल्कि समूची मानव जाति के हित में है। उन्होंने दोनों देशों से अपील की कि वे सम्मान, निष्पक्षता और पारस्परिकता के सिद्धांतों पर आधारित एक रचनात्मक एवं रणनीतिक रूप से स्थिर संबंध निर्मित करें।
व्यापक संदर्भ: बदलते चीन-अमेरिका संबंध
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में चीन और अमेरिका के संबंध व्यापार, तकनीक और भू-राजनीति के मुद्दों पर काफी तनावपूर्ण रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास में इतने उच्च स्तर की अमेरिकी उपस्थिति को कूटनीतिक संबंधों में सामान्यीकरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय संवाद में हैं। आगे देखना होगा कि यह कूटनीतिक गर्मजोशी ठोस नीतिगत प्रगति में बदल पाती है या नहीं।