चांगमू बंदरगाह से 10 लाख यात्री पार : शीत्सांग में ऐतिहासिक उपलब्धि
सारांश
Key Takeaways
- चांगमू बंदरगाह से सितंबर 2023 से 20 अप्रैल 2025 तक कुल 10 लाख से अधिक यात्री गुजरे।
- 2015 के नेपाल भूकंप ने बंदरगाह को क्षतिग्रस्त किया था, जो 8 वर्ष बाद पूरी तरह बहाल हुआ।
- 2025 में केवल जनवरी से अप्रैल के बीच 4,26,000 से अधिक यात्रियों का निरीक्षण किया गया।
- बंदरगाह ने लगभग 20%25 वार्षिक वृद्धि दर हासिल की है।
- 80 से अधिक देशों के नागरिक इस बंदरगाह का उपयोग कर चुके हैं।
- वीजा-मुक्त पारगमन और ऑनलाइन प्रवेश कार्ड पंजीकरण नीतियों ने अंतर्राष्ट्रीय आकर्षण बढ़ाया।
बीजिंग, 24 अप्रैल 2025 — शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के शिगात्से शहर की न्यालम काउंटी स्थित चांगमू बंदरगाह ने एक ऐतिहासिक पड़ाव हासिल किया है। सितंबर 2023 में पूर्ण रूप से पुनः खुलने के बाद से 20 अप्रैल 2025 तक इस बंदरगाह से गुजरने वाले यात्रियों की कुल संख्या 10 लाख से अधिक हो चुकी है। यह जानकारी न्यालम आव्रजन और सीमा निरीक्षण केंद्र ने आधिकारिक रूप से जारी की है।
भूकंप से तबाही और फिर पुनर्निर्माण की कहानी
चांगमू बंदरगाह दक्षिण एशियाई उपमहाद्वीप में चीन के व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार रहा है। यह चीन और नेपाल के बीच सबसे बड़ा स्थलीय बंदरगाह था और एक प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र के रूप में जाना जाता था। 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप ने इस बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसके चलते सीमा शुल्क निकासी को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित करना पड़ा।
इसके बाद एक लंबी संक्रमणकालीन अवधि में माल परिवहन की आंशिक बहाली हुई। अंततः सितंबर 2023 में यह बंदरगाह पूरी तरह से फिर से चालू किया गया — भूकंप के लगभग 8 वर्ष बाद।
यात्री यातायात में तेज़ और निरंतर वृद्धि
बंदरगाह के दोबारा खुलने के बाद यात्री यातायात में उल्लेखनीय और निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। सितंबर 2023 से उसी वर्ष के अंत तक 1,33,000 से अधिक यात्रियों ने इस मार्ग का उपयोग किया। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 3,58,000 से अधिक हो गई।
वर्ष 2025 में वृद्धि की गति और तेज़ हुई — केवल जनवरी से 20 अप्रैल 2025 के बीच 4,26,000 से अधिक यात्रियों का आव्रजन निरीक्षण किया गया। इस प्रकार पुनः संचालन के बाद से कुल यात्री संख्या 10 लाख के पार पहुंच गई है।
उल्लेखनीय है कि पुनर्निर्माण के बाद से चांगमू बंदरगाह ने लगभग 20 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर हासिल की है, जो भौतिक पुनर्निर्माण और संस्थागत सुधारों के संयुक्त प्रभाव को दर्शाती है।
नीतिगत सुधारों ने बढ़ाया अंतर्राष्ट्रीय आकर्षण
न्यालम आव्रजन और सीमा निरीक्षण केंद्र के प्रमुख ने कहा, "यह केवल संख्या में वृद्धि नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के बढ़ते खुलेपन का स्पष्ट संकेत भी है।" उन्होंने बताया कि वीजा-मुक्त पारगमन और विदेशियों के प्रवेश कार्ड के ऑनलाइन पंजीकरण जैसी सुविधाजनक नीतियों ने इस बंदरगाह की अंतर्राष्ट्रीय अपील को काफी बढ़ाया है।
अब तक दुनिया के 80 से अधिक देशों और क्षेत्रों के यात्री इस बंदरगाह से होकर गुजर चुके हैं, जो इसे एक वास्तविक बहुराष्ट्रीय व्यापार और पारगमन केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
व्यापक संदर्भ : चीन-नेपाल संबंध और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी
चांगमू बंदरगाह की यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत दक्षिण एशिया में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रहा है। नेपाल के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना बीजिंग की क्षेत्रीय रणनीति का अहम हिस्सा है। इस बंदरगाह की बहाली और बढ़ता यात्री प्रवाह तिब्बत क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गौरतलब है कि 2015 के भूकंप ने न केवल बंदरगाह बल्कि समूचे सीमावर्ती क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गहरा आघात पहुंचाया था। स्थानीय व्यापारियों और सीमावर्ती समुदायों के लिए यह बंदरगाह आजीविका का प्रमुख स्रोत रहा है। 10 लाख यात्रियों का आंकड़ा पार होना इन समुदायों के लिए भी आर्थिक पुनरुद्धार का संकेत है।
आगे चलकर, यदि यात्री वृद्धि की वर्तमान गति बनी रहती है तो वर्ष 2025 में यह संख्या 15 लाख तक पहुंच सकती है। चांगमू बंदरगाह के पूर्ण क्षमता पर संचालित होने से चीन-नेपाल व्यापार को और गति मिलने की उम्मीद है।
(साभार — चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)