चौथा चीन अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला एक्सपो बीजिंग में उद्घाटित, वैश्विक स्थिरता पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
चीन की राजधानी बीजिंग (पेइचिंग) में 22 जून 2026 को चौथे चीन अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला एक्सपो का उद्घाटन हुआ। चीनी उप प्रधानमंत्री तिंग शुएश्यांग ने उद्घाटन समारोह को संबोधित किया और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के विखंडन के बढ़ते जोखिम पर चिंता जताई।
मुख्य घटनाक्रम
उद्घाटन समारोह में दक्षिण अफ्रीका के उप राष्ट्रपति पॉल माशातिले और अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्य चैंबर (ICC) सहित अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने विचार रखे। यह एक्सपो वैश्विक व्यापार और औद्योगिक सहयोग के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है।
तिंग शुएश्यांग का संबोधन
उप प्रधानमंत्री तिंग शुएश्यांग ने कहा कि वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में जटिल बदलाव देखे जा रहे हैं और औद्योगिक तथा आपूर्ति श्रृंखला के विखंडन का खतरा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, औद्योगिक श्रृंखला और मूल्य श्रृंखला आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और प्रत्येक देश इस सहयोग-श्रृंखला की एक अनिवार्य कड़ी है। उनके अनुसार, इस स्थिरता को बनाए रखने के लिए सभी पक्षों के सामूहिक प्रयास अपरिहार्य हैं।
राष्ट्रपति शी चिनफिंग का दृष्टिकोण
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के हवाले से कहा गया कि वैश्विक औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखला का लचीलापन तथा स्थिरता बनाए रखना विश्व की आर्थिक प्रगति के लिए एक अहम गारंटी है, जो सभी देशों के लोगों के साझा हित में है। शी ने कहा कि चीन एक जिम्मेदार बड़े देश के रूप में अपनी पूर्ण औद्योगिक प्रणाली और विशाल बाज़ार की ताकत का उपयोग करते हुए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता और सुचारू संचालन की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाता रहेगा।
वैश्विक संदर्भ और महत्व
यह एक्सपो ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन पर दुनिया भर में बहस छिड़ी हुई है। गौरतलब है कि यह चौथा संस्करण है, जो इस आयोजन की निरंतरता और चीन की वैश्विक आर्थिक कूटनीति में इसके बढ़ते महत्व को दर्शाता है। आलोचकों का कहना है कि इस मंच का उपयोग चीन अपनी आपूर्ति श्रृंखला नेतृत्व की छवि को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने के लिए करता है।
आगे की राह
इस एक्सपो से निकलने वाले सहयोग-समझौते और नीतिगत संकेत वैश्विक व्यापार की दिशा तय करने में सहायक हो सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी का यह स्तर दर्शाता है कि बहुपक्षीय आर्थिक संवाद की माँग अभी भी बनी हुई है।