ड्रोन टैरिफ पर चीन का अमेरिका को कड़ा जवाब, धारा 232 को बताया 'संरक्षणवादी हथियार'
सारांश
मुख्य बातें
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता हे यातोंग ने 21 अगस्त 2026 को बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका की धारा 232 के तहत ड्रोन पर लगाए गए टैरिफ को एकतरफा और संरक्षणवादी कदम करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। साथ ही, उन्होंने यूरोपीय संघ (EU) द्वारा विदेशी सब्सिडी विनियमन (FSR) के ज़रिए चीनी संस्थाओं की सीमा-पार जाँच के विरुद्ध चीन के नए निषेधाज्ञा उपायों का भी बचाव किया।
अमेरिकी धारा 232 पर चीन का रुख
हे यातोंग ने कहा कि अमेरिका द्वारा धारा 232 के तहत लागू किए गए उपाय 'राष्ट्रीय सुरक्षा' की अवधारणा को अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन से अमेरिका को निर्यात होने वाले ड्रोन मुख्यतः कृषि, उपकरण निरीक्षण और फिल्म व मनोरंजन जैसे नागरिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होते हैं।
प्रवक्ता के अनुसार, ये उपाय व्यापारिक साझेदारों पर भेदभावपूर्ण शुल्क दरें थोपते हैं, चीनी उद्यमों के हितों को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं और वैश्विक ड्रोन उत्पादन एवं आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को बाधित करते हैं। उन्होंने कहा कि इससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा वाला बाज़ार वातावरण और कमज़ोर होता है।
EU की FSR जाँच पर चीन की आपत्ति
हे यातोंग ने यूरोपीय संघ द्वारा FSR जैसे एकतरफा उपकरणों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इन उपकरणों का दुरुपयोग चीनी कंपनियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। चीन ने EU से अपील की है कि वह FSR जाँच में अपनी 'गलतियाँ' सुधारे और अंतर-सरकारी संवाद के ज़रिए चीन के साथ मिलकर काम करे।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि चीन EU की आगामी कार्रवाइयों पर कड़ी नज़र रखेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा चीनी उद्यमों के वैध अधिकारों की रक्षा के लिए 'आवश्यक कदम' उठाने से नहीं हिचकेगा।
व्यापक संदर्भ: बढ़ता व्यापार तनाव
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन व्यापार संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। गौरतलब है कि धारा 232 का उपयोग मूलतः इस्पात और एल्युमीनियम पर टैरिफ लगाने के लिए किया गया था; अब इसे ड्रोन क्षेत्र तक विस्तारित करना चीन के लिए एक नई चिंता का विषय है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के उपाय वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को दीर्घकालिक नुकसान पहुँचा सकते हैं।
आगे क्या होगा
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वह इस मामले में बहुपक्षीय मंचों पर अपना पक्ष रखेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दोनों पक्षों के बीच राजनयिक संवाद नहीं बढ़ा तो ड्रोन क्षेत्र में व्यापार प्रतिबंधों का दायरा और व्यापक हो सकता है।