चीनी अनुसंधान संस्थाओं पर अमेरिकी प्रतिबंध सूची: बीजिंग ने जताया कड़ा विरोध, सुधारात्मक कार्रवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को बीजिंग में आयोजित प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय द्वारा कुछ चीनी अनुसंधान संस्थाओं को प्रतिबंध सूची में शामिल किए जाने पर चीन गहरा असंतोष व्यक्त करता है और इसका पुरज़ोर विरोध करता है। यह प्रतिक्रिया उस घटनाक्रम के बाद आई है जिसमें अमेरिका ने अपनी तथाकथित संदिग्ध गतिविधियों वाली संस्थाओं की सूची को अद्यतन किया।
मुख्य घटनाक्रम
23 जुलाई 2026 को अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने विदेशी अनुसंधान संस्थानों की अपनी तथाकथित संदिग्ध गतिविधि सूची — जिसे '1,286 सूची' कहा जाता है — को अपडेट किया और उसमें कई चीनी अनुसंधान संस्थाओं को भी जोड़ा। इस कदम को चीन ने भेदभावपूर्ण और राजनीति से प्रेरित बताया है।
चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया
प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा को लगातार बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है और जानबूझकर भेदभावपूर्ण बाधाएँ खड़ी करके वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग का राजनीतिकरण, हथियारीकरण और यंत्रीकरण कर रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि यह रवैया चीन-अमेरिका वैज्ञानिक एवं तकनीकी आदान-प्रदान को बाधित करता है और वैश्विक नवाचार व सहयोग की सामान्य प्रवृत्ति के विरुद्ध है।
चीन की माँग और अगला कदम
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह चीनी अनुसंधान संस्थाओं पर लगाया गया कलंक तत्काल हटाए और इस गलत कार्रवाई को यथाशीघ्र सुधारे। प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि चीन आवश्यक कदम उठाकर अपनी अनुसंधान संस्थाओं के युक्तियुक्त और वैधिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब चीन और अमेरिका के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा पहले से ही चरम पर है। गौरतलब है कि अमेरिका पहले भी सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में चीनी संस्थाओं पर निर्यात नियंत्रण लगा चुका है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की सूचियाँ वैज्ञानिक सहयोग को वैश्विक स्तर पर नुकसान पहुँचाती हैं, जबकि अमेरिकी अधिकारी इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताते हैं। चीन का यह कदम आने वाले दिनों में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर और दबाव डाल सकता है।