शिनच्यांग विधेयक: अमेरिका ने 40 से अधिक चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए, बीजिंग ने कड़ी निंदा की
सारांश
मुख्य बातें
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने 1 अगस्त 2026 को अमेरिका के उस कदम की कड़ी निंदा की, जिसमें अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने 31 जुलाई को 40 से अधिक चीनी कंपनियों को तथाकथित 'उइगुर जबरन श्रम निवारण अधिनियम' (UFLPA) की प्रतिबंध सूची में शामिल किया। मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि चीन इस एकतरफा कार्रवाई का पुरज़ोर विरोध करता है और प्रभावित कंपनियों के वैध हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
अमेरिकी कार्रवाई का विवरण
31 जुलाई को अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने UFLPA के अंतर्गत 40 से अधिक चीनी कंपनियों को उस सूची में जोड़ा, जिन पर शिनच्यांग क्षेत्र से जुड़े कथित जबरन श्रम के आधार पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इस सूची में शामिल होने के बाद संबंधित कंपनियों के उत्पादों का अमेरिका में आयात प्रभावी रूप से रुक जाता है।
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका 'मानवाधिकारों' और 'जबरन श्रम' की आड़ में घरेलू कानून के आधार पर चीनी कंपनियों पर मनमाने ढंग से एकतरफा प्रतिबंध लगाना जारी रखे हुए है। उनके अनुसार, यह आर्थिक दबाव का एक स्पष्ट उदाहरण है जो पूरी तरह निराधार है।
वार्ता के ठीक बाद उठाया कदम — बीजिंग की आपत्ति
चीनी पक्ष ने विशेष रूप से इस कार्रवाई के समय पर आपत्ति जताई। प्रवक्ता ने बताया कि 30 जुलाई को — यानी प्रतिबंध सूची जारी होने से महज एक दिन पहले — दोनों देशों के प्रमुख आर्थिक वार्ताकारों ने वीडियो कॉल के ज़रिए स्थिर व्यापारिक संबंध बनाए रखने पर खुलकर और रचनात्मक विचार-विमर्श किया था।
बीजिंग का आरोप है कि अमेरिका ने इस वार्ता के तुरंत बाद ऐसे कदम उठाए जो दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई सहमति को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन व्यापार तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर बना हुआ है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इन प्रतिबंधों से न केवल संबंधित कंपनियों के वैध अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, बल्कि वैश्विक औद्योगिक एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। आलोचकों का कहना है कि UFLPA के तहत बढ़ती सूची वैश्विक विनिर्माण नेटवर्क पर व्यापक दबाव डाल रही है।
चीन का रुख और आगे की राह
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि वह प्रभावित कंपनियों के वैध हितों की रक्षा के लिए आवश्यक उपाय करेगा, हालांकि किसी विशेष जवाबी कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया। गौरतलब है कि UFLPA के तहत चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध का यह सिलसिला पिछले कुछ वर्षों से जारी है और यह कदम उस दिशा में एक और बड़ा विस्तार है। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता की भावी दिशा अब इस नवीनतम टकराव के मद्देनज़र अनिश्चित बनी हुई है।