छेन वनछिंग ने मॉस्को में 14वीं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सभा में दिया मुख्य भाषण, 145 देश शामिल
सारांश
मुख्य बातें
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) की केंद्रीय कमेटी के पोलित ब्यूरो के सदस्य और सीपीसी की राजनीतिक एवं कानूनी मामले समिति के सचिव छेन वनछिंग ने 28 मई 2026 को रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित 14वीं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी सभा में भाग लिया और मुख्य भाषण दिया। इस सभा में 145 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे, जो इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी बहुपक्षीय सुरक्षा बैठकों में से एक बनाता है।
वैश्विक सुरक्षा पहल पर चीन का रुख
अपने संबोधन में छेन वनछिंग ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तुत वैश्विक सुरक्षा पहल (Global Security Initiative) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप है और पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक दोनों प्रकार के सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एकजुटता का आह्वान करती है। उन्होंने कहा कि यह पहल दिन-प्रतिदिन वैश्विक सुरक्षा के जटिल प्रश्नों को संबोधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
साझे भविष्य के समुदाय का संकल्प
छेन वनछिंग ने स्पष्ट किया कि चीन विभिन्न देशों के साथ मिलकर वैश्विक सुरक्षा पहल को व्यवहार में लाने और 'मानवता के साझे भविष्य वाले समुदाय' के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि इस सामूहिक प्रयास का अंतिम लक्ष्य चिरस्थायी शांति और सार्वभौमिक सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाना है।
प्रभुत्ववाद के विरोध और एपेक की भूमिका
सभा में उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक शांति की रक्षा के लिए हर प्रकार के प्रभुत्ववाद और बल-आधारित राजनीति का दृढ़ता से विरोध करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस वर्ष चीन एपेक (APEC) के अनौपचारिक शिखर सम्मेलन सहित कई महत्वपूर्ण बहुपक्षीय कार्यक्रमों की मेज़बानी करेगा और उन्होंने विभिन्न पक्षों से समन्वय बढ़ाकर सहयोग और साझी जीत सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
द्विपक्षीय वार्ताएँ और ब्रिक्स बैठक
सभा के दौरान छेन वनछिंग ने ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों के साथ एक दोपहर भोज में भाग लिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने अनेक देशों के प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ताएँ भी कीं, जिससे यह सभा केवल एक बहुपक्षीय मंच नहीं, बल्कि कूटनीतिक संवाद का एक सक्रिय केंद्र भी बनी। यह सभा ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में तनाव और अनिश्चितता दोनों बढ़ रही हैं, और चीन अपनी बहुपक्षीय कूटनीतिक उपस्थिति को व्यापक बनाने की कोशिश में है।