चीन ने NPT सम्मेलन में 'नाभिकीय खतरे' के आरोपों को निराधार बताया, आत्मरक्षा नीति का दिया हवाला

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चीन ने NPT सम्मेलन में 'नाभिकीय खतरे' के आरोपों को निराधार बताया, आत्मरक्षा नीति का दिया हवाला

सारांश

NPT के 11वें समीक्षा सम्मेलन में चीन ने 'नाभिकीय खतरे' के पश्चिमी आरोपों को सीधे नकारते हुए अपनी आत्मरक्षा परमाणु नीति का बचाव किया। काउंसलर श्यू फंग ने कहा कि चीन किसी से परमाणु शस्त्रीकरण स्पर्द्धा नहीं करता — और दोहरे मापदंड अपनाने वाले देशों की आलोचना भी की।

Key Takeaways

  • NPT का 11वाँ समीक्षा सम्मेलन 27 अप्रैल को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उद्घाटित हुआ।
  • चीनी काउंसलर श्यू फंग ने 'चीन से नाभिकीय खतरे' के आरोपों को निराधार और बदनीयती वाला बताया।
  • चीन ने कहा कि वह परमाणु बल को राष्ट्रीय सुरक्षा की न्यूनतम आवश्यकता तक सीमित रखता है।
  • चीन ने परमाणु साझा, परमाणु छाता और विस्तारित निवारण पर दोहरा मापदंड अपनाने वाले देशों की आलोचना की।
  • चीन ने स्पष्ट किया कि वह अतीत में और भविष्य में भी किसी देश के साथ परमाणु शस्त्रीकरण स्पर्द्धा नहीं करेगा।

संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क में 27 अप्रैल को नाभिकीय अप्रसार संधि (NPT) के सदस्य देशों का 11वाँ समीक्षा सम्मेलन उद्घाटित हुआ, जिसमें चीनी प्रतिनिधि ने कुछ देशों द्वारा प्रचारित तथाकथित 'चीन से नाभिकीय खतरे' की धारणा को पूरी तरह खारिज किया। चीन ने स्पष्ट किया कि वह हमेशा से आत्मरक्षा परमाणु रणनीति का पालन करता आया है और ये आरोप बिलकुल निराधार एवं बदनीयती पर आधारित हैं।

सम्मेलन में चीन का पक्ष

संयुक्त राष्ट्र में स्थित स्थायी चीनी प्रतिनिधिमंडल के निरशस्त्रीकरण विभाग के काउंसलर श्यू फंग ने आम बहस में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि चीन हमेशा परमाणु बल को राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता के न्यूनतम स्तर पर कायम रखता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नाभिकीय हथियारों के पैमाने और विकास के मामले में चीन अत्यंत संयम का रवैया अपनाता है।

काउंसलर श्यू फंग ने आगे कहा कि चीन किसी अन्य परमाणु हथियार संपन्न देश से निवेश, मात्रा या पैमाने की तुलना नहीं करता और अतीत में तथा भविष्य में भी किसी देश के साथ परमाणु शस्त्रीकरण स्पर्द्धा नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि कुछ देशों ने इस वास्तविकता की अनदेखी कर जानबूझकर 'चीन से नाभिकीय खतरे' का प्रचार किया है।

दोहरे मापदंड पर चीन की आलोचना

चीनी प्रतिनिधि ने परमाणु साझा, परमाणु छाता और विस्तारित निवारण जैसे मुद्दों पर कुछ देशों द्वारा अपनाए जा रहे दोहरे मापदंड की भी कड़ी आलोचना की। चीन का तर्क है कि इस प्रकार का दोहरा रवैया अंतर्राष्ट्रीय परमाणु निरस्त्रीकरण प्रक्रिया और स्वयं नाभिकीय अप्रसार संधि (NPT) को गंभीर नुकसान पहुँचाता है।

गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है और प्रमुख परमाणु शक्तियों के बीच विश्वास की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

NPT समीक्षा सम्मेलन का महत्त्व

नाभिकीय अप्रसार संधि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने, निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई अंतर्राष्ट्रीय संधि है। इसका 11वाँ समीक्षा सम्मेलन सदस्य देशों को संधि के क्रियान्वयन की समीक्षा करने और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर देता है।

यह ऐसी Nवीं घटना है जब चीन ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी परमाणु नीति का बचाव करते हुए पश्चिमी देशों के आरोपों को सीधे नकारा है। आलोचकों का कहना है कि चीन की परमाणु क्षमताओं में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, हालाँकि चीन इसे अपनी न्यूनतम प्रतिरोध नीति के अनुरूप बताता है।

आगे क्या होगा

NPT के 11वें समीक्षा सम्मेलन में आने वाले दिनों में विभिन्न सदस्य देश अपने-अपने पक्ष रखेंगे और परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में ठोस कदमों पर सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। चीन और पश्चिमी देशों के बीच इस मुद्दे पर जारी तनाव सम्मेलन के नतीजों को प्रभावित कर सकता है।

Point of View

लेकिन इसे केवल आधिकारिक पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए — क्योंकि पश्चिमी रक्षा विश्लेषकों और अमेरिकी पेंटागन की रिपोर्टें चीन के परमाणु शस्त्रागार में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय विस्तार का दावा करती हैं। 'न्यूनतम प्रतिरोध' की भाषा और ज़मीनी हकीकत के बीच की यह खाई ही NPT जैसे मंचों पर विश्वास-निर्माण को कठिन बनाती है। दोहरे मापदंड की चीनी आलोचना वैध सवाल उठाती है, लेकिन इसे तब तक पूरी तरह स्वीकार करना कठिन है जब तक चीन स्वयं अपनी परमाणु क्षमताओं पर पारदर्शिता नहीं दिखाता।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

NPT का 11वाँ समीक्षा सम्मेलन क्या है?
नाभिकीय अप्रसार संधि (NPT) के सदस्य देशों का 11वाँ समीक्षा सम्मेलन 27 अप्रैल को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शुरू हुआ। यह सम्मेलन सदस्य देशों को परमाणु निरस्त्रीकरण और अप्रसार के मुद्दों पर समीक्षा और चर्चा का अवसर देता है।
चीन ने 'नाभिकीय खतरे' के आरोपों को क्यों नकारा?
चीन का कहना है कि वह आत्मरक्षा परमाणु रणनीति का पालन करता है और परमाणु बल को राष्ट्रीय सुरक्षा की न्यूनतम आवश्यकता तक सीमित रखता है। काउंसलर श्यू फंग के अनुसार, 'चीन से नाभिकीय खतरे' का प्रचार बदनीयती पर आधारित और बिलकुल निराधार है।
चीन की परमाणु नीति क्या है?
चीन की आधिकारिक परमाणु नीति 'न्यूनतम प्रतिरोध' पर आधारित है, जिसके तहत वह परमाणु बल को राष्ट्रीय सुरक्षा की न्यूनतम आवश्यकता तक सीमित रखने का दावा करता है। चीन यह भी कहता है कि वह किसी देश के साथ परमाणु शस्त्रीकरण स्पर्द्धा में शामिल नहीं होगा।
परमाणु साझा और विस्तारित निवारण पर चीन की आपत्ति क्यों है?
चीन का तर्क है कि परमाणु साझा, परमाणु छाता और विस्तारित निवारण जैसी व्यवस्थाएँ दोहरे मापदंड को बढ़ावा देती हैं। चीन के अनुसार, ये व्यवस्थाएँ अंतर्राष्ट्रीय परमाणु निरस्त्रीकरण प्रक्रिया और NPT को नुकसान पहुँचाती हैं।
इस सम्मेलन का वैश्विक परमाणु सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
NPT का यह समीक्षा सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब प्रमुख परमाणु शक्तियों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। सम्मेलन के नतीजे परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा और गति को प्रभावित कर सकते हैं, हालाँकि चीन और पश्चिमी देशों के बीच मतभेद सहमति को कठिन बना सकते हैं।
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