चीन की ग्रीन कंप्यूटिंग पावर 2185 EFLOPS पर, 160+ डेटा सेंटरों को मिला हरित दर्जा
सारांश
मुख्य बातें
चीन की बुद्धिमान कंप्यूटिंग क्षमता जून 2026 के अंत तक 2185 EFLOPS तक पहुँच गई है और देशभर में 160 से अधिक डेटा सेंटरों को 4A स्तर या उससे ऊपर का हरित दर्जा प्राप्त हो चुका है। यह जानकारी 22 अगस्त 2026 को भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश की राजधानी होहोट में आयोजित 2026 ग्रीन कंप्यूटिंग पावर सम्मेलन में सामने आई। सम्मेलन में जारी शोध रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि चीन ऊर्जा दक्षता और कंप्यूटिंग विस्तार को एक साथ साधने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
सम्मेलन और रिपोर्ट का विवरण
चीनी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी अकादमी के उपाध्यक्ष आओ ली ने उद्घाटन समारोह में 'ग्रीन कंप्यूटिंग पावर के विकास पर शोध रिपोर्ट 2026' जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, कंप्यूटिंग उपकरणों की ऊर्जा दक्षता में निरंतर सुधार हो रहा है और बुनियादी ढाँचे का हरित रूपांतरण तेज़ गति से जारी है।
तकनीकी प्रगति के प्रमुख आँकड़े
2025 के अंत तक देशभर में संचालित मानक रैक की संख्या 1.373 करोड़ से अधिक हो गई थी। इसके साथ ही, 10 हज़ार GPU स्तर के 42 बुद्धिमान कंप्यूटिंग क्लस्टर तैयार किए जा चुके थे। देश के आठ प्रमुख राष्ट्रीय हब नोड्स में मौजूद बुद्धिमान कंप्यूटिंग क्षमता कुल क्षमता के 80 प्रतिशत से अधिक है — जो केंद्रीकृत और योजनाबद्ध विस्तार की रणनीति को दर्शाता है।
नई तकनीकें बनी आधार
लिक्विड कूलिंग, हाई-स्पीड ऑप्टिकल इंटरकनेक्ट और नई स्टोरेज आर्किटेक्चर जैसी अत्याधुनिक तकनीकें अब उच्च घनत्व वाले बुद्धिमान कंप्यूटिंग केंद्रों के निर्माण का आधार बन चुकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन तकनीकों से कंप्यूटिंग क्षमता के पैमाने, प्रदर्शन और ऊर्जा दक्षता में एक साथ सुधार हो रहा है।
हरित और कम कार्बन विकास की दिशा
कंप्यूटिंग और बिजली के बीच बेहतर तालमेल, वैश्विक स्तर पर कंप्यूटिंग क्षमता का विस्तार और नए व्यावसायिक मॉडल — ये तीनों आयाम चीन की ग्रीन कंप्यूटिंग रणनीति के नए विकास क्षेत्र बनकर उभर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर AI और डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
आगे की दिशा
रिपोर्ट के आँकड़े संकेत देते हैं कि चीन कंप्यूटिंग नेटवर्क के वैश्विक विस्तार और हरित परिवर्तन को एक साझी नीति के तहत आगे बढ़ा रहा है। आने वाले वर्षों में नए व्यावसायिक मॉडल और ऊर्जा-कुशल बुनियादी ढाँचे इस रणनीति के केंद्र में रहेंगे।