15 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

IMF का अनुमान: चीन की आर्थिक वृद्धि से एशिया-प्रशांत की GDP ग्रोथ 4.8% तक पहुँची

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
IMF का अनुमान: चीन की आर्थिक वृद्धि से एशिया-प्रशांत की GDP ग्रोथ 4.8% तक पहुँची

सारांश

IMF के एशिया-प्रशांत निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने बैंकॉक में स्पष्ट किया — चीन की GDP वृद्धि में 1% की बढ़त से पूरे क्षेत्र पर 0.3% का असर पड़ता है। ऊर्जा संकट का अनुकूलन, AI विस्तार और व्यापार लचीलापन — इन तीन कारकों ने एशिया-प्रशांत की ग्रोथ का अनुमान 4.4% से बढ़ाकर 4.8% तक पहुँचाया।

मुख्य बातें

IMF ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 4.4% से बढ़ाकर 4.8% किया।
कृष्णा श्रीनिवासन ने बैंकॉक में वार्षिक शरदकालीन सम्मेलन के दौरान यह जानकारी साझा की।
ऊर्जा संकट से उबरना, AI का तेज़ विस्तार और वैश्विक व्यापार का लचीलापन — तीन मुख्य कारक।
चीन एशिया-प्रशांत GDP में आधे से अधिक और वैश्विक वृद्धि में एक-तिहाई का योगदान देता है।
चीन की वृद्धि में 1% की बढ़त से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर लगभग 0.3% का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एशिया-प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने कहा है कि चीन की अर्थव्यवस्था का प्रभाव न केवल एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। 12 से 18 अक्टूबर 2026 के बीच बैंकॉक, थाईलैंड में आयोजित IMF और विश्व बैंक समूह के वार्षिक शरदकालीन सम्मेलन के दौरान उन्होंने यह विचार साझा किए। इस सम्मेलन के मौके पर दिए एक साक्षात्कार में श्रीनिवासन ने स्पष्ट किया कि IMF ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 4.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया है।

तीन प्रमुख कारक जिन्होंने बदला अनुमान

श्रीनिवासन के अनुसार, इस संशोधित अनुमान के पीछे तीन मुख्य कारक हैं। पहला, ऊर्जा संकट का असर — जिसने पहले कई अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुँचाया था, लेकिन समय के साथ देशों ने उन चुनौतियों के अनुरूप खुद को ढाल लिया। दूसरा कारक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का तेज़ी से विस्तार है, जिसका विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर अलग-अलग, किंतु सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

तीसरा और महत्वपूर्ण कारक वैश्विक व्यापार है। श्रीनिवासन ने कहा कि पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि टैरिफ और अन्य भू-राजनीतिक कारणों से वैश्विक व्यापार पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा, लेकिन वास्तव में व्यापार ने अपेक्षा से अधिक लचीलापन दिखाया है।

चीन की भूमिका: एशिया की GDP में आधे से अधिक हिस्सेदारी

श्रीनिवासन ने रेखांकित किया कि चीन एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इस क्षेत्र के कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में उसकी हिस्सेदारी आधे से अधिक है। इतना ही नहीं, वैश्विक आर्थिक वृद्धि में चीन का योगदान लगभग एक-तिहाई है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था व्यापार अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच सँभलने की कोशिश कर रही है।

चीन की 1% वृद्धि का क्षेत्रीय असर

IMF के पूर्व के अध्ययनों का हवाला देते हुए श्रीनिवासन ने बताया कि चीन की आर्थिक वृद्धि दर में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने पर एशिया-प्रशांत की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर पर लगभग 0.3 प्रतिशत का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस आँकड़े के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एशिया की आर्थिक चर्चा चीन के बिना अधूरी है। गौरतलब है कि IMF के ये नवीनतम पूर्वानुमान ऐसे दौर में आए हैं जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार संबंधों में तनाव और AI-आधारित उत्पादकता वृद्धि एक साथ वैश्विक विकास के नए समीकरण बना रहे हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

श्रीनिवासन का यह बयान IMF की उस व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है कि एशिया-प्रशांत की समृद्धि और स्थिरता चीन की आर्थिक गति से अटूट रूप से जुड़ी है। IMF के आँकड़ों के अनुसार, क्षेत्र की संशोधित 4.8 प्रतिशत वृद्धि दर वैश्विक औसत से ऊपर बनी हुई है, जो एशिया-प्रशांत को दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ता प्रमुख आर्थिक क्षेत्र बनाए रखती है। आगे आने वाले महीनों में IMF की पूर्ण विश्व आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट इन अनुमानों पर और विस्तृत रोशनी डालेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक महत्वपूर्ण विरोधाभास छुपा है — चीन पर यह निर्भरता उसी समय उजागर हो रही है जब अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और आपूर्ति श्रृंखला विखंडन की चर्चा तेज़ है। यदि चीन की घरेलू खपत या निर्यात में कोई बड़ा व्यवधान आता है, तो 0.3% के स्पिलओवर प्रभाव का सिक्का दूसरी तरफ भी पलट सकता है। AI की उत्पादकता वृद्धि को ग्रोथ का कारण बताना भी समयपूर्व हो सकता है — इसके लाभ अभी तक असमान रूप से वितरित हैं और श्रम बाज़ार पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन बाकी है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि 4.8% का यह आँकड़ा भी उस स्तर से कम है जो एशिया-प्रशांत को दशक पहले हासिल था — इसे वृद्धि की वापसी कहना सही है, पुराने शिखर पर लौटना नहीं।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IMF ने एशिया-प्रशांत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान क्यों बढ़ाया?
IMF ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वृद्धि दर का अनुमान 4.4% से बढ़ाकर 4.8% किया है। इसके पीछे तीन कारण हैं — ऊर्जा संकट से देशों का अनुकूलन, AI का तेज़ विस्तार और वैश्विक व्यापार का अपेक्षा से अधिक लचीलापन।
चीन की अर्थव्यवस्था का एशिया-प्रशांत पर कितना असर पड़ता है?
IMF के अनुसार, चीन एशिया-प्रशांत की कुल GDP में आधे से अधिक हिस्सेदारी रखता है। IMF के पूर्व अध्ययनों के मुताबिक चीन की वृद्धि दर में 1% की बढ़त से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर लगभग 0.3% का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
बैंकॉक में IMF-विश्व बैंक सम्मेलन 2026 कब हुआ?
IMF और विश्व बैंक समूह का 2026 का वार्षिक शरदकालीन सम्मेलन 12 से 18 अक्टूबर 2026 के बीच थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित हुआ।
कृष्णा श्रीनिवासन कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
कृष्णा श्रीनिवासन IMF के एशिया-प्रशांत विभाग के निदेशक हैं। उन्होंने बैंकॉक सम्मेलन के दौरान कहा कि एशिया की आर्थिक चर्चा चीन के बिना अधूरी है, क्योंकि वैश्विक वृद्धि में उसका योगदान करीब एक-तिहाई है।
वैश्विक व्यापार में टैरिफ का असर एशिया-प्रशांत पर क्यों नहीं पड़ा?
IMF निदेशक श्रीनिवासन के अनुसार, पहले आशंका थी कि टैरिफ और भू-राजनीतिक कारणों से व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा, लेकिन वास्तव में वैश्विक व्यापार ने अपेक्षा से अधिक लचीलापन दिखाया। इसी लचीलेपन को IMF ने अपने संशोधित अनुमान का एक प्रमुख आधार माना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 12 घंटे पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले