IMF का अनुमान: चीन की आर्थिक वृद्धि से एशिया-प्रशांत की GDP ग्रोथ 4.8% तक पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एशिया-प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने कहा है कि चीन की अर्थव्यवस्था का प्रभाव न केवल एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। 12 से 18 अक्टूबर 2026 के बीच बैंकॉक, थाईलैंड में आयोजित IMF और विश्व बैंक समूह के वार्षिक शरदकालीन सम्मेलन के दौरान उन्होंने यह विचार साझा किए। इस सम्मेलन के मौके पर दिए एक साक्षात्कार में श्रीनिवासन ने स्पष्ट किया कि IMF ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 4.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया है।
तीन प्रमुख कारक जिन्होंने बदला अनुमान
श्रीनिवासन के अनुसार, इस संशोधित अनुमान के पीछे तीन मुख्य कारक हैं। पहला, ऊर्जा संकट का असर — जिसने पहले कई अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुँचाया था, लेकिन समय के साथ देशों ने उन चुनौतियों के अनुरूप खुद को ढाल लिया। दूसरा कारक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का तेज़ी से विस्तार है, जिसका विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर अलग-अलग, किंतु सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
तीसरा और महत्वपूर्ण कारक वैश्विक व्यापार है। श्रीनिवासन ने कहा कि पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि टैरिफ और अन्य भू-राजनीतिक कारणों से वैश्विक व्यापार पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा, लेकिन वास्तव में व्यापार ने अपेक्षा से अधिक लचीलापन दिखाया है।
चीन की भूमिका: एशिया की GDP में आधे से अधिक हिस्सेदारी
श्रीनिवासन ने रेखांकित किया कि चीन एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इस क्षेत्र के कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में उसकी हिस्सेदारी आधे से अधिक है। इतना ही नहीं, वैश्विक आर्थिक वृद्धि में चीन का योगदान लगभग एक-तिहाई है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था व्यापार अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच सँभलने की कोशिश कर रही है।
चीन की 1% वृद्धि का क्षेत्रीय असर
IMF के पूर्व के अध्ययनों का हवाला देते हुए श्रीनिवासन ने बताया कि चीन की आर्थिक वृद्धि दर में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने पर एशिया-प्रशांत की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर पर लगभग 0.3 प्रतिशत का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस आँकड़े के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एशिया की आर्थिक चर्चा चीन के बिना अधूरी है। गौरतलब है कि IMF के ये नवीनतम पूर्वानुमान ऐसे दौर में आए हैं जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार संबंधों में तनाव और AI-आधारित उत्पादकता वृद्धि एक साथ वैश्विक विकास के नए समीकरण बना रहे हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
श्रीनिवासन का यह बयान IMF की उस व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है कि एशिया-प्रशांत की समृद्धि और स्थिरता चीन की आर्थिक गति से अटूट रूप से जुड़ी है। IMF के आँकड़ों के अनुसार, क्षेत्र की संशोधित 4.8 प्रतिशत वृद्धि दर वैश्विक औसत से ऊपर बनी हुई है, जो एशिया-प्रशांत को दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ता प्रमुख आर्थिक क्षेत्र बनाए रखती है। आगे आने वाले महीनों में IMF की पूर्ण विश्व आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट इन अनुमानों पर और विस्तृत रोशनी डालेगी।