भारत की आर्थिक प्रगति जश्न के योग्य: अर्थशास्त्री क्युंघून किम, IMF ADB का 7% से ऊपर विकास अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
शीर्ष अर्थशास्त्री क्युंघून किम ने 18 अक्टूबर 2026 को कहा कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक प्रगति वास्तव में सराहना और उत्सव की हकदार है। उन्होंने कहा कि देश की निरंतर मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर होती वित्तीय स्थिति आने वाले वर्षों के लिए पर्याप्त आशावाद का आधार प्रदान करती है।
एक्स पर पोस्ट में क्या कहा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई एक पोस्ट में किम ने स्वीकार किया कि भारत के सामने अभी भी अनेक चुनौतियाँ विद्यमान हैं। बावजूद इसके, उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक रूप से तीव्र गति से आगे बढ़ने की क्षमता और मध्यम अवधि की सकारात्मक विकास संभावनाएँ बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं।
किम ने अपनी पोस्ट में कहा, "मेरा निष्कर्ष वही है। भारत के सामने कई चुनौतियाँ हैं, लेकिन विशेष रूप से पिछले दशक में उसकी आर्थिक प्रगति और मध्यम अवधि में सकारात्मक विकास संभावनाएँ जश्न मनाने योग्य हैं। 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए यह प्रगति बेहद महत्वपूर्ण है।"
वैश्विक संस्थानों ने बढ़ाए विकास अनुमान
किम की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उन्होंने एक दिन पूर्व भारत की मजबूत विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), एशियाई विकास बैंक (ADB) और विश्व बैंक सहित लगभग सभी प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थानों ने चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत से अधिक कर दिया है। यह किसी प्रमुख अर्थव्यवस्था के लिए असाधारण उपलब्धि मानी जाती है।
कोविड के बाद असाधारण आर्थिक पुनरुत्थान
अर्थशास्त्री के अनुसार, कोविड 19 महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व मजबूती का प्रदर्शन किया है। महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी, किंतु इसके पश्चात 2021 में 9.7 प्रतिशत की दमदार वृद्धि हुई और अगले चार वर्षों तक विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रही।
किम ने कहा कि उन्हें सहित अनेक अर्थशास्त्रियों को प्रत्येक तिमाही में अपनी जीडीपी वृद्धि संबंधी भविष्यवाणियों में ऊपर की ओर संशोधन करना पड़ा, क्योंकि वास्तविक आँकड़े बार बार अपेक्षाओं से बेहतर रहे।
2003 07 के स्वर्णिम दौर के बराबर प्रदर्शन
किम के अनुसार, भारत ने लगातार पाँच वर्षों तक 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर दर्ज की है। यह उपलब्धि 2003 से 2007 के उस दौर के समकक्ष है, जब भारत पहली बार विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ था।
उन्होंने बताया कि 2021 से 2025 के दौरान 7.83 प्रतिशत की औसत वार्षिक विकास दर 1960 के बाद किसी भी पाँच वर्षीय अवधि की दूसरी सर्वोच्च औसत वृद्धि दर है। इससे अधिक केवल 2003 से 2007 के दौरान 7.89 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर रही थी।
$1 ट्रिलियन से $4 ट्रिलियन तक का सफर
भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ते आकार का उल्लेख करते हुए किम ने कहा कि 2007 में भारत की अर्थव्यवस्था $1 ट्रिलियन से थोड़ा अधिक थी, जबकि अब यह $4 ट्रिलियन के करीब पहुँच रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस विस्तारित आधार पर समान विकास दर का अर्थ कहीं अधिक बड़े पैमाने पर आर्थिक विस्तार और मूल्य सृजन से है — यानी आज के भारत की हर एक प्रतिशत वृद्धि दो दशक पहले की तुलना में चार गुना अधिक असर डालती है।
गौरतलब है कि यह मूल्यांकन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है और कई उभरती अर्थव्यवस्थाएँ धीमी वृद्धि से जूझ रही हैं। भारत की यह गति आगे भी बरकरार रहती है या नहीं, यह आने वाले वर्षों की नीतियों पर निर्भर करेगा।