21 जुलाई 2026
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चीन-लाओस रेलवे ने बदला लाओस का स्वरूप, राष्ट्रपति थोंग्लौन बोले — 'स्वर्णिम रेलवे' बनी जनता का सपना

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चीन-लाओस रेलवे ने बदला लाओस का स्वरूप, राष्ट्रपति थोंग्लौन बोले — 'स्वर्णिम रेलवे' बनी जनता का सपना

सारांश

लाओस के राष्ट्रपति थोंग्लौन सिसोउलिथ ने हांगचो में कहा कि चीन-लाओस रेलवे ने एक भूमि-बद्ध देश को समुद्री व्यापार मार्गों से जोड़ दिया और लाओ जनता के दशकों पुराने सपने को साकार किया। 3 दिसंबर 2021 को उद्घाटित यह तीव्र गति रेलवे BRI की प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जाती है।

मुख्य बातें

लाओस के राष्ट्रपति थोंग्लौन सिसोउलिथ ने 5 जून 2026 को हांगचो में चीन-लाओस रेलवे को लाओस के विकास का ऐतिहासिक आधार बताया।
चीन-लाओस रेलवे का उद्घाटन 3 दिसंबर 2021 को हुआ था; यह चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की प्रमुख परियोजना है।
थोंग्लौन ने इसे लाओ जनता की 'स्वर्णिम रेलवे' करार दिया — पहले लाओस के पास कोई रेलवे नहीं थी।
यह रेलवे भूमि-बद्ध लाओस को समुद्री व्यापार मार्गों से जोड़ती है, जो आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव है।
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने उद्घाटन पर कहा था — 'अब पहाड़ इतने ऊंचे नहीं रहे और रास्ते इतने लंबे नहीं रहे।'

लाओस के राष्ट्रपति थोंग्लौन सिसोउलिथ ने 5 जून 2026 को पूर्वी चीन के चच्यांग प्रांत की राजधानी हांगचो में एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि चीन-लाओस रेलवे ने लाओस के राष्ट्रीय विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है और देश का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। लाओस की जन क्रांतिकारी पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव एवं राष्ट्रपति के रूप में थोंग्लौन ने इस रेलवे को लाओ जनता के सपनों की 'स्वर्णिम रेलवे' करार दिया।

उद्घाटन की याद और शी चिनफिंग का संदेश

राष्ट्रपति थोंग्लौन ने 3 दिसंबर 2021 को आयोजित चीन-लाओस रेलवे के उद्घाटन समारोह को याद करते हुए कहा कि उस अवसर पर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा था, 'अब पहाड़ इतने ऊंचे नहीं रहे और रास्ते इतने लंबे नहीं रहे।' थोंग्लौन के अनुसार, यह वाक्य लाओस की भौगोलिक चुनौतियों पर रेलवे की विजय का प्रतीक है।

भूमि-बद्ध देश से समुद्र तक पहुँच

थोंग्लौन ने रेखांकित किया कि लाओस एक भूमि-बद्ध देश है, जिसकी समुद्र तक सीधी पहुँच नहीं थी। चीन-लाओस रेलवे के निर्माण के बाद अब लाओस के पास एक ऐसा रेल मार्ग है जो उसे समुद्री व्यापार मार्गों से जोड़ता है। यह बदलाव लाओस की आर्थिक संभावनाओं के लिए दूरगामी महत्व रखता है।

पहले कोई रेलवे नहीं, अब आधुनिक तीव्र गति नेटवर्क

राष्ट्रपति ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व तक लाओस के पास कोई रेलवे नेटवर्क नहीं था। आज चीन-लाओस रेलवे एक तीव्र गति वाली आधुनिक रेलवे के रूप में कार्यरत है, जिसने लाओ नागरिकों में राष्ट्रीय गर्व की भावना को नई ऊंचाई दी है। गौरतलब है कि यह रेलवे चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत निर्मित प्रमुख परियोजनाओं में से एक है।

क्षेत्रीय संपर्क और विकास पर असर

यह रेलवे लाओस को चीन के युन्नान प्रांत से जोड़ती है और दक्षिण-पूर्व एशिया के व्यापक रेल नेटवर्क का हिस्सा बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना ने लाओस में पर्यटन, माल-ढुलाई और क्षेत्रीय व्यापार को नई गति दी है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश चीन-नेतृत्व वाली बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों का मूल्यांकन कर रहे हैं।

आगे की राह

थोंग्लौन का यह बयान हांगचो में उनकी यात्रा के दौरान आया, जो चीन और लाओस के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों का संकेत देता है। आने वाले वर्षों में इस रेलवे के विस्तार और क्षेत्रीय नेटवर्क से जुड़ाव पर दोनों देशों की नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसके कूटनीतिक संदर्भ को रेखांकित करता है — यह केवल विकास की कहानी नहीं, बल्कि BRI की सॉफ्ट पावर कूटनीति का हिस्सा भी है। आलोचकों का कहना है कि लाओस पर इस परियोजना के कारण चीन का कर्ज़ बोझ बढ़ा है और देश की ऊर्जा ग्रिड का एक बड़ा हिस्सा पहले ही चीनी नियंत्रण में जा चुका है। असली सवाल यह है कि क्या यह रेलवे लाओस की अर्थव्यवस्था को स्वायत्त रूप से मजबूत कर रही है, या यह एक रणनीतिक निर्भरता का नया रूप है — जिसका जवाब आने वाले वर्षों के व्यापार और कर्ज़ आँकड़े देंगे।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन-लाओस रेलवे क्या है और इसका उद्घाटन कब हुआ?
चीन-लाओस रेलवे एक तीव्र गति वाली आधुनिक रेल परियोजना है जो चीन के युन्नान प्रांत को लाओस की राजधानी वियनतियाने से जोड़ती है। इसका उद्घाटन 3 दिसंबर 2021 को हुआ था और यह चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है।
राष्ट्रपति थोंग्लौन ने इस रेलवे के बारे में क्या कहा?
राष्ट्रपति थोंग्लौन सिसोउलिथ ने 5 जून 2026 को हांगचो में दिए साक्षात्कार में कहा कि चीन-लाओस रेलवे लाओ जनता की 'स्वर्णिम रेलवे' बन गई है। उन्होंने कहा कि इसने लाओस का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है और देश को समुद्री व्यापार मार्गों से जोड़ दिया है।
इस रेलवे से लाओस को क्या फायदा हुआ है?
भूमि-बद्ध लाओस को इस रेलवे के ज़रिए पहली बार समुद्र तक पहुँचने वाला रेल मार्ग मिला है। इससे पर्यटन, माल-ढुलाई और क्षेत्रीय व्यापार को नई गति मिली है और लाओ नागरिकों में राष्ट्रीय गर्व की भावना बढ़ी है।
शी चिनफिंग ने रेलवे उद्घाटन पर क्या कहा था?
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 3 दिसंबर 2021 के उद्घाटन समारोह में कहा था कि 'अब पहाड़ इतने ऊंचे नहीं रहे और रास्ते इतने लंबे नहीं रहे।' राष्ट्रपति थोंग्लौन ने इस वाक्य को लाओस की भौगोलिक बाधाओं पर विजय का प्रतीक बताया।
क्या चीन-लाओस रेलवे BRI का हिस्सा है?
हाँ, यह रेलवे चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत निर्मित प्रमुख परियोजनाओं में से एक है। यह दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन के क्षेत्रीय संपर्क नेटवर्क का अहम हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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