चीन-लाओस रेलवे ने बदला लाओस का स्वरूप, राष्ट्रपति थोंग्लौन बोले — 'स्वर्णिम रेलवे' बनी जनता का सपना
सारांश
मुख्य बातें
लाओस के राष्ट्रपति थोंग्लौन सिसोउलिथ ने 5 जून 2026 को पूर्वी चीन के चच्यांग प्रांत की राजधानी हांगचो में एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि चीन-लाओस रेलवे ने लाओस के राष्ट्रीय विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है और देश का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। लाओस की जन क्रांतिकारी पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव एवं राष्ट्रपति के रूप में थोंग्लौन ने इस रेलवे को लाओ जनता के सपनों की 'स्वर्णिम रेलवे' करार दिया।
उद्घाटन की याद और शी चिनफिंग का संदेश
राष्ट्रपति थोंग्लौन ने 3 दिसंबर 2021 को आयोजित चीन-लाओस रेलवे के उद्घाटन समारोह को याद करते हुए कहा कि उस अवसर पर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा था, 'अब पहाड़ इतने ऊंचे नहीं रहे और रास्ते इतने लंबे नहीं रहे।' थोंग्लौन के अनुसार, यह वाक्य लाओस की भौगोलिक चुनौतियों पर रेलवे की विजय का प्रतीक है।
भूमि-बद्ध देश से समुद्र तक पहुँच
थोंग्लौन ने रेखांकित किया कि लाओस एक भूमि-बद्ध देश है, जिसकी समुद्र तक सीधी पहुँच नहीं थी। चीन-लाओस रेलवे के निर्माण के बाद अब लाओस के पास एक ऐसा रेल मार्ग है जो उसे समुद्री व्यापार मार्गों से जोड़ता है। यह बदलाव लाओस की आर्थिक संभावनाओं के लिए दूरगामी महत्व रखता है।
पहले कोई रेलवे नहीं, अब आधुनिक तीव्र गति नेटवर्क
राष्ट्रपति ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व तक लाओस के पास कोई रेलवे नेटवर्क नहीं था। आज चीन-लाओस रेलवे एक तीव्र गति वाली आधुनिक रेलवे के रूप में कार्यरत है, जिसने लाओ नागरिकों में राष्ट्रीय गर्व की भावना को नई ऊंचाई दी है। गौरतलब है कि यह रेलवे चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत निर्मित प्रमुख परियोजनाओं में से एक है।
क्षेत्रीय संपर्क और विकास पर असर
यह रेलवे लाओस को चीन के युन्नान प्रांत से जोड़ती है और दक्षिण-पूर्व एशिया के व्यापक रेल नेटवर्क का हिस्सा बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना ने लाओस में पर्यटन, माल-ढुलाई और क्षेत्रीय व्यापार को नई गति दी है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश चीन-नेतृत्व वाली बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों का मूल्यांकन कर रहे हैं।
आगे की राह
थोंग्लौन का यह बयान हांगचो में उनकी यात्रा के दौरान आया, जो चीन और लाओस के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों का संकेत देता है। आने वाले वर्षों में इस रेलवे के विस्तार और क्षेत्रीय नेटवर्क से जुड़ाव पर दोनों देशों की नज़र रहेगी।