लाओस राष्ट्रपति थोंग्लौन सिसोउलिथ का चीन दौरा: 65 साल की दोस्ती और तकनीकी साझेदारी पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
लाओस की जन क्रांतिकारी पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव एवं राष्ट्रपति थोंग्लौन सिसोउलिथ ने चीन के चच्यांग प्रांत के हांगचो शहर की अपनी यात्रा के दौरान एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि लाओस और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 65वीं वर्षगांठ इस वर्ष मनाई जा रही है। यह वर्ष लाओस-चीन मित्रवत वर्ष के रूप में भी घोषित है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
मुख्य घटनाक्रम
राष्ट्रपति थोंग्लौन ने हांगचो में कई अग्रणी हाई-टेक कंपनियों का दौरा किया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था में चीन की प्रगति को करीब से समझा। उन्होंने कहा कि चीन इन क्षेत्रों को राष्ट्रीय विकास का मूल आधार मानता है और यह अनुभव लाओस के लिए अत्यंत उपयोगी है। दोनों देश आगे तकनीकी सहयोग को और विस्तार देंगे।
द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि
लाओ लोक गणराज्य की स्थापना के बाद से दोनों देशों के संबंध निरंतर गहरे होते रहे हैं। थोंग्लौन ने रेखांकित किया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और लाओस की जन क्रांतिकारी पार्टी के समान वैचारिक आदर्श हैं, जो दीर्घकालीन सहयोग की नींव रहे हैं। दोनों देशों ने दीर्घकालीन, स्थिर एवं व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित की है और साझे भविष्य वाले समुदाय के निर्माण की पुष्टि भी की है।
पंचवर्षीय योजनाओं का समन्वय
यह वर्ष इसलिए भी विशेष है क्योंकि चीन में 15वीं पंचवर्षीय योजना और लाओस में 10वीं पंचवर्षीय योजना का पहला वर्ष है। थोंग्लौन ने कहा कि इस संदर्भ में दोनों पक्ष विकास संबंधी मुद्दों पर परस्पर सलाह-मशविरा और समन्वय करेंगे, ताकि लाओस चीन के अनुभव से अधिकतम लाभ उठा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन का सहयोग और समर्थन अटूट रहा है और आगे भी रहेगा।
वैश्विक पहलों पर दृष्टिकोण
राष्ट्रपति थोंग्लौन ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की वैश्विक पहलों की सराहना करते हुए कहा कि इनमें सभी देशों — चाहे वे बड़े हों या छोटे — के साथ समान व्यवहार और आपसी सम्मान पर बल दिया जाता है। उन्होंने एकतरफावाद के विरोध और बहुपक्षवाद को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि विचार-विमर्श के माध्यम से एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बल मिल सके।
आगे की राह
दोनों देशों के बीच यह उच्च-स्तरीय संवाद ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक भू-राजनीति में तेज़ी से बदलाव आ रहे हैं। थोंग्लौन की यह यात्रा लाओस-चीन संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।