चीन की ताइवान की चिप तकनीक पर नजर, अंतरराष्ट्रीय कंटेनमेंट तोड़ने की कोशिश
सारांश
Key Takeaways
- चीन ताइवान की एडवांस्ड चिप तकनीक पर नजर रखे हुए है।
- चीन, ताइवान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कंटेनमेंट को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
- ताइवान की सरकार ने बीजिंग के संप्रभुता के दावों को ठुकराया है।
- चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा में आत्मनिर्भरता की कोशिश कर रहा है।
- ताइवान की प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए चीन अप्रत्यक्ष चैनलों का उपयोग कर रहा है।
ताइपे, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। चीन की दृष्टि ताइवान की उन्नत चिप निर्माण तकनीक पर है। एक ताइवानी सुरक्षा एजेंसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन, ताइवान को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके खिलाफ लगाए गए कंटेनमेंट को कमजोर करना चाहता है। इसके साथ ही, वह ताइवान की एडवांस्ड सेमीकंडक्टर तकनीक और कुशल मानव संसाधनों को अपने अधीन करने की कोशिश कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कंटेनमेंट एक भू-राजनीतिक रणनीति है, जिसका लक्ष्य आक्रामक देशों के विस्तार को सीमित करना और उनके प्रभाव को नियंत्रित करना है। चीन और अमेरिका के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा जारी है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे को पछाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में, चीन एडवांस्ड सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भर बनने का प्रयास कर रहा है।
रिपोर्ट में नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो ने कहा है कि चीन ताइवान की हाई-टेक उद्योग को अपने पक्ष में लाने के लिए प्रयासरत है। इसमें एआई और सेमीकंडक्टर तकनीक शामिल हैं।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, "चीन ताइवान के प्रतिभाओं को अपनी ओर आकर्षित करने, तकनीक चुराने और नियंत्रित सामान खरीदने के लिए अप्रत्यक्ष चैनलों का उपयोग कर रहा है। इसका उद्देश्य ताइवान की एडवांस्ड-प्रोसेस चिप्स जैसी महत्वपूर्ण तकनीक और उत्पाद हासिल करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय तकनीकी नियंत्रण टूट सके।"
चीन हमेशा से ताइवान को अपना हिस्सा मानता आया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कई बार कहा है कि ताइवान को चीन में शामिल होने से कोई नहीं रोक सकता। ताइवान से अक्सर ऐसी खबरें आती हैं कि चीनी कंपनियों का नेटवर्क गैर-कानूनी तरीके से सेमीकंडक्टर और हाई-टेक प्रतिभाओं को अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रहा है। ताइवान की अत्याधुनिक तकनीक को चीन में ले जाने से रोकने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को आर्थिक कमजोरी और जियो-पॉलिटिकल प्रतिस्पर्धा जैसे भीतर के और बाहरी दबावों के चलते बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी, चीन ताइवान के खिलाफ सैन्य धमकियों सहित कई प्रकार की हाइब्रिड धमकियों का प्रयोग जारी रखे हुए है।
ताइवान की सरकार ने बीजिंग के संप्रभुता के दावों को ठुकराते हुए कहा है कि केवल द्वीप के लोग ही अपने भविष्य का निर्धारण कर सकते हैं।