डीआरसी: किवु झील में नाव पलटी, 12 लोगों की मौत; 80 से अधिक सवार थे
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) के साउथ किवु प्रांत में किवु झील पर एक नाव के पलटने से कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई है और बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। यह दुर्घटना शनिवार रात और रविवार सुबह के बीच हुई, जब नाव प्रांतीय राजधानी बुकावु से रवाना होने के बाद यात्रा के दौरान पलट गई। खोज और बचाव अभियान अभी भी जारी है।
दुर्घटना का विवरण
स्थानीय मीडिया की प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, नाव पर 80 से अधिक लोग सवार हो सकते थे। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक जब नाव मापेरा गाँव के निकट पलटी, उस समय उसमें लगभग 100 लोग और भारी सामान लदा हुआ था। रविवार सुबह तक बचाव दलों ने 12 शव बरामद किए और 5 लोगों को जीवित बचाने में सफलता पाई। दुर्घटना का ठीक कारण अभी तक अधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है।
दो दिनों में दूसरी बड़ी नाव दुर्घटना
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब महज 2 दिन पहले — 24 सितंबर को — टंगानिका झील में एक अन्य नाव पलटने से 41 लोगों की जान चली गई थी और 49 लोगों को सकुशल बचाया गया था। इसके अतिरिक्त, 28 अगस्त को किगोमा बंदरगाह पर ईंधन भरते समय कांगो के जहाज 'एमवी पैसिफिक' में आग लगने के बाद हुए विस्फोट में चालक दल के 6 सदस्यों की मौत हो गई थी और एक सातवाँ सदस्य लापता बताया गया था। यह जहाज किगोमा और कालेमी के बीच ईंधन परिवहन के लिए उपयोग में लाया जाता था। रेडियो ओकापी ने बंदरगाह अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी थी। इस प्रकार किगोमा-कालेमी रूट पर एक महीने से भी कम समय में यह दूसरी जलपोत दुर्घटना है।
बार-बार दुर्घटनाओं के कारण
डीआरसी में नदियों और झीलों का विस्तृत जाल होने के कारण, देश की बड़ी आबादी के लिए नाव ही परिवहन का सबसे सुलभ और किफायती साधन है। हालाँकि, पुरानी और जर्जर नावों का उपयोग तथा क्षमता से कहीं अधिक यात्रियों को बिठाना ऐसी दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नाव परिवहन पर नियामक निगरानी का अभाव इन हादसों की पुनरावृत्ति को रोकने में सबसे बड़ी बाधा है।
डीआरसी की व्यापक मानवीय स्थिति
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है, जहाँ 10 करोड़ से अधिक की जनसंख्या बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। परिवहन बुनियादी ढाँचे की खस्ता हालत और संसाधनों की कमी ने जलमार्ग सुरक्षा को एक पुरानी समस्या बना दिया है, जिसका समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है। बचाव अभियान जारी रहने के साथ लापता लोगों की संख्या और मृत्यु का आँकड़ा आने वाले घंटों में बदल सकता है।