इक्वाडोर ने कोलंबिया पर 100% टैरिफ हटाया, 1 जून से व्यापार विवाद समाप्त
सारांश
मुख्य बातें
इक्वाडोर की नेशनल कस्टम्स सर्विस ने 1 जून 2026 से कोलंबिया के सामान पर लगाए गए 100 प्रतिशत टैरिफ को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस कदम से दोनों पड़ोसी देशों के बीच महीनों से चले आ रहे व्यापार विवाद का अंत हो गया है, जिसने द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर तनाव उत्पन्न कर दिया था।
मुख्य घटनाक्रम
इक्वाडोर के नेशनल कस्टम्स सर्विस के डायरेक्टर जनरल सैंड्रो कैस्टिलो ने रविवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए घोषणा की कि कोलंबिया से आने वाले या वहाँ से होकर गुज़रने वाले सामान पर लगाया गया सुरक्षा शुल्क घटाकर शून्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार और विकास के क्षेत्र में सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।
इक्वाडोर के राष्ट्रपति डेनियल नोबोआ ने शुक्रवार को यह निर्णय कोलंबिया के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बेलार्डो डे ला एस्प्रीला के साथ बातचीत के बाद घोषित किया था। कैस्टिलो ने यह भी स्पष्ट किया कि कस्टम्स विभाग इस फैसले को सुचारु रूप से लागू करेगा, ताकि कानूनी व्यापार को बढ़ावा मिले, क्षेत्रीय एकजुटता मजबूत हो और अवैध गतिविधियों के खिलाफ संयुक्त प्रयास जारी रहें।
विवाद की पृष्ठभूमि
इक्वाडोर ने यह शुल्क जनवरी 2026 में कोलंबिया से आने वाले सामान पर लगाया था। इसके पीछे सीमा सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ और ड्रग तस्करी के विरुद्ध सहयोग में कमी को कारण बताया गया था। शुरुआत में यह शुल्क 30 प्रतिशत था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया और फिर 1 मई को इसे 100 प्रतिशत तक पहुँचा दिया गया। यह नियम कोलंबिया से आने वाले या वहाँ निर्मित सभी सामान पर लागू था और इसकी गणना सामान की कस्टम वैल्यू के आधार पर होती थी। गौरतलब है कि तेल, ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तथा अस्थायी आयात, कस्टम ट्रांजिट, री-एक्सपोर्ट और निजी पर्यटक वाहनों को इस शुल्क से छूट दी गई थी।
कोलंबिया की जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय दबाव
जवाब में कोलंबिया ने भी कुछ इक्वाडोरियन उत्पादों पर 75 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिए थे और एक समय के लिए इक्वाडोर को बिजली का निर्यात भी रोक दिया था। व्यापारिक संगठनों ने चेतावनी दी थी कि इस विवाद से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, व्यापार घट सकता है और रोज़गार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इस पूरे विवाद को एंडियन कम्युनिटी की महासचिव संस्था के पास ले जाया गया था, जिसने दोनों देशों को निर्देश दिया था कि वे अपने-अपने व्यापार प्रतिबंध हटाएँ ताकि क्षेत्रीय नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।
आम जनता और व्यापार पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के व्यापारिक समुदाय महीनों की अनिश्चितता के बाद राहत की साँस ले रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस विवाद ने दिखाया कि सुरक्षा चिंताओं को व्यापार नीति से जोड़ना किस तरह द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नुकसान पहुँचा सकता है। अब शुल्क हटने से सप्लाई चेन के सामान्य होने और रोज़गार पर पड़े दबाव में कमी आने की उम्मीद है।
क्या होगा आगे
कस्टम्स विभाग ने संकेत दिया है कि नए ढाँचे के तहत कानूनी व्यापार को प्रोत्साहन और अवैध गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे। एंडियन कम्युनिटी के निर्देशों के अनुपालन से क्षेत्रीय एकीकरण की प्रक्रिया को भी नई गति मिलने की संभावना है।