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ट्रंप का बड़ा कार्यकारी आदेश: टैरिफ चोरी पर शिकंजा, विदेशी आयातकों की होगी कड़ी जांच

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ट्रंप का बड़ा कार्यकारी आदेश: टैरिफ चोरी पर शिकंजा, विदेशी आयातकों की होगी कड़ी जांच

सारांश

ट्रंप का नया कार्यकारी आदेश सिर्फ टैरिफ नहीं, पूरी आयात व्यवस्था को बदल रहा है। विदेशी कंपनियों को अब असली मालिकों का खुलासा, बड़े बॉन्ड और सख्त ऑडिट का सामना करना होगा। प्रशासन का दावा है कि इससे सालाना 20-30 अरब डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा और फेंटानिल व नकली सामान पर लगाम लगेगी।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को टैरिफ चोरी रोकने के लिए व्यापक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए।
डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को 180 दिनों में आयातक पात्रता नियम संशोधित करने होंगे।
व्यापार सलाहकार पीटर नवार्रो के अनुसार सालाना 20-30 अरब डॉलर अतिरिक्त राजस्व का अनुमान।
फेंटानिल या प्रतिबंधित सामान आयात करने वाली कंपनियाँ ‘गुड स्टैंडिंग’ खो सकती हैं।
विदेशी आयातकों को अब असली मालिकों की जानकारी, बड़े बॉन्ड और विस्तृत कारोबारी ब्यौरा देना अनिवार्य।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को एक व्यापक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसका मकसद अमेरिका में आने वाले विदेशी सामानों की कड़ी जांच करना, टैरिफ (आयात शुल्क) चोरी रोकना और नकली व अवैध उत्पादों पर सख्त कार्रवाई करना है। आदेश के तहत आयातकों और विदेशी कंपनियों को अब अधिक वित्तीय गारंटी, मालिकाना ढाँचे का खुलासा और कारोबारी जानकारी देना अनिवार्य होगा।

आदेश के मुख्य प्रावधान

नए आदेश के अनुसार, अमेरिका में सामान भेजने वाली कंपनियों को अब अपने असली मालिकों की जानकारी देनी होगी। गलत जानकारी देने या शुल्क चोरी पकड़े जाने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, और आयातकों से अधिक वित्तीय गारंटी (बॉन्ड) माँगी जा सकती है। कस्टम्स विभाग ऑडिट और जाँच प्रक्रिया को और सख्त करेगा।

आदेश में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को निर्देश दिया गया है कि वह 180 दिनों के भीतर आयातकों की पात्रता से जुड़े नियमों में संशोधन करे। इसके तहत मालिकाना जानकारी का विस्तृत खुलासा, आयात की मात्रा, कारोबारी संबंधों और अमेरिका में मौजूद संपत्तियों का ब्यौरा देना अनिवार्य होगा।

‘गुड स्टैंडिंग’ की नई शर्त

आदेश का एक अहम प्रावधान आयातकों के लिए ‘गुड स्टैंडिंग’ यानी अच्छी स्थिति की शर्त तय करता है। जिन कंपनियों पर अवैध रूप से फेंटानिल, उससे जुड़े रसायन या अन्य प्रतिबंधित सामान आयात करने का आरोप साबित होगा, वे अमेरिका में सामान आयात करने का अधिकार खो सकती हैं। आयातकों, कस्टम्स ब्रोकरों और माल ढुलाई एजेंसियों के अनुपालन रिकॉर्ड के आधार पर जोखिम स्तर तय किए जाएंगे।

प्रशासन का तर्क

व्हाइट हाउस में हस्ताक्षर समारोह से पहले अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा आयुक्त रॉडनी स्कॉट ने कहा कि प्रशासन अब सीमा सुरक्षा की नीति को व्यापार प्रवर्तन में भी लागू कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम वही सिद्धांत व्यापार पर लागू कर रहे हैं ताकि अमेरिकी उद्योगों की रक्षा की जा सके। अलग-अलग देश और लोग आयात-निर्यात नियमों तथा टैरिफ व्यवस्था को कमजोर कर अमेरिकी व्यवसायों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और हम इसे रोकेंगे।’

आदेश में स्पष्ट कहा गया है, ‘कस्टम्स प्रवर्तन अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।’ साथ ही यह भी कहा गया कि व्यवस्था की कमियों, कानूनी खामियों, कमजोर प्रवर्तन तंत्र और पुरानी प्रक्रियाओं ने ‘गलत इरादों वाले लोगों को कानून से बचने के अवसर दिए हैं।’

राजस्व का अनुमान

ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवार्रो ने दावा किया कि इस पहल से कस्टम्स धोखाधड़ी में कमी आएगी और सरकार को बड़ा राजस्व मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘इस कार्यकारी आदेश से हर साल 20 से 30 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। हम फेंटानिल, असुरक्षित उत्पादों, नकली सामान और टैरिफ चोरी करने वालों पर सख्ती करेंगे।’

व्हाइट हाउस के स्टाफ सचिव विल स्कार्फ ने कहा कि आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयातक सीमा पार आने वाले सामान की सही जानकारी दें और शुल्क व टैरिफ का सही भुगतान करें।

भारतीय कंपनियों पर असर

यदि कोई भारतीय या अन्य विदेशी कंपनी अमेरिका को सामान बेचती है, तो उसे नए नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। विदेशी कंपनियाँ अब कुछ अनौपचारिक आयात प्रक्रियाओं का फायदा नहीं उठा पाएंगी और औपचारिक आयात के लिए अतिरिक्त शर्तें लागू होंगी। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन टैरिफ, सप्लाई चेन सुरक्षा और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली व्यापार नीति पर लगातार जोर दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो छोटे निर्यातकों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं को सबसे ज़्यादा प्रभावित करेगी। अगर मालिकाना खुलासे के नियम कड़े लागू हुए, तो शेल कंपनियों के ज़रिए होने वाला ट्रांसशिपमेंट — जिसमें चीनी सामान तीसरे देशों से अमेरिका भेजा जाता है — सबसे बड़ा निशाना बनेगा।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप के नए कार्यकारी आदेश में क्या है?
यह आदेश अमेरिका में आयातित विदेशी सामानों की कड़ी जांच, टैरिफ चोरी पर सख्त कार्रवाई और नकली या अवैध उत्पादों पर रोक के लिए जारी किया गया है। इसके तहत आयातकों को असली मालिकाना जानकारी, अधिक वित्तीय बॉन्ड और विस्तृत कारोबारी ब्यौरा देना होगा।
नए नियम कब लागू होंगे?
डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को आदेश पर हस्ताक्षर के 180 दिनों के भीतर आयातकों की पात्रता से जुड़े नियमों में संशोधन करना होगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से ऑडिट और अनुपालन शर्तें लागू होंगी।
इस आदेश से अमेरिका को कितना राजस्व मिलेगा?
ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवार्रो के अनुसार, इस पहल से हर साल 20 से 30 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। हालाँकि यह केवल प्रशासन का अनुमान है, और स्वतंत्र सत्यापन अभी उपलब्ध नहीं है।
भारतीय कंपनियों पर इसका क्या असर होगा?
अमेरिका को सामान निर्यात करने वाली भारतीय कंपनियों को अब सख्त नियमों का पालन करना होगा, जिसमें असली मालिकों का खुलासा और बड़े बॉन्ड शामिल हैं। गलत जानकारी देने पर भारी जुर्माना और आयात अधिकार खोने का जोखिम रहेगा।
‘गुड स्टैंडिंग’ की शर्त क्या है?
यह आयातकों के लिए तय की गई नई अनुपालन कसौटी है। जिन कंपनियों पर फेंटानिल, उससे जुड़े रसायन या अन्य प्रतिबंधित सामान के अवैध आयात का आरोप साबित होगा, वे अमेरिका में सामान आयात करने का अधिकार खो सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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