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यूरोजोन मुद्रास्फीति सितंबर में 3.8% पर, ECB अध्यक्ष लेगार्ड ने कहा — अभी घबराने की ज़रूरत नहीं

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यूरोजोन मुद्रास्फीति सितंबर में 3.8% पर, ECB अध्यक्ष लेगार्ड ने कहा — अभी घबराने की ज़रूरत नहीं

सारांश

यूरोजोन में महंगाई तीन साल के शिखर 3.8% पर पहुँची, लेकिन ECB अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा कि ऊर्जा कीमतें मुख्य वजह हैं और दूसरे दौर का प्रभाव अभी दिखाई नहीं दिया है। जब तक दीर्घकालिक मुद्रास्फीति उम्मीदें 2% से ऊपर नहीं जातीं, ECB की नीति में बदलाव नहीं।

मुख्य बातें

यूरोस्टेट के अनुसार सितंबर 2026 में यूरोजोन मुद्रास्फीति 3.8 प्रतिशत — तीन वर्षों में सर्वोच्च स्तर।
अगस्त में यह दर 3.2 प्रतिशत थी; वृद्धि का बड़ा कारण ऊर्जा कीमतों में 18.8 प्रतिशत की उछाल।
ECB अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा — मुद्रास्फीति के 'दूसरे दौर के प्रभाव' अभी तक नहीं दिखे।
मध्यम से दीर्घकालिक मुद्रास्फीति उम्मीदें अभी भी लक्ष्य स्तर 2 प्रतिशत के आसपास।
लेगार्ड ने संकेत दिया — दीर्घकालिक उम्मीदें बढ़ने या दूसरे दौर के स्पष्ट संकेत मिलने पर ही ECB कार्रवाई करेगा।

यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा है कि यूरोजोन में बढ़ती महंगाई को लेकर तत्काल घबराने की आवश्यकता नहीं है, हालाँकि यूरोस्टेट के आँकड़ों के अनुसार सितंबर 2026 में यूरोजोन की मुद्रास्फीति दर 3.8 प्रतिशत पर पहुँच गई — जो तीन वर्षों में सर्वोच्च स्तर है। यह आँकड़ा अगस्त के 3.2 प्रतिशत से अधिक है और महीने की शुरुआत में जारी प्रारंभिक अनुमान के अनुरूप है।

मुद्रास्फीति में वृद्धि के कारण

लेगार्ड ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि इस उछाल का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा कीमतों में 18.8 प्रतिशत की भारी वृद्धि से प्रेरित है। उनके अनुसार, ऊर्जा की कीमतों में यह उछाल समग्र मूल्य स्तर को प्रभावित करता है, लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि यह स्थायी महंगाई का संकेत हो।

यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता का सामना कर रहा है और वैश्विक कमोडिटी बाज़ार में उथल-पुथल बनी हुई है।

ECB किन संकेतों पर नज़र रख रहा है

लेगार्ड ने कहा कि ECB दो महत्वपूर्ण संकेतकों पर बारीकी से नज़र बनाए हुए है — पहला, मुद्रास्फीति का 'दूसरे दौर का प्रभाव', यानी क्या ऊर्जा कीमतों में वृद्धि पूरे आर्थिक तंत्र में फैलकर वेतन और अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ाएगी। उन्होंने कहा, 'हमने अभी तक उपरोक्त घटना को नहीं देखा है।'

दूसरा संकेतक है मुद्रास्फीति की दीर्घकालिक उम्मीदें। लेगार्ड ने बताया कि हालाँकि अल्पकालिक मुद्रास्फीति की उम्मीदों में कुछ बढ़ोतरी देखी गई है, मध्यम से दीर्घकालिक उम्मीदें अभी भी दो प्रतिशत के आसपास बनी हुई हैं — जो ECB का लक्ष्य स्तर है।

ECB कब करेगा कार्रवाई

लेगार्ड ने स्पष्ट किया कि यदि मध्यम से दीर्घकालिक मुद्रास्फीति की उम्मीदें वर्तमान स्तर से ऊपर जाने लगती हैं, या मुद्रास्फीति के दूसरे दौर के स्पष्ट संकेत मिलते हैं, तो ECB नीतिगत कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल बैंक के मौजूदा उपाय 'उचित प्रतीत होते हैं।'

गौरतलब है कि यह ECB की परंपरागत सतर्क मौद्रिक नीति के अनुरूप रुख है, जिसमें प्रतीक्षा करो और देखो की प्रवृत्ति रही है।

आम जनता और बाज़ार पर असर

यूरोजोन में 3.8 प्रतिशत की मुद्रास्फीति से आम उपभोक्ताओं पर बिजली, गैस और ईंधन के बिल बढ़ने का दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि ऊर्जा कीमतें इसी तरह बनी रहीं, तो सर्दियों में यूरोपीय परिवारों की जेब पर और बोझ पड़ सकता है।

आगे क्या होगा

बाज़ार विशेषज्ञ अब ECB की अगली बैठक पर नज़र रख रहे हैं, जहाँ ब्याज दरों पर निर्णय महत्वपूर्ण होगा। लेगार्ड के बयान से संकेत मिलता है कि जब तक दूसरे दौर के प्रभाव या दीर्घकालिक मुद्रास्फीति उम्मीदों में वृद्धि नहीं दिखती, तब तक दरों में बदलाव की संभावना कम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक अंतर्निहित जोखिम है — ऊर्जा कीमतों में 18.8 प्रतिशत की वृद्धि को 'अस्थायी' मानकर चलना पिछले अनुभवों में महँगा साबित हो चुका है। 2021-22 में भी केंद्रीय बैंकों ने मुद्रास्फीति को 'क्षणिक' कहा था और बाद में आक्रामक दर वृद्धि करनी पड़ी। असली सवाल यह है कि 'दूसरे दौर के प्रभाव' की पहचान कितनी जल्दी होगी — देर से की गई कार्रवाई अक्सर ज़्यादा कठोर होती है। भारतीय निर्यातकों और यूरोप से जुड़े व्यवसायों के लिए यूरो की चाल और ECB की ब्याज दर नीति दोनों पर नज़र रखना ज़रूरी है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सितंबर 2026 में यूरोजोन मुद्रास्फीति कितनी रही?
यूरोस्टेट के आँकड़ों के अनुसार सितंबर 2026 में यूरोजोन की मुद्रास्फीति दर 3.8 प्रतिशत रही, जो अगस्त के 3.2 प्रतिशत से अधिक और तीन वर्षों में सर्वोच्च स्तर है। यह आँकड़ा महीने की शुरुआत में जारी प्रारंभिक अनुमान के अनुरूप था।
यूरोजोन में महंगाई इतनी क्यों बढ़ी?
ECB अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड के अनुसार इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा कीमतों में 18.8 प्रतिशत की भारी उछाल के कारण है। ऊर्जा कीमतों में यह वृद्धि समग्र मूल्य स्तर को प्रभावित करती है।
ECB महंगाई पर कब कार्रवाई करेगा?
लेगार्ड ने कहा कि यदि मध्यम से दीर्घकालिक मुद्रास्फीति उम्मीदें 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर जाने लगें, या मुद्रास्फीति के दूसरे दौर के स्पष्ट संकेत मिलें, तो ECB नीतिगत कार्रवाई करेगा। फिलहाल मौजूदा उपाय 'उचित' बताए गए हैं।
मुद्रास्फीति का 'दूसरे दौर का प्रभाव' क्या होता है?
'दूसरे दौर का प्रभाव' तब होता है जब ऊर्जा या किसी एक क्षेत्र की बढ़ी कीमतें पूरी अर्थव्यवस्था में फैल जाती हैं — जैसे वेतन वृद्धि की माँग और अन्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल। लेगार्ड ने कहा कि यह प्रभाव यूरोजोन में अभी तक नहीं दिखा है।
यूरोजोन महंगाई का भारत पर क्या असर हो सकता है?
यूरोप को निर्यात करने वाले भारतीय व्यवसायों के लिए यूरो की विनिमय दर और यूरोपीय उपभोक्ता माँग पर असर पड़ सकता है। यदि ECB ब्याज दरें बढ़ाता है तो वैश्विक पूँजी प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिसका अप्रत्यक्ष असर भारतीय बाज़ारों पर भी देखा जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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