उत्तरी साइप्रस तट पर फेरी डूबी: 8 की मौत, 18 लापता; कप्तान समेत 8 हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
उत्तरी साइप्रस के तट के निकट रविवार, 31 अगस्त को एक तुर्की यात्री फेरी के पलटने और डूबने से 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 18 यात्री अभी भी लापता हैं। तुर्की साइप्रस अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तक 241 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था और राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।
हादसे का घटनाक्रम
यह फेरी कायरिनिया बंदरगाह से रवाना होने के कुछ ही समय बाद पलट गई। फेरी तुर्की के तासुकु बंदरगाह की ओर जा रही थी, जो कायरिनिया से लगभग 120 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। डबल-हल वाली इस फेरी में 259 यात्री और 8 चालक दल के सदस्य सवार थे। पलटने के बाद फेरी समुद्र में 500 मीटर से अधिक की गहराई में जा डूबी।
बचाव अभियान और तकनीकी सहायता
तुर्की सरकार ने खोज अभियान में सहायता के लिए एक रिमोट संचालित वाहन (ROV) भेजा है, जो गहरे समुद्र में अभियान चला सकता है। यह उपकरण मंगलवार तक दुर्घटनास्थल पर पहुँचने की उम्मीद थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभी निश्चित नहीं है कि फेरी के डूबने के समय उसके भीतर कोई यात्री फंसा था या नहीं, हालाँकि सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो संकेत देते हैं कि डूबते वक्त फेरी के एक हिस्से में कुछ लोग मौजूद थे।
कप्तान और चालक दल हिरासत में
तुर्की साइप्रस अधिकारियों ने फेरी के कप्तान और चालक दल के सात अन्य सदस्यों को हिरासत में ले लिया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस फेरी में पहले भी पानी रिसने की समस्या सामने आई थी और उसकी मरम्मत कराई गई थी। कुछ बचे हुए यात्रियों ने कथित तौर पर दावा किया कि कप्तान और चालक दल के सदस्य सबसे पहले फेरी से बाहर निकल गए और यात्रियों को सुरक्षित निकासी के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए।
मौसम और सुरक्षा पर सवाल
गौरतलब है कि शनिवार को साइप्रस में तेज तूफान आया था और रविवार को भी समुद्री स्थितियाँ प्रतिकूल बनी हुई थीं। इसके बावजूद अधिकारियों का कहना है कि उस समय के मौसम के आकलन के अनुसार फेरी का रवाना होना सुरक्षित माना गया था। फेरी के पलटने की असली वजह की जाँच अभी जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब भूमध्यसागरीय क्षेत्र में समुद्री यात्रा सुरक्षा मानकों पर पहले से सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या
लापता 18 यात्रियों की तलाश में बचाव दल पूरी क्षमता से जुटा हुआ है। ROV के दुर्घटनास्थल पर पहुँचने के बाद गहराई में फँसे किसी भी व्यक्ति या साक्ष्य की पहचान हो सकेगी। जाँच के नतीजे फेरी संचालन और समुद्री सुरक्षा मानकों पर नई बहस छेड़ सकते हैं।