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क्या फ्रांस में किसानों के विरोध प्रदर्शन का कारण ईयू-मार्कोसुर समझौता है?

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क्या फ्रांस में किसानों के विरोध प्रदर्शन का कारण ईयू-मार्कोसुर समझौता है?

सारांश

क्या फ्रांस में किसान अपने हक के लिए सड़कों पर उतर आए हैं? जानिए किसानों के विरोध प्रदर्शन का असली कारण, जो यूरोपीय यूनियन और मार्कोसुर के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से जुड़ा है। मैक्रों सरकार की नीतियों पर भी उठ रहे हैं सवाल।

मुख्य बातें

किसानों का गुस्सा यूरोपीय यूनियन और मार्कोसुर डील के खिलाफ है।
प्रदर्शन में एफिल टावर तक पहुंचने के लिए चक्का जाम किया गया।
सरकार की नीतियों को लेकर जनता में आक्रोश है।
मार्कोसुर डील से सस्ते खाद्य आयात का खतरा है।
किसानों की आवाज़ को सुनना आवश्यक है।

पेरिस, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फ्रांस में सरकार के खिलाफ किसानों ने सड़कों पर उतरते हुए अपनी आवाज उठाई है। उनका यह आक्रोश यूरोपियन यूनियन और दक्षिण अमेरिकी संगठन मार्कोसुर के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के कारण है। इसके अलावा, मैक्रों सरकार द्वारा जानवरों की देखभाल के तरीके को लेकर भी जनता में गहरी नाराजगी है।

गुरुवार को, लोग विरोध करते हुए एफिल टावर तक पहुंचे। किसानों ने पेरिस के विभिन्न स्थानों पर चक्का जाम किया।

किसानों ने शहर में प्रवेश के लिए पुलिस चेकपॉइंट्स को पार किया, चैंप्स-एलिसीस पर गाड़ी चलाई, और आर्क डी ट्रायम्फ स्मारक के आसपास सुबह होते ही सड़कें ब्लॉक कर दीं।

राइट विंग संगठन सहयोजक रूराले यूनियन ने राजधानी में इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे सस्ते खाद्य आयात में वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही, मैक्रों सरकार द्वारा मवेशियों की बीमारी का प्रबंधन करने के तरीके को लेकर भी जनता में आक्रोश है।

मध्य फ्रांस के विएने में यूनियन के उपाध्यक्ष स्टीफन पेलेटियर ने कहा, "हम गुस्से और निराशा के बीच हैं। हमें मार्कोसुर की तरह अकेलापन महसूस हो रहा है। हमें स्पेस शटल, एयरबस या कार के लिए छोड़ दिया गया है।"

सरकार की प्रवक्ता मॉड ब्रेगियन ने फ्रांस इन्फो रेडियो को बताया कि मोटरवे को ब्लॉक करना या नेशनल असेंबली के सामने इकट्ठा होने की कोशिश करना गैर-कानूनी है। यह विरोध प्रदर्शन यूरोपीय आयोग के एक प्रस्ताव के कुछ दिन बाद हुआ, जिसमें किसानों को ईयू फंडिंग के तहत 45 अरब यूरो पहले जारी करने और मार्कोसुर के समर्थन में हिचक रहे देशों को मनाने के लिए कुछ उर्वरकों पर आयात शुल्क घटाने का सुझाव दिया गया था।

ईयू-मर्कोसुर डील से दुनिया का सबसे बड़ा फ्री-ट्रेड क्षेत्र बनेगा, और 27 देशों के इस समूह को लैटिन अमेरिका में अधिक गाड़ियां, मशीनरी, वाइन और स्पिरिट का निर्यात करने में मदद मिलेगी। लेकिन किसानों को चिंता है कि ब्राजील और इसके पड़ोसी देशों से सस्ते उत्पादों के आने से उनकी कीमतें गिर सकती हैं।

गौरतलब है कि मार्कोसुर डील, यूरोपीय संघ और दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूहों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता है। अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे और उरुग्वे के समूह को मार्कोसुर कहा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें हमेशा देश के साथ खड़ा रहना चाहिए। किसानों का यह विरोध एक गंभीर मुद्दा है, जो कृषि क्षेत्र और खाद्य सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। सरकार को किसानों की चिंताओं को सुनना होगा और उचित कदम उठाने होंगे।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्रांस में किसानों का विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है?
किसानों का यह विरोध प्रदर्शन यूरोपियन यूनियन और मार्कोसुर के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते के खिलाफ है, जो उनकी फसल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
क्या सरकार ने किसानों की मांगों का समाधान किया है?
सरकार ने अभी तक किसानों की मांगों का समाधान नहीं किया है, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।
मार्कोसुर डील क्या है?
मार्कोसुर डील यूरोपीय संघ और दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूहों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता है, जिसमें अर्जेंटीना , ब्राजील , पैराग्वे , और उरुग्वे शामिल हैं।
इस प्रदर्शन का प्रभाव क्या होगा?
यदि प्रदर्शन जारी रहता है, तो यह खाद्य सुरक्षा और कृषि नीतियों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
किसानों की प्रमुख चिंताओं में क्या है?
किसानों की प्रमुख चिंताओं में सस्ते खाद्य आयात और सरकार की नीतियों का प्रभाव शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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