गाजा फ्लोटिला बंदियों के अपमान पर 8 अरब-इस्लामिक देशों ने बेन-ग्विर की कड़ी निंदा की
सारांश
मुख्य बातें
आठ अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने 25 मई 2026 को संयुक्त रूप से इजरायली मंत्री इतामार बेन-ग्विर की उन हरकतों की कड़ी निंदा की, जो कथित तौर पर गाजा-बाउंड फ्लोटिला के प्रतिभागियों के साथ इजरायली हिरासत के दौरान की गईं। कतर के विदेश मंत्रालय ने इस संयुक्त बयान को सार्वजनिक किया, जिसमें बेन-ग्विर के व्यवहार को अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया गया।
संयुक्त बयान में क्या कहा गया
कतर, सऊदी अरब, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किए के विदेश मंत्रियों ने साझा बयान में बेन-ग्विर के कार्यों को 'भयानक, अपमानजनक और अस्वीकार्य' करार दिया। मंत्रियों ने कहा कि हिरासत में बंदियों को जानबूझकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करना मानवीय गरिमा पर सीधा हमला है।
बयान में स्पष्ट किया गया कि यह आचरण अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून — दोनों के तहत इजरायल की जिम्मेदारियों का उल्लंघन है।
बेन-ग्विर पर विशेष आरोप
मंत्रियों ने केवल फ्लोटिला प्रकरण तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने बेन-ग्विर और अन्य इजरायली अधिकारियों द्वारा कब्जे वाले फिलिस्तीनी इलाके में फिलिस्तीनियों के खिलाफ भड़काऊ और हिंसक गैर-कानूनी गतिविधियों की भी कड़ी निंदा की। आलोचकों का कहना है कि बेन-ग्विर की यह प्रवृत्ति नई नहीं है और पहले भी विवादों का केंद्र रहे हैं।
शांति प्रक्रिया पर खतरे की चेतावनी
संयुक्त बयान में चेतावनी दी गई कि बेन-ग्विर की भड़काऊ गतिविधियाँ नफरत और कट्टरपंथ को बढ़ावा देती हैं और दो-राज्य समाधान पर आधारित स्थायी शांति की दिशा में हो रहे प्रयासों में गंभीर बाधा उत्पन्न करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब गाजा संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव पहले से ही चरम पर है।
जवाबदेही और ठोस कार्रवाई की माँग
मंत्रियों ने माँग की कि बेन-ग्विर के कार्यों के लिए जवाबदेही तय की जाए और उनकी बार-बार की उकसावेबाजी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। बयान में जोर दिया गया कि सभी बंदियों की गरिमा और मानवीय व्यवहार सुनिश्चित किया जाए और कब्जे वाले फिलिस्तीनी इलाके में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूर्ण सम्मान हो।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इतने बड़े स्तर पर अरब और इस्लामिक देशों ने मिलकर किसी इजरायली मंत्री की सार्वजनिक निंदा की हो। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नज़र अब इस बात पर होगी कि इजरायल सरकार इस संयुक्त बयान पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या कोई कूटनीतिक कार्रवाई की जाती है।