फ्रांस ने इजरायली मंत्री इतामार बेन-गवीर पर लगाया प्रवेश प्रतिबंध, गाजा फ्लोटिला विवाद में बड़ा कदम
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने 24 मई 2025 को घोषणा की कि इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर पर तत्काल प्रभाव से फ्रांस में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह निर्णय गाजा-गामी 'ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला' में सवार फ्रांसीसी और यूरोपीय नागरिकों के साथ बेन-गवीर की कथित 'अस्वीकार्य' हरकतों के बाद लिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
बैरो ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'हम किसी भी हालत में यह बर्दाश्त नहीं कर सकते कि फ्रांसीसी नागरिकों को धमकाया जाए, डराया जाए या उनके साथ हिंसा की जाए — खासकर जब ऐसा किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की ओर से किया गया हो।' उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ को भी बेन-गवीर पर प्रतिबंध लगाने चाहिए।
बुधवार को इजरायली नौसेना ने 428 कार्यकर्ताओं को लेकर जा रहे फ्लोटिला को गाजा तट से लगभग 250 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में रोक लिया। आयोजकों के अनुसार, सोमवार सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई में सभी जहाजों को अशदोद बंदरगाह पर लाया गया।
वीडियो विवाद और बेन-गवीर की भूमिका
इसी दौरान बेन-गवीर ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें दर्जनों कार्यकर्ता जमीन पर घुटनों के बल बैठे दिखाई देते हैं — उनके सिर नीचे झुके हुए और हाथ पीछे ज़िप टाई से बंधे हुए थे। वीडियो में तेज आवाज में इजरायल का राष्ट्रीय गान बजाया जा रहा था। यह दृश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी आलोचना का कारण बना।
दक्षिण कोरियाई कार्यकर्ताओं पर भी असर
इस हफ्ते की शुरुआत में इजरायली बलों ने दो अन्य मानवीय सहायता फ्लोटिला को भी रोका था। 'लीना अल नबुलसी' नामक जहाज, जिसमें दक्षिण कोरियाई कार्यकर्ता किम आह-ह्युन और कोरियाई-अमेरिकी कार्यकर्ता जोनाथन विक्टर ली सवार थे, तथा 'क्युरियाकोस एक्स' नामक फ्लोटिला, जिसमें दक्षिण कोरियाई कार्यकर्ता किम डोंग-ह्योन थे — दोनों को रोक लिया गया। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने बाद में पुष्टि की कि किम आह-ह्युन और किम डोंग-ह्योन को इजरायल ने रिहा कर दिया।
फ्रांस की कूटनीतिक प्रतिक्रिया
बैरो ने बुधवार को ही फ्लोटिला कार्यकर्ताओं के साथ हुए व्यवहार की निंदा की थी और इसे 'अस्वीकार्य' करार दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि इजरायल में फ्रांस के राजदूत जोशुआ एल. ज़ार्का को तलब किया जाएगा। यह कदम दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत देता है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब गाजा में मानवीय संकट को लेकर यूरोपीय देशों और इजरायल के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। फ्रांस के यूरोपीय संघ से प्रतिबंध लगाने की अपील को यदि समर्थन मिलता है, तो यह इजरायल के लिए व्यापक कूटनीतिक अलगाव का कारण बन सकता है।