ईरान पर नए EU प्रतिबंधों के लिए तैयार रहे यूरोपीय संघ: इटली PM मेलोनी की संसद में चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 11 जून 2026 को रोम में संसद को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यदि ईरान अपने मौजूदा रुख पर कायम रहता है और मध्य पूर्व संकट का कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तो यूरोपीय संघ (EU) को नए लक्षित प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में सैन्य तनाव, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर यूरोपीय देशों की चिंताएँ लगातार गहरी हो रही हैं।
मेलोनी का संसद में बयान
संसद में अपने संबोधन में मेलोनी ने कहा, "क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता है।" उन्होंने आगे चेतावनी दी कि अगर तेहरान ने अपने रुख में बदलाव नहीं किया, तो "यूरोपीय संघ को अतिरिक्त दबाव बनाने के लिए नए लक्षित प्रतिबंधों पर विचार करना होगा।" मेलोनी ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता देनी चाहिए।
इज़रायली मंत्री की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति
मेलोनी ने अपने संबोधन में इज़रायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर की हालिया टिप्पणियों की भी कड़ी आलोचना की। दरअसल, गाजा सहायता फ्लोटिला शिप के कार्यकर्ताओं को बंदी बनाने के मामले में इटली द्वारा EU से प्रतिबंध लगाने की माँग के जवाब में बेन-ग्वीर ने सोशल मीडिया पर इटली को 'लैंड ऑफ फ्लिप फ्लॉप' कहकर संबोधित किया था। मेलोनी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे बयान न केवल इटली के लिए अस्वीकार्य हैं, बल्कि इज़रायल की गरिमा के अनुरूप भी नहीं हैं।
मध्य पूर्व तनाव और यूरोप पर असर
यूरोपीय देशों के बीच इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता का असर ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक मार्गों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। आलोचकों का कहना है कि यूरोपीय संघ की प्रतिबंध नीति तब तक प्रभावी नहीं होगी जब तक सभी सदस्य देश एकमत नहीं होते — और इस पर सहमति बनाना अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
सहयोगी देशों के बीच मतभेद
मेलोनी ने स्वीकार किया कि सहयोगी देशों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि "सार्वजनिक संवाद में सम्मान और जिम्मेदारी बनाए रखना आवश्यक है।" गौरतलब है कि इटली-इज़रायल संबंध हाल के महीनों में गाजा नीति को लेकर पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं।
आगे क्या
मेलोनी के इस बयान के बाद EU स्तर पर ईरान-विरोधी नए प्रतिबंधों पर औपचारिक विचार-विमर्श की संभावना बढ़ गई है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि फ्रांस, जर्मनी और अन्य प्रमुख EU सदस्य देश इस प्रस्ताव पर किस हद तक एकजुट होते हैं।