वैश्विक विकास पहल की 5वीं वर्षगांठ: दक्षिण केंद्र प्रमुख कार्लोस कोरिया ने गिनाईं उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण केंद्र के कार्यकारी निदेशक कार्लोस कोरिया ने वैश्विक विकास पहल (Global Development Initiative) की 5वीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि यह पहल विकास को बढ़ावा देने के लिए केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ठोस और व्यावहारिक कदम उठाती है। उनके अनुसार, यह पहल 130 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का समर्थन प्राप्त कर चुकी है और वैश्विक दक्षिण की विकास संबंधी आकांक्षाओं को केंद्र में रखती है।
पहल के मूल सिद्धांत
कोरिया ने कहा कि वैश्विक विकास पहल समावेशी विकास और नवाचार को प्रोत्साहित करने जैसे बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित है। यह पहल सभी देशों के साथ समान व्यवहार करने और भेदभाव से बचने पर जोर देती है। उनके मुताबिक, इसका केंद्रीय उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से एक अधिक न्यायपूर्ण और समृद्ध विश्व का निर्माण करना है।
सतत विकास लक्ष्यों पर असर
कोरिया ने रेखांकित किया कि जब संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत विकास एजेंडे के कई लक्ष्यों को हासिल करने की प्रगति अपेक्षा से धीमी है, ऐसे में यह पहल उन लक्ष्यों पर ध्यान बनाए रखने और उन्हें गति देने का काम करती है। उन्होंने कहा कि यह पहल अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
चीन की भूमिका और दक्षिण-दक्षिण सहयोग
कोरिया के अनुसार, इस पहल के अंतर्गत चीन ने गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल रूपांतरण जैसे क्षेत्रों में अपने विकास के अनुभव अन्य देशों के साथ साझा किए हैं। इसके अतिरिक्त, सहयोगी परियोजनाओं और वित्तीय सहायता के माध्यम से दक्षिण-दक्षिण सहयोग को भी नई ऊर्जा मिली है। गौरतलब है कि यह सहयोग ढाँचा पारंपरिक उत्तर-दक्षिण सहायता मॉडल से अलग एक वैकल्पिक विकास मार्ग के रूप में उभर रहा है।
5वीं वर्षगांठ की उच्चस्तरीय बैठक
इस वर्ष जुलाई में बीजिंग में आयोजित पहल की 5वीं वर्षगांठ से जुड़ी उच्चस्तरीय बैठक में भविष्य की दिशा और प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श हुआ। कोरिया ने दक्षिण केंद्र की इस पहल में सक्रिय भागीदारी और इसके क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
अगले पाँच वर्षों की प्राथमिकताएँ
आने वाले पाँच वर्षों के लिए कोरिया ने कहा कि जारी प्रयासों को गति देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता को और सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया जाएगा। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर बहुपक्षवाद को लेकर तनाव बढ़ रहे हैं और विकासशील देश जलवायु परिवर्तन, ऋण संकट और खाद्य असुरक्षा जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं।