मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध का खतरा: अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम उल्लंघन पर डॉ. वाएल अव्वाद की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
मध्य पूर्व में 8 जुलाई 2026 को बुधवार तड़के से हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए, जब अमेरिका और ईरान दोनों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप लगाया। दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य एशिया के मामलों को कवर करने वाले वरिष्ठ विदेशी पत्रकार डॉ. वाएल अव्वाद ने इस घटनाक्रम को लेकर गंभीर चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक विस्फोटक हो सकती है।
अमेरिका का उकसावा और ईरान की संभावित प्रतिक्रिया
डॉ. अव्वाद के अनुसार, यह अमेरिका की ओर से तनाव बढ़ाने वाला एक बड़ा कदम है, जिससे ईरान कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। उनका कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन मार्ग को लेकर अमेरिका जानबूझकर ईरान को उकसा रहा है, जो मौजूदा तनाव की मूल वजह है।
उन्होंने यह भी बताया कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दक्षिणी लेबनान पर कब्जा समाप्त करने और वहाँ हमले रोकने के लिए राजी नहीं कर सके, तो उन्होंने होर्मुज में दबाव बनाने की वैकल्पिक रणनीति अपनाई।
14 सूत्रीय समझौते की अनदेखी
डॉ. अव्वाद ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इस समझौते के पहले बिंदु में सभी पक्षों द्वारा गतिविधियाँ रोकने का प्रावधान है, जिसमें लेबनान भी शामिल है। समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अनुच्छेद चार में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के उस हिस्से में जहाजों की सुरक्षा और नौवहन की जिम्मेदारी ईरान की होगी।
उनके अनुसार, अब तक ईरान और ओमान मिलकर इस क्षेत्र की निगरानी करते रहे हैं। लेकिन अमेरिका नौवहन मार्ग में बदलाव लाने के लिए ईरान को उकसा रहा है — और यही मौजूदा घटनाक्रम की बुनियाद है। डॉ. अव्वाद ने कहा, "यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका इस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने में सक्षम नहीं है।"
नाटो को साथ लाने की अमेरिकी रणनीति
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया जब राष्ट्रपति ट्रंप अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। डॉ. अव्वाद के मुताबिक, यह संयोग नहीं है — अमेरिका होर्मुज की निगरानी और ईरान का सामना करने के लिए नाटो देशों को भी अपने साथ शामिल करना चाहता है। उनका कहना है कि अमेरिका अपने बूते इस समस्या को नहीं सुलझा सकता, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट पर पूर्ण नियंत्रण ईरान के पास है।
आने वाले महीने निर्णायक
डॉ. अव्वाद ने चेताया कि इस समझौते की 60 दिन की समयसीमा पूरी होने से पहले के अगले दो से तीन महीने पूरे क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा, "मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्र एक और व्यापक युद्ध की ओर बढ़ सकता है।" विशेषज्ञों के इस आकलन को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब होर्मुज और लेबनान दोनों मोर्चों पर टिकी हैं।