8 जुलाई 2026
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मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध का खतरा: अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम उल्लंघन पर डॉ. वाएल अव्वाद की चेतावनी

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मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध का खतरा: अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम उल्लंघन पर डॉ. वाएल अव्वाद की चेतावनी

सारांश

अमेरिका-ईरान के बीच 14 सूत्रीय समझौते के बावजूद होर्मुज में नया तनाव। डॉ. वाएल अव्वाद की चेतावनी — अगले दो से तीन महीने निर्णायक हैं और क्षेत्र एक और व्यापक युद्ध की दहलीज पर खड़ा है।

मुख्य बातें

8 जुलाई 2026 को मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान दोनों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप लगाया।
वाएल अव्वाद ने चेताया कि ईरान कुवैत और बहरीन के अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
अमेरिका-ईरान के बीच हस्ताक्षरित 14 सूत्रीय समझौते के अनुच्छेद चार के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी ईरान की जिम्मेदारी है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल होने को होर्मुज पर नाटो को साथ लाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
समझौते की 60 दिन की समयसीमा से पहले के अगले 2-3 महीने पूरे क्षेत्र के लिए निर्णायक बताए जा रहे हैं।

मध्य पूर्व में 8 जुलाई 2026 को बुधवार तड़के से हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए, जब अमेरिका और ईरान दोनों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप लगाया। दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य एशिया के मामलों को कवर करने वाले वरिष्ठ विदेशी पत्रकार डॉ. वाएल अव्वाद ने इस घटनाक्रम को लेकर गंभीर चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक विस्फोटक हो सकती है।

अमेरिका का उकसावा और ईरान की संभावित प्रतिक्रिया

डॉ. अव्वाद के अनुसार, यह अमेरिका की ओर से तनाव बढ़ाने वाला एक बड़ा कदम है, जिससे ईरान कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। उनका कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन मार्ग को लेकर अमेरिका जानबूझकर ईरान को उकसा रहा है, जो मौजूदा तनाव की मूल वजह है।

उन्होंने यह भी बताया कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दक्षिणी लेबनान पर कब्जा समाप्त करने और वहाँ हमले रोकने के लिए राजी नहीं कर सके, तो उन्होंने होर्मुज में दबाव बनाने की वैकल्पिक रणनीति अपनाई।

14 सूत्रीय समझौते की अनदेखी

डॉ. अव्वाद ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इस समझौते के पहले बिंदु में सभी पक्षों द्वारा गतिविधियाँ रोकने का प्रावधान है, जिसमें लेबनान भी शामिल है। समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अनुच्छेद चार में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के उस हिस्से में जहाजों की सुरक्षा और नौवहन की जिम्मेदारी ईरान की होगी।

उनके अनुसार, अब तक ईरान और ओमान मिलकर इस क्षेत्र की निगरानी करते रहे हैं। लेकिन अमेरिका नौवहन मार्ग में बदलाव लाने के लिए ईरान को उकसा रहा है — और यही मौजूदा घटनाक्रम की बुनियाद है। डॉ. अव्वाद ने कहा, "यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका इस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने में सक्षम नहीं है।"

नाटो को साथ लाने की अमेरिकी रणनीति

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया जब राष्ट्रपति ट्रंप अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। डॉ. अव्वाद के मुताबिक, यह संयोग नहीं है — अमेरिका होर्मुज की निगरानी और ईरान का सामना करने के लिए नाटो देशों को भी अपने साथ शामिल करना चाहता है। उनका कहना है कि अमेरिका अपने बूते इस समस्या को नहीं सुलझा सकता, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट पर पूर्ण नियंत्रण ईरान के पास है।

आने वाले महीने निर्णायक

डॉ. अव्वाद ने चेताया कि इस समझौते की 60 दिन की समयसीमा पूरी होने से पहले के अगले दो से तीन महीने पूरे क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा, "मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्र एक और व्यापक युद्ध की ओर बढ़ सकता है।" विशेषज्ञों के इस आकलन को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब होर्मुज और लेबनान दोनों मोर्चों पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी के प्रावधानों का वह स्वयं उल्लंघन कर रहा है। यह पैटर्न नया नहीं है: अमेरिका ने पहले भी परमाणु समझौते (JCPOA) से एकतरफा पीछे हटकर ईरान के साथ विश्वास की खाई बनाई थी। होर्मुज पर ईरान का भौगोलिक नियंत्रण एक तथ्य है जिसे नाटो की भागीदारी भी बदल नहीं सकती — बल्कि यह संघर्ष को बहुपक्षीय और अधिक जटिल बना सकती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि लेबनान मोर्चे पर नेतन्याहू को नियंत्रित करने में ट्रंप की विफलता सीधे होर्मुज संकट को जन्म दे रही है — दोनों संकट अलग नहीं, एक ही भू-राजनीतिक शतरंज के मोहरे हैं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम उल्लंघन का विवाद क्या है?
8 जुलाई 2026 को मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान दोनों ने एक-दूसरे पर 14 सूत्रीय समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन मार्ग को लेकर अमेरिकी कदम इस तनाव की मुख्य वजह है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस संकट में क्यों अहम है?
14 सूत्रीय समझौते के अनुच्छेद चार के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा और नौवहन की जिम्मेदारी ईरान की है। डॉ. अव्वाद के अनुसार, अमेरिका इस मार्ग में बदलाव लाने के लिए ईरान को उकसा रहा है, जो मौजूदा तनाव की बुनियाद है।
इस संकट में इजरायल और लेबनान की क्या भूमिका है?
डॉ. अव्वाद के अनुसार, जब राष्ट्रपति ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को दक्षिणी लेबनान पर कब्जा समाप्त करने और वहाँ हमले रोकने के लिए राजी नहीं कर सके, तो उन्होंने होर्मुज में ईरान पर दबाव बनाने की वैकल्पिक रणनीति अपनाई। लेबनान समझौते के पहले बिंदु में भी शामिल है।
नाटो का इस संकट से क्या संबंध है?
राष्ट्रपति ट्रंप अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। डॉ. अव्वाद के मुताबिक, अमेरिका होर्मुज की निगरानी और ईरान का सामना करने के लिए नाटो देशों को अपने साथ शामिल करना चाहता है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट पर पूर्ण नियंत्रण ईरान के पास है।
आने वाले महीनों में क्षेत्र की स्थिति कैसी रह सकती है?
डॉ. अव्वाद के अनुसार, 14 सूत्रीय समझौते की 60 दिन की समयसीमा पूरी होने से पहले के अगले दो से तीन महीने पूरे क्षेत्र के लिए बेहद निर्णायक हैं। उन्होंने चेताया है कि मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्र एक और व्यापक युद्ध की ओर बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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