क्या बांग्लादेश में भारतीय छात्रों के लिए बढ़ रहा है डर?

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क्या बांग्लादेश में भारतीय छात्रों के लिए बढ़ रहा है डर?

सारांश

बांग्लादेश में पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्रों को राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती भारत-विरोधी भावना के कारण असुरक्षा का अनुभव हो रहा है। क्या यह स्थिति उनकी पढ़ाई और भविष्य को प्रभावित करेगी?

Key Takeaways

  • बांग्लादेश में भारतीय छात्रों के लिए असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
  • राजनीतिक अस्थिरता ने छात्रों के जीवन को प्रभावित किया है।
  • छात्रों का जीवन कर्फ्यू जैसा हो गया है।
  • बांग्लादेश में उच्च शिक्षा का भविष्य अनिश्चित है।
  • शिक्षा और राजनीति का संबंध गंभीरता से विचारणीय है।

ढाका, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में अध्ययनरत हजारों भारतीय मेडिकल छात्रों के लिए डर अब एक आम वास्तविकता बन चुका है। राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती भारत-विरोधी भावना ने उस देश की छवि को बदल दिया है, जिसे कभी उच्च शिक्षा के लिए सुरक्षित और किफायती गंतव्य माना जाता था।

वर्तमान में, बांग्लादेश में 9,000 से अधिक भारतीय मेडिकल छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। भारत के महंगे निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में कम ट्यूशन फीस के कारण बांग्लादेश वर्षों से भारतीय छात्रों के लिए एक आकर्षक विकल्प रहा है। यह व्यवस्था लंबे समय तक कुशलता से चलती रही और भारतीय छात्र ढाका के शैक्षणिक माहौल में सहजता से समाहित हो गए, द साउथ एशियन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार।

हालांकि, अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन और हिंसक घटनाओं के बाद शेख हसीना की सत्ता से विदाई के साथ यह संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया।

दिसंबर में एक भारतीय छात्र पर स्थानीय गिरोह ने हमला कर उसका मोबाइल फोन और बटुआ लूट लिया। इस घटना ने कैम्पसों में सनसनी फैला दी और यह धारणा मजबूत हुई कि अब असुरक्षा का संबंध राष्ट्रीयता से जुड़ गया है। छात्र बताते हैं कि वे अब खुद को कर्फ्यू

द साउथ एशियन टाइम्स में बांग्लादेश स्थित राजनीतिक और रक्षा विश्लेषक एम. ए. हुसैन ने लिखा, "स्थिति को और गंभीर बनाने वाला पहलू इसका समय है। बांग्लादेश बढ़ती राजनीतिक हिंसा के बीच राष्ट्रीय चुनाव की ओर बढ़ रहा है। कानून व्यवस्था की मौजूदगी बढ़ी है, लेकिन बयानबाजी भी तेज हुई है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का दावा है कि व्यवस्था नियंत्रण में है, अपराध दर स्थिर है और विदेशियों पर कोई संगठित खतरा नहीं है। ये दावे आंकड़ों के लिहाज से सही हो सकते हैं, लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से अपर्याप्त हैं।"

उन्होंने आगे लिखा, "भारतीय हिंदू छात्रों के लिए चिंता और भी गहरी है। हसीना की विदाई के बाद धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हमलों की खबरें बढ़ी हैं। ढाका का कहना है कि ये घटनाएं राजनीतिक हैं, सांप्रदायिक नहीं। लेकिन उस छात्र को इससे कोई दिलासा नहीं मिलता, जिसकी पहचान सामने आते ही परीक्षक का लहजा सख्त हो जाता है। राजनीति में मंशा से ज्यादा असर मायने रखता है।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय छात्र बांग्लादेशी संस्थानों को न केवल ट्यूशन फीस के रूप में राजस्व देते हैं, बल्कि शैक्षणिक आदान-प्रदान और आपसी सद्भावना को भी बढ़ावा देते हैं, ऐसे में दांव काफी ऊंचे हैं।

शिक्षा को आम तौर पर राजनीति के तूफानों से अलग, एक निष्पक्ष क्षेत्र माना जाता है। लेकिन आज के बांग्लादेश में यह सुरक्षा परत दरकती नजर आ रही है। डिग्रियां अटक रही हैं, भविष्य अनिश्चित हो गया है और अनिश्चितता के माहौल में छात्रों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

Point of View

NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

बांग्लादेश में भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर क्या चिंताएं हैं?
भारतीय छात्रों के लिए बांग्लादेश में असुरक्षा की भावना बढ़ी है, विशेषकर राजनीतिक हिंसा और सांप्रदायिक घटनाओं के कारण।
क्या बांग्लादेश में पढ़ाई जारी रखना सुरक्षित है?
हालांकि बांग्लादेश में पढ़ाई के लिए पहले सुरक्षित माना जाता था, वर्तमान राजनीतिक स्थिति इसे चुनौतीपूर्ण बना रही है।
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