क्या पाकिस्तान में सिंधी नेताओं की जबरन गुमशुदगी पर संयुक्त राष्ट्र को हस्तक्षेप करना चाहिए?

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क्या पाकिस्तान में सिंधी नेताओं की जबरन गुमशुदगी पर संयुक्त राष्ट्र को हस्तक्षेप करना चाहिए?

सारांश

क्या पाकिस्तान में सिंधी नेताओं की जबरन गुमशुदगी पर संयुक्त राष्ट्र को हस्तक्षेप करना चाहिए? शाफी बुरफ़त का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन मामलों पर ध्यान देना चाहिए।

Key Takeaways

  • सिंधी कार्यकर्ताओं की जबरन गुमशुदगी का मुद्दा गंभीर है।
  • संयुक्त राष्ट्र को इस पर हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।
  • पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है।

बर्लिन, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जेए सिंध मुत्तहिदा महाज़ (जेएसएमएम) के अध्यक्ष शाफी बुरफ़त ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे जबरन लापता किए गए सभी सिंधी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के मामलों पर तत्काल संज्ञान लें और पाकिस्तान की सेना व खुफिया एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराएं।

शाफी बुरफ़त ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियां पूरी दंडमुक्ति के साथ काम कर रही हैं और शांतिपूर्ण राजनीतिक संघर्ष में लगे सिंधी कार्यकर्ताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कई कार्यकर्ताओं को अमानवीय यातनाओं, लंबे समय तक अवैध हिरासत, जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं का शिकार बनाया गया है।

बुरफ़त के अनुसार, सैकड़ों सिंधी कार्यकर्ता अब भी गुप्त हिरासत और यातना केंद्रों में बंद हैं, जहां उन्हें बिना किसी न्यायिक वारंट, औपचारिक आरोप या कानूनी प्रक्रिया के रखा गया है।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “पाकिस्तान एक अस्वाभाविक, सत्तावादी और सैन्यीकृत राज्य में बदल चुका है, जहां ऐतिहासिक राष्ट्रों को धर्म के राजनीतिक दुरुपयोग और एक केंद्रीकृत, गैर-जवाबदेह सैन्य व्यवस्था के जरिए दबाया गया है। सिंध में इसका परिणाम सुनियोजित राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और राष्ट्रीय पहचान के दमन के रूप में सामने आया है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम, सिंधी राष्ट्र, इस दमनकारी व्यवस्था को पूरी तरह खारिज करते हैं और ऐसे राज्य से मुक्ति की मांग करते हैं जो जेए सिंध मुत्तहिदा महाज़ जैसे धर्मनिरपेक्ष और राष्ट्रीय राजनीतिक आंदोलनों को अपराधी ठहराता है, जबकि धार्मिक उग्रवाद, आतंकी नेटवर्क, नस्लवाद और सामंती ताकतों को संरक्षण देता है।”

सिंधी नेता ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को औपचारिक रूप से सूचित किया कि इजाज़ गाहो, सरवेच नोहेनी, सोहेल भट्टी, पठान खान ज़ुहरानी और सरवेच सरगानी सहित कई सिंधी राजनीतिक कार्यकर्ता अब भी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों की अवैध हिरासत में हैं।

उन्होंने बताया कि इन कार्यकर्ताओं के परिवार, माता-पिता, जीवनसाथी, बच्चे और भाई-बहन पूरी अनिश्चितता में जी रहे हैं और उन्हें यह तक नहीं पता कि उनके प्रियजन जीवित हैं या मार दिए गए हैं।

बुरफ़त ने कहा, “ये गिरफ्तारियां और जबरन गुमशुदगियां नैतिक मूल्यों, मानवीय गरिमा के सिद्धांतों, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों और मानवीय कानून का घोर उल्लंघन हैं।”

उन्होंने वैश्विक समुदाय से मांग की कि जबरन गुमशुदगी के शिकार लोगों के ठिकानों का खुलासा कराया जाए और उनकी सुरक्षित व बिना शर्त रिहाई सुनिश्चित की जाए।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सिंधी लोगों का दर्द इस बात से और बढ़ जाता है कि शक्तिशाली देश मानवाधिकार, न्याय और उत्पीड़ित राष्ट्रों के अस्तित्व की बजाय “रणनीतिक हितों” को प्राथमिकता देते हुए पाकिस्तान को राजनीतिक, सैन्य और कूटनीतिक समर्थन देते रहते हैं।

बुरफ़त ने कहा, “यह मिलीभगत पाकिस्तान को अपने अपराध जारी रखने की छूट देती है और उसे वैश्विक मंच पर संरक्षण व वैधता प्रदान करती है। जिस राज्य पर सुनियोजित जबरन गुमशुदगी और राजनीतिक दमन के आरोप हों, उसका ‘साझेदार’ बना रहना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नैतिक विफलता है। यह केवल सिंध के लिए त्रासदी नहीं, बल्कि वैश्विक अंतरात्मा के लिए भी गहरी शर्म की बात है।”

Point of View

यह मुद्दा केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों और न्याय का भी सवाल है। हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि कैसे एक राष्ट्र अपने नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है।
NationPress
01/01/2026

Frequently Asked Questions

शाफी बुरफ़त कौन हैं?
वे जेए सिंध मुत्तहिदा महाज़ के अध्यक्ष हैं और सिंधी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने क्या किया?
संयुक्त राष्ट्र ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, लेकिन बुरफ़त ने उनकी मदद की अपील की है।
क्या पाकिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है?
हाँ, कई सिंधी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की जबरन गुमशुदगी और यातनाएं इस बात का स्पष्ट उदाहरण हैं।
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