पाकिस्तान में हिंदू शाही कालीन किला उपेक्षा-अतिक्रमण से खंडहर, 30% संरचना नष्ट
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान में हिंदू शाही काल से जुड़ा एक सदियों पुराना ऐतिहासिक किला उपेक्षा, अतिक्रमण और पर्यावरणीय क्षति के चलते तेज़ी से खंडहर में तब्दील हो रहा है। इस्लामाबाद से लगभग 40 किलोमीटर दूर सोआन नदी और पोठोहार क्षेत्र की पहाड़ियों के बीच स्थित यह धरोहर पाकिस्तान के 1975 के प्राचीन स्मारक संरक्षण कानून के तहत संरक्षित है, इसके बावजूद इसकी हालत दिनोंदिन बिगड़ रही है।
किले का ऐतिहासिक महत्व
इतिहासकारों के अनुसार, किले की मूल संरचना हिंदू शाही काल की मानी जाती है, जबकि बाद में 10वीं से 15वीं शताब्दी के बीच गाखड़ जनजाति ने इसका विस्तार किया। यह किला कभी भारतीय उपमहाद्वीप में आने-जाने वाले प्रमुख मार्गों की निगरानी के लिए एक रणनीतिक चौकी के रूप में इस्तेमाल किया जाता था और इसे पोठोहार क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है।
मौजूदा हालत: झाड़ियाँ, पशु और प्लास्टिक कचरा
रिपोर्टों के अनुसार, किले की दीवारों और प्रवेश द्वारों पर झाड़ियाँ और जंगली वनस्पतियाँ उग आई हैं। खंडहरों के बीच पशु घूमते दिखाई देते हैं, और आसपास प्लास्टिक कचरा तथा मानवीय गतिविधियों के निशान साफ़ नज़र आते हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने किले की बाहरी दीवारों के पास छोटी-छोटी खेती तक शुरू कर दी है, जिससे अतिक्रमण की समस्या और गहरा गई है।
पुरातत्व विभाग की चेतावनी
पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक अब्दुल गफूर लोन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक प्रभावों के कारण यह संरचना लगातार कमज़ोर होती जा रही है। उन्होंने बताया कि 2023 में हुए सर्वेक्षण के दौरान केवल दीवारों पर उगी वनस्पतियों को हटाने में ही लगभग एक वर्ष का समय लग गया था।
लोन के मुताबिक़, किले की 20 से 30 प्रतिशत संरचना पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संरक्षण और मरम्मत के कार्य में और देरी हुई, तो नुकसान की रफ़्तार और तेज़ हो सकती है।
किले के भीतर बसी आबादी
वर्तमान में किले के परिसर और उसके आसपास क़रीब 25 परिवार निवास कर रहे हैं, जिनमें गाखड़ समुदाय के लोग भी शामिल हैं। उनका दावा है कि उनका रिश्ता उसी ऐतिहासिक जनजाति से है, जिसने कभी इस किले का विस्तार किया था।
27 वर्षीय स्थानीय निवासी सुब्हान कियानी ने कहा कि यह किला उनकी पहचान और विरासत का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इलाक़े में न स्कूल है, न अस्पताल और न ही ठीक-ठाक सड़क; सोआन नदी पर स्थायी पुल न होने से लोगों को आवाजाही में भारी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं।
क्या होगा आगे
पाकिस्तानी अधिकारियों ने आगाह किया है कि यदि पुनरुद्धार और संरक्षण कार्य जल्द शुरू नहीं हुआ, तो यह ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो सकती है। गौरतलब है कि यह दक्षिण एशिया में हिंदू शाही कालीन उन गिनी-चुनी संरचनाओं में से है, जिनके अवशेष आज भी ज़मीन पर मौजूद हैं — और इनके लुप्त होने का अर्थ होगा क्षेत्र की एक पूरी सभ्यतागत कड़ी का मिट जाना।