19 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पाकिस्तान में हिंदू शाही कालीन किला उपेक्षा-अतिक्रमण से खंडहर, 30% संरचना नष्ट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पाकिस्तान में हिंदू शाही कालीन किला उपेक्षा-अतिक्रमण से खंडहर, 30% संरचना नष्ट

सारांश

इस्लामाबाद से 40 किलोमीटर दूर हिंदू शाही काल का एक सदियों पुराना किला, जिसे बाद में गाखड़ जनजाति ने विस्तारित किया, उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण खंडहर में बदल रहा है। पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग के मुताबिक़ 30% तक संरचना नष्ट हो चुकी है और संरक्षण में देरी इसे हमेशा के लिए मिटा सकती है।

मुख्य बातें

हिंदू शाही कालीन यह किला इस्लामाबाद से लगभग 40 किमी दूर पोठोहार क्षेत्र में स्थित है।
किले का विस्तार 10वीं से 15वीं शताब्दी के बीच गाखड़ जनजाति ने किया था।
पाकिस्तान के 1975 प्राचीन स्मारक संरक्षण कानून के बावजूद धरोहर उपेक्षा का शिकार है।
पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक अब्दुल गफूर लोन के अनुसार 20–30% संरचना नष्ट हो चुकी है।
किले के परिसर में लगभग 25 परिवार रह रहे हैं, बाहरी दीवारों के पास खेती तक हो रही है।

पाकिस्तान में हिंदू शाही काल से जुड़ा एक सदियों पुराना ऐतिहासिक किला उपेक्षा, अतिक्रमण और पर्यावरणीय क्षति के चलते तेज़ी से खंडहर में तब्दील हो रहा है। इस्लामाबाद से लगभग 40 किलोमीटर दूर सोआन नदी और पोठोहार क्षेत्र की पहाड़ियों के बीच स्थित यह धरोहर पाकिस्तान के 1975 के प्राचीन स्मारक संरक्षण कानून के तहत संरक्षित है, इसके बावजूद इसकी हालत दिनोंदिन बिगड़ रही है।

किले का ऐतिहासिक महत्व

इतिहासकारों के अनुसार, किले की मूल संरचना हिंदू शाही काल की मानी जाती है, जबकि बाद में 10वीं से 15वीं शताब्दी के बीच गाखड़ जनजाति ने इसका विस्तार किया। यह किला कभी भारतीय उपमहाद्वीप में आने-जाने वाले प्रमुख मार्गों की निगरानी के लिए एक रणनीतिक चौकी के रूप में इस्तेमाल किया जाता था और इसे पोठोहार क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है।

मौजूदा हालत: झाड़ियाँ, पशु और प्लास्टिक कचरा

रिपोर्टों के अनुसार, किले की दीवारों और प्रवेश द्वारों पर झाड़ियाँ और जंगली वनस्पतियाँ उग आई हैं। खंडहरों के बीच पशु घूमते दिखाई देते हैं, और आसपास प्लास्टिक कचरा तथा मानवीय गतिविधियों के निशान साफ़ नज़र आते हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने किले की बाहरी दीवारों के पास छोटी-छोटी खेती तक शुरू कर दी है, जिससे अतिक्रमण की समस्या और गहरा गई है।

पुरातत्व विभाग की चेतावनी

पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक अब्दुल गफूर लोन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक प्रभावों के कारण यह संरचना लगातार कमज़ोर होती जा रही है। उन्होंने बताया कि 2023 में हुए सर्वेक्षण के दौरान केवल दीवारों पर उगी वनस्पतियों को हटाने में ही लगभग एक वर्ष का समय लग गया था।

लोन के मुताबिक़, किले की 20 से 30 प्रतिशत संरचना पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संरक्षण और मरम्मत के कार्य में और देरी हुई, तो नुकसान की रफ़्तार और तेज़ हो सकती है।

किले के भीतर बसी आबादी

वर्तमान में किले के परिसर और उसके आसपास क़रीब 25 परिवार निवास कर रहे हैं, जिनमें गाखड़ समुदाय के लोग भी शामिल हैं। उनका दावा है कि उनका रिश्ता उसी ऐतिहासिक जनजाति से है, जिसने कभी इस किले का विस्तार किया था।

27 वर्षीय स्थानीय निवासी सुब्हान कियानी ने कहा कि यह किला उनकी पहचान और विरासत का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इलाक़े में न स्कूल है, न अस्पताल और न ही ठीक-ठाक सड़क; सोआन नदी पर स्थायी पुल न होने से लोगों को आवाजाही में भारी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं।

क्या होगा आगे

पाकिस्तानी अधिकारियों ने आगाह किया है कि यदि पुनरुद्धार और संरक्षण कार्य जल्द शुरू नहीं हुआ, तो यह ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो सकती है। गौरतलब है कि यह दक्षिण एशिया में हिंदू शाही कालीन उन गिनी-चुनी संरचनाओं में से है, जिनके अवशेष आज भी ज़मीन पर मौजूद हैं — और इनके लुप्त होने का अर्थ होगा क्षेत्र की एक पूरी सभ्यतागत कड़ी का मिट जाना।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर हिंदू और बौद्ध-कालीन धरोहरों के लिए वही प्राथमिकता शायद ही दिखती है जो मुग़ल स्थलों को मिलती है। 30% संरचना का पहले ही ढह जाना और सर्वेक्षण में महज़ झाड़ियाँ हटाने में एक साल लगना — यह संसाधन की कमी से ज़्यादा प्राथमिकता की कमी का संकेत है। यदि पुनरुद्धार में और देरी हुई, तो यह दक्षिण एशिया की साझा विरासत का एक और अपूरणीय नुक़सान होगा।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान का यह हिंदू शाही कालीन किला कहाँ स्थित है?
यह किला इस्लामाबाद से लगभग 40 किलोमीटर दूर सोआन नदी और पोठोहार क्षेत्र की पहाड़ियों से घिरे एक पठारी इलाक़े में स्थित है। यह कभी भारतीय उपमहाद्वीप के प्रमुख मार्गों की निगरानी के लिए रणनीतिक चौकी के रूप में इस्तेमाल होता था।
किले की मौजूदा हालत कितनी ख़राब है?
पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक अब्दुल गफूर लोन के अनुसार, किले की 20 से 30 प्रतिशत संरचना पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुकी है। दीवारों पर झाड़ियाँ उग आई हैं, पशु घूमते हैं और आसपास प्लास्टिक कचरा तथा अतिक्रमण के निशान साफ़ दिखाई देते हैं।
किले का निर्माण और विस्तार किसने किया था?
इतिहासकारों का मानना है कि किले की मूल संरचना हिंदू शाही काल की है। बाद में 10वीं से 15वीं शताब्दी के बीच गाखड़ जनजाति ने इसका विस्तार किया, और इसी समुदाय के कुछ परिवार आज भी किले के परिसर में निवास करते हैं।
क्या यह किला किसी क़ानून के तहत संरक्षित है?
हाँ, यह किला पाकिस्तान के 1975 के प्राचीन स्मारक संरक्षण कानून के तहत संरक्षित श्रेणी में आता है। हालाँकि, क़ानूनी संरक्षण के बावजूद ज़मीनी स्तर पर अतिक्रमण, उपेक्षा और जलवायु प्रभावों से इसे लगातार नुक़सान हो रहा है।
अधिकारियों ने आगे क्या चेतावनी दी है?
पाकिस्तानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि पुनरुद्धार और संरक्षण का काम जल्द शुरू नहीं हुआ, तो यह ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो सकती है। उपनिदेशक लोन के अनुसार, देरी होने पर नुक़सान की रफ़्तार और तेज़ हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले