पाकिस्तान में 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब के विध्वंस पर भारत ने की कड़ी निंदा, जांच और बहाली की मांग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 1 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के शेखूपुरा जिले के फर्रुखाबाद में स्थित 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब के एक हिस्से को गिराए जाने की खबरों पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई। मंत्रालय ने इसे 'बेहद निंदनीय और जानबूझकर की गई तोड़फोड़' करार देते हुए पाकिस्तान सरकार से तत्काल जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
मुख्य घटनाक्रम
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को इस ऐतिहासिक सिख धार्मिक स्थल के विध्वंस की 'बेहद दुखद खबरें' मिली हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुद्वारे के हिस्सों को नुकसान पहुँचाया जाना और स्थानीय अधिकारियों अथवा इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) की ओर से कोई ठोस कदम न उठाया जाना 'गंभीर चिंता का विषय' है।
जायसवाल ने कहा, 'हम इस सम्मानित सिख धार्मिक स्थल के खिलाफ की गई इस बेहद निंदनीय और जानबूझकर की गई तोड़फोड़ की कड़ी निंदा करते हैं।'
भारत की माँगें
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार से तीन स्पष्ट माँगें रखी हैं — पहली, मामले की शीघ्र जांच; दूसरी, इस 'शर्मनाक घटना' के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई; और तीसरी, गिराए गए हिस्सों का जल्द से जल्द पुनर्निर्माण और बहाली। प्रवक्ता ने यह भी आग्रह किया कि पाकिस्तान अपने अल्पसंख्यक समुदायों और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
व्यापक पृष्ठभूमि: यह पहली घटना नहीं
विदेश मंत्रालय ने रेखांकित किया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले भी पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाए जाने की अनेक घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान में सिख, हिंदू और ईसाई समुदायों के धार्मिक स्थलों पर हमलों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी दर्ज की हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं और अल्पसंख्यक अधिकारों का मुद्दा द्विपक्षीय वार्ता में बार-बार उठता रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
जायसवाल ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया कि वह 'देश में जारी धार्मिक असहिष्णुता और सांप्रदायिक हिंसा के माहौल को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ETPB जैसी जिम्मेदार संस्थाओं की निष्क्रियता भी उतनी ही चिंताजनक है जितनी स्वयं विध्वंस की घटना।
आगे क्या
भारत ने औपचारिक रूप से पाकिस्तान से जवाब की अपेक्षा की है। सिख समुदाय के संगठनों और मानवाधिकार समूहों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि पाकिस्तान सरकार इस माँग पर क्या कदम उठाती है और क्या गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब की बहाली का कोई ठोस आश्वासन मिलता है।