हूती का जाफा पर मिसाइल हमले का दावा, लाल सागर में इजरायली जहाजों पर पूर्ण प्रतिबंध
सारांश
मुख्य बातें
यमन के हूती समूह ने 8 जून 2026 को दावा किया कि उसने जाफा स्थित इजरायली ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, और साथ ही लाल सागर में इजरायल से जुड़े सभी समुद्री नेविगेशन पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। हूती प्रवक्ता याह्या सरिया ने टेलीविजन पर दिए बयान में कहा कि यह ऑपरेशन अपने मकसद में कामयाब रहा।
हमले का विवरण और प्रतिबंध की घोषणा
हूती प्रवक्ता याह्या सरिया ने टीवी संबोधन में कहा कि विद्रोहियों ने जाफा में लक्षित ठिकानों पर मिसाइल दागे और ऑपरेशन सफल रहा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि लाल सागर में चलने वाले इजरायली जहाजों को घोषणा के क्षण से ही एक वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा। सरिया ने चेतावनी दी कि हूती अपने सहयोगी गुटों के साथ मिलकर इजरायल के खिलाफ अभियान को और तेज कर सकते हैं।
क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
ईरान और इजरायल के बीच पहले से जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है। इजरायल ने सोमवार सुबह कहा कि उसकी वायु सेना ने पूर्व में हुए ईरानी मिसाइल हमलों के जवाब में पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद ईरान ने भी इजरायल की ओर अतिरिक्त मिसाइलें दागीं। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव का दौर जारी है।
हूती की भूमिका और पृष्ठभूमि
हूती समूह ईरान के सबसे करीबी क्षेत्रीय सहयोगियों में से एक माना जाता है। गौरतलब है कि इस समूह ने 2014 के अंत से यमन की राजधानी सना और देश के अधिकांश उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण बनाए रखा है। हूती प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जब तक यमन और उसके सहयोगी गुटों के खिलाफ हमले और नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक उनके अभियान भी जारी रहेंगे।
ट्रंप की प्रतिक्रिया
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर लिखा कि इजरायल और ईरान दोनों तत्काल युद्धविराम चाहते हैं और शांति वार्ता आगे बढ़ रही है। उन्होंने लिखा, 'मूर्खता या अज्ञानता शांति की राह में बाधा न बने।' ट्रंप ने यह भी कहा कि अंतिम समझौता होने तक नाकेबंदी पूरी तरह लागू और प्रभावी बनी रहेगी।
आगे क्या होगा
लाल सागर पर हूती के इस प्रतिबंध से वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जो पहले से ही इस क्षेत्र में अस्थिरता के कारण प्रभावित हैं। विश्लेषकों के अनुसार, ईरान-इजरायल संघर्ष के और गहराने के साथ हूती की भागीदारी इस संकट को बहुआयामी बना रही है। क्षेत्र में शांति की संभावनाएँ अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं।