इंडोनेशिया भूकंप में 70 की मौत पर भारत ने जताया शोक, MEA ने हर संभव मदद का दिया भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार, 18 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित द्विसाप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में इंडोनेशिया के विनाशकारी भूकंप में हुई मौतों पर गहरा शोक व्यक्त किया और स्पष्ट किया कि भारत राहत एवं बचाव कार्यों में हर संभव सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इंडोनेशियाई अधिकारियों के अनुसार, 15 अगस्त को आए इस भूकंप में अब तक 70 लोगों की मौत हो चुकी है और 132 लोग घायल हैं।
भूकंप का विवरण और तबाही का दायरा
7.7 तीव्रता का यह भूकंप 15 अगस्त को इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में आया था। इंडोनेशिया की राष्ट्रीय खोज और बचाव एजेंसी के ऑपरेशन डायरेक्टर ब्रामंत्यो ने बताया कि 132 घायलों में से 40 गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि 92 लोगों को मामूली चोटें आई हैं। प्रांत भर में स्थापित राहत केंद्रों में 5,000 से अधिक लोग विस्थापित होकर रह रहे हैं।
भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'इंडोनेशिया में जबरदस्त भूकंप आया है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। बहुत से लोग बेघर हो गए हैं। हम इस त्रासदी से बहुत दुखी हैं और जान गंवाने वाले लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'इस मुश्किल घड़ी में भारत इंडोनेशिया के साथ खड़ा है और हम देश में राहत और बचाव कार्यों में हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'
आफ्टरशॉक और बचाव अभियान
मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भू-भौतिकी एजेंसी ने मंगलवार दोपहर 3 बजे तक फ्लोरेस क्षेत्र में 2,357 आफ्टरशॉक दर्ज किए। इनमें सबसे तेज झटका 6.2 तीव्रता का था, 24 आफ्टरशॉक 5 से अधिक तीव्रता के रहे और 72 झटके स्थानीय निवासियों ने महसूस किए। लापता लोगों की खोज में कोई नई जानकारी न मिलने पर बचाव दल अब राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के नेतृत्व में रिकवरी ऑपरेशन पर केंद्रित हो गए हैं।
राहत कार्यों की स्थिति
खोज और बचाव एजेंसी ने दूर-दराज के इलाकों में मेडिकल स्टाफ पहुँचाने और उपचार की जरूरत वाले निवासियों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब इंडोनेशिया, जो 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, पहले से ही बार-बार आने वाले भूकंपों से जूझता रहा है — गौरतलब है कि यह देश दुनिया के सर्वाधिक भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। आने वाले दिनों में राहत और पुनर्वास कार्यों की गति और दायरा ही यह तय करेगा कि प्रभावित आबादी कितनी जल्दी सामान्य जीवन में लौट पाती है।