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भारत-ईयू व्यापार समझौता पूरे अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग सिस्टम को बदलेगा: लिथुआनिया राजदूत डायना मिकेविचिएने

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भारत-ईयू व्यापार समझौता पूरे अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग सिस्टम को बदलेगा: लिथुआनिया राजदूत डायना मिकेविचिएने

सारांश

लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने का दावा है कि भारत-ईयू व्यापार समझौता सिर्फ दो पक्षों का सौदा नहीं — यह पूरे अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग सिस्टम को बदलने की क्षमता रखता है। 100 साल पुराने बौद्धिक नाते और गांधीवादी प्रेरणा के हवाले से उन्होंने भारत-बाल्टिक साझेदारी को नई परिभाषा दी।

मुख्य बातें

लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने ने 23 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में भारत-ईयू व्यापार समझौते को 'गेम-चेंजर' बताया।
समझौता व्यापार के साथ-साथ तकनीक, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क को भी मजबूत करेगा।
भारत और बाल्टिक देशों के बीच लगभग 100 वर्षों के बौद्धिक आदान-प्रदान का दर्ज इतिहास है।
महात्मा गांधी के अहिंसक दृष्टिकोण को बाल्टिक स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बताया गया।
37 साल पहले के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को सत्य की शक्ति के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया।

भारत में लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने ने 23 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में कहा कि प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौता केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग सिस्टम को नए सिरे से परिभाषित करेगा। उन्होंने इस समझौते को 'गेम-चेंजर' बताते हुए कहा कि यह तकनीक, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क को भी नई ऊँचाई देगा।

समझौते पर राजदूत का पक्ष

राजदूत मिकेविचिएने ने कहा, "लिथुआनिया का मानना है कि यह एक गेम-चेंजिंग एग्रीमेंट है। यह न सिर्फ व्यापार को बढ़ावा देगा बल्कि तकनीक, सुरक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में लेन-देन को भी मजबूत करेगा, जिसमें लोगों के बीच कनेक्शन भी शामिल हैं। इसलिए, यह न सिर्फ द्विपक्षीय संबंध के लिए बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग सिस्टम के लिए भी एक गेम-चेंजर है।"

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तकनीकी साझेदारी और तकनीकी लेन-देन का विकास भारत-लिथुआनिया संबंधों के इस नए चरण का अनिवार्य हिस्सा है। उनके अनुसार, दोनों देश मजबूत व्यापार और आर्थिक सहयोग बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

सौ वर्षों का बौद्धिक नाता

राजदूत ने भारत और बाल्टिक देशोंएस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया — के बीच के ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "लिथुआनिया और अन्य बाल्टिक देशों और भारत के लोगों के बीच लगभग 100 वर्षों के बौद्धिक आदान-प्रदान का एक दर्ज इतिहास है। ये आदान-प्रदान उस समय से हैं जब भारतीय नेता उभरते राष्ट्र को स्वतंत्रता की ओर ले जाने के सर्वोत्तम तरीकों की तलाश कर रहे थे।"

उन्होंने जोड़ा कि इंटरनेट या विमानन के बिना भी विचार फैले और लोगों ने सफर किया, जिसने दोनों क्षेत्रों के संबंधों की नींव को मजबूत किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत और ईयू के बीच व्यापार वार्ता निर्णायक दौर में है।

गांधीवादी प्रेरणा और बाल्टिक स्वतंत्रता संग्राम

एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान राजदूत मिकेविचिएने ने 23 अगस्त की तारीख के महत्व को रेखांकित किया, जो बाल्टिक देशों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का अहिंसक दृष्टिकोण बाल्टिक स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरणा के प्रमुख स्रोतों में से एक था।

उन्होंने कहा, "बाल्टिक वे और बाल्टिक राज्यों का स्वतंत्रता संग्राम, सुदूर उत्तर में गांधीवादी सिद्धांतों का एक उल्लेखनीय प्रतिबिंब था।" उन्होंने यह भी कहा कि 37 साल पहले किए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों ने यह सिद्ध किया कि सत्य सबसे शक्तिशाली हथियार है और अंततः उसी की जीत होती है।

शांति और सक्रिय प्रतिरोध का संदेश

राजदूत ने कहा कि हम संघर्षों और आक्रामक युद्धों से भरी दुनिया में रह रहे हैं। उनके अनुसार, शांतिपूर्ण प्रतिरोध का अर्थ केवल बुराई को अस्वीकार करना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से समस्याओं को हल करना, आक्रामकता का विरोध करना और मानवीय बंधन को इस प्रकार मजबूत करना है कि आक्रमणकारी के पास कोई तर्क ही न बचे।

इस कार्यक्रम में डॉ. अन्नामलाई और दिल्ली सरकार के महासचिव डॉ. महेश सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। आने वाले समय में भारत-ईयू व्यापार वार्ता की प्रगति और इसके क्रियान्वयन पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

कृषि और डेटा संप्रभुता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दोनों पक्षों की गहरी असहमतियों को पार कर पाएगा। भारत-बाल्टिक ऐतिहासिक नाते की भावनात्मक अपील प्रेरक है, परंतु व्यापार वार्ताएँ भावनाओं से नहीं, टैरिफ लाइनों और बाज़ार पहुँच की शर्तों से तय होती हैं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ईयू व्यापार समझौता क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, तकनीक और निवेश पर टैरिफ व बाधाएँ कम करने का लक्ष्य रखता है। लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने के अनुसार, यह केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग सिस्टम के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
लिथुआनिया की राजदूत ने भारत-ईयू समझौते पर क्या कहा?
राजदूत डायना मिकेविचिएने ने 23 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में कहा कि यह समझौता व्यापार के साथ-साथ तकनीक, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क को भी मजबूत करेगा। उनके अनुसार, यह न सिर्फ भारत-ईयू द्विपक्षीय संबंधों के लिए, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग सिस्टम के लिए परिवर्तनकारी होगा।
भारत और बाल्टिक देशों के बीच ऐतिहासिक संबंध कैसे रहे हैं?
राजदूत मिकेविचिएने के अनुसार, भारत और बाल्टिक देशों — एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया — के बीच लगभग 100 वर्षों के बौद्धिक आदान-प्रदान का दर्ज इतिहास है। यह संबंध उस दौर से है जब भारतीय नेता स्वतंत्रता की दिशा तलाश रहे थे और विचारों का आदान-प्रदान इंटरनेट या विमानन के बिना भी जारी रहा।
बाल्टिक स्वतंत्रता आंदोलन पर गांधी के विचारों का क्या प्रभाव था?
लिथुआनिया की राजदूत ने कहा कि महात्मा गांधी का अहिंसक दृष्टिकोण बाल्टिक स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरणा के प्रमुख स्रोतों में से एक था। उन्होंने इसे 'सुदूर उत्तर में गांधीवादी सिद्धांतों का उल्लेखनीय प्रतिबिंब' बताया।
23 अगस्त का बाल्टिक देशों के लिए क्या महत्व है?
23 अगस्त बाल्टिक देशों — एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया — के लिए ऐतिहासिक महत्व का दिन है। राजदूत मिकेविचिएने ने इस अवसर पर 37 साल पहले हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्होंने सत्य की शक्ति और एकजुट मानवीय प्रतिरोध की मिसाल कायम की।
राष्ट्र प्रेस
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