20 अगस्त 2026
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भारत-ईयू एफटीए 'मदर ऑफ ऑल डील्स': लिथुआनिया राजदूत, रूस को यूक्रेन से पीछे हटना होगा

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भारत-ईयू एफटीए 'मदर ऑफ ऑल डील्स': लिथुआनिया राजदूत, रूस को यूक्रेन से पीछे हटना होगा

सारांश

लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने ने भारत-ईयू एफटीए को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' बताया और इस वर्ष अंत तक हस्ताक्षर की उम्मीद जताई। साथ ही उन्होंने रूस पर यूक्रेन से पीछे हटने का आह्वान किया और गांधी-कैलनबाख के ऐतिहासिक जुड़ाव के ज़रिए लिथुआनिया की भारत के प्रति गहरी सांस्कृतिक आत्मीयता को रेखांकित किया।

मुख्य बातें

लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने ने 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में भारत-ईयू एफटीए, रूस-यूक्रेन संघर्ष और गांधी से जुड़ाव पर विचार साझा किए।
भारत-ईयू एफटीए को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' बताया गया; इस वर्ष के अंत तक हस्ताक्षर की उम्मीद।
लिथुआनिया जनवरी-जून 2027 में ईयू परिषद की अध्यक्षता करेगा और एफटीए लागू करने में अहम भूमिका निभाएगा।
लिथुआनिया ने रूस-यूक्रेन युद्ध को आक्रामकता और साम्राज्यवाद का युद्ध बताया; रूस से पीछे हटने की माँग।
गांधी के करीबी मित्र हर्मन कैलनबाख लिथुआनिया के लिटवाक यहूदी थे — दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध।
लिथुआनिया ने राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय को लिथुआनियाई कलाकार द्वारा बनाई गांधी की पेंटिंग भेंट की।

भारत में लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने ने 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए), रूस-यूक्रेन संघर्ष और महात्मा गांधी से लिथुआनिया के ऐतिहासिक जुड़ाव पर विस्तृत विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत-ईयू एफटीए दोनों पक्षों के लिए एक 'बड़ी जीत' होगी और रूस को अपनी आक्रामकता समाप्त कर यूक्रेन से बिना शर्त पीछे हटना चाहिए।

भारत-ईयू एफटीए: 'मदर ऑफ ऑल डील्स'

राजदूत मिकेविचिएने ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही सुदृढ़ हैं, लेकिन प्रस्तावित एफटीए इन संबंधों को एक नई ऊँचाई पर ले जाएगा। उन्होंने इस समझौते को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' की संज्ञा दी, क्योंकि इसमें वस्तुओं और सेवाओं की पहुँच को उदार बनाते हुए दोनों पक्षों के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा का सावधानीपूर्वक संतुलन बनाया गया है।

राजदूत ने उम्मीद जताई कि इस वर्ष के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। उल्लेखनीय है कि जनवरी से जून 2027 तक लिथुआनिया यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता करेगा और उसी अवधि में यह समझौता लागू एवं प्रभावी हो जाए, इसके लिए लिथुआनिया पूरी कोशिश करेगा।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर लिथुआनिया का स्पष्ट रुख

राजदूत मिकेविचिएने ने कहा कि लिथुआनिया इस संघर्ष को रूस की ओर से यूक्रेन के विरुद्ध आक्रामकता और साम्राज्यवाद का युद्ध मानता है। उनके अनुसार इस संघर्ष का एकमात्र समाधान यह है कि रूस अपनी आक्रामकता समाप्त कर यूक्रेन से पीछे हटे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युद्ध के दौरान कई गंभीर अपराध हुए हैं।

राजदूत ने कहा कि लिथुआनिया की जनता इस मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट है। उनका तर्क है कि यदि यूक्रेन अपनी रक्षा करने में विफल रहा तो भविष्य में यूरोप के अन्य देश भी ऐसी आक्रामकता का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल यूक्रेन पर हमला नहीं, बल्कि समूचे यूरोप पर हमला है और दुनिया को आक्रामकता के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।

भारत-लिथुआनिया द्विपक्षीय संबंध

राजदूत ने बताया कि दोनों देशों ने सहयोग की मजबूत नींव तैयार कर ली है। दोनों देशों के दूतावास पूरी तरह सक्रिय हैं, बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बेहतर हो रहा है और वस्तुओं व सेवाओं के व्यापार में भी लगातार प्रगति दर्ज की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत यूरोपीय देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारियों को नई गहराई दे रहा है।

गांधी और लिथुआनिया का ऐतिहासिक जुड़ाव

राजदूत मिकेविचिएने ने बताया कि लिथुआनिया ने राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के साथ मिलकर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया, जिसका उद्देश्य गांधी और बाल्टिक देशों के ऐतिहासिक संबंधों का सम्मान करना था। इस अवसर पर एक लिथुआनियाई कलाकार द्वारा बनाई गई महात्मा गांधी की पेंटिंग संग्रहालय को भेंट की गई।

उन्होंने एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य साझा किया — महात्मा गांधी के करीबी मित्र हर्मन कैलनबाख लिथुआनिया के लिटवाक यहूदी थे, जिन्होंने गांधी के सत्याग्रह और आत्मनिर्भरता के विचारों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राजदूत ने कहा कि महात्मा गांधी का शांति और अहिंसा का संदेश लिथुआनिया के लिए केवल एक सैद्धांतिक विचार नहीं, बल्कि गहरे सम्मान का विषय है।

आगे क्या

भारत-ईयू एफटीए पर इस वर्ष के अंत तक हस्ताक्षर की उम्मीद के साथ, लिथुआनिया की ईयू परिषद अध्यक्षता (जनवरी-जून 2027) इस समझौते को लागू करने की दिशा में एक निर्णायक कड़ी बन सकती है। राजनयिक और व्यापारिक दोनों मोर्चों पर भारत-लिथुआनिया संबंध नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

न केवल वैचारिक एकजुटता से। भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति और लिथुआनिया के स्पष्ट रुख के बीच की खाई को यह साक्षात्कार उजागर करता है, हालाँकि राजदूत ने इसे सीधे नहीं कहा। एफटीए को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहना उत्साहजनक है, लेकिन भारत-ईयू व्यापार वार्ता दशकों से अटकी रही है — असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी, घोषणा में नहीं।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ईयू एफटीए को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' क्यों कहा गया?
लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' इसलिए कहा क्योंकि इसमें वस्तुओं और सेवाओं की पहुँच को उदार बनाते हुए दोनों पक्षों के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा का संतुलन बनाया गया है। यह भारत और यूरोपीय संघ दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
भारत-ईयू एफटीए पर हस्ताक्षर कब होंगे?
राजदूत मिकेविचिएने ने उम्मीद जताई है कि इस वर्ष के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। लिथुआनिया जनवरी से जून 2027 तक ईयू परिषद की अध्यक्षता करेगा और उसी अवधि में इसे लागू करने की कोशिश करेगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर लिथुआनिया का क्या रुख है?
लिथुआनिया इस युद्ध को रूस की ओर से यूक्रेन के विरुद्ध आक्रामकता और साम्राज्यवाद का युद्ध मानता है। राजदूत के अनुसार एकमात्र समाधान यह है कि रूस अपनी आक्रामकता समाप्त कर यूक्रेन से पीछे हटे और दुनिया को इस आक्रामकता के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।
महात्मा गांधी और लिथुआनिया के बीच ऐतिहासिक संबंध क्या है?
गांधी के करीबी मित्र हर्मन कैलनबाख लिथुआनिया के लिटवाक यहूदी थे, जिन्होंने गांधी के सत्याग्रह और आत्मनिर्भरता के विचारों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी ऐतिहासिक जुड़ाव को सम्मान देने के लिए लिथुआनिया ने राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के साथ मिलकर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया।
भारत और लिथुआनिया के द्विपक्षीय संबंध कैसे हैं?
राजदूत मिकेविचिएने के अनुसार दोनों देशों ने सहयोग की मजबूत नींव तैयार कर ली है। दोनों देशों के दूतावास पूरी तरह सक्रिय हैं, बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बेहतर हो रहा है और वस्तुओं व सेवाओं के व्यापार में निरंतर प्रगति हो रही है।
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