भारत-ईयू एफटीए 'मदर ऑफ ऑल डील्स': लिथुआनिया राजदूत बोलीं — रूस पर दुनिया को एकजुट होना होगा
सारांश
मुख्य बातें
भारत में लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने ने 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों पक्षों के लिए एक 'बड़ी जीत' साबित होगा, और रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि आक्रामकता के विरुद्ध पूरी दुनिया को एकजुट होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि जनवरी 2027 से लिथुआनिया यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता संभालेगा और उस दौरान इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अमलीजामा पहनाने की पूरी कोशिश होगी।
भारत-ईयू एफटीए: 'मदर ऑफ ऑल डील्स'
राजदूत मिकेविचिएने ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार पहले से ही मज़बूत है, लेकिन प्रस्तावित एफटीए इस संबंध को एक नए स्तर पर ले जाएगा। उन्होंने इस समझौते को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' की संज्ञा देते हुए कहा कि इसमें दोनों पक्षों ने वस्तुओं और सेवाओं की पहुँच को उदार बनाने के साथ-साथ अपने-अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाया है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर हो जाएँगे। गौरतलब है कि जनवरी से जून 2027 तक लिथुआनिया यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता करेगा — और राजदूत ने स्पष्ट किया कि उस कार्यकाल में यह समझौता लागू और प्रभावी हो जाए, इसके लिए लिथुआनिया पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर लिथुआनिया का स्पष्ट रुख
राजदूत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को रूस की ओर से यूक्रेन के विरुद्ध आक्रामकता और साम्राज्यवाद का युद्ध बताया। उनके अनुसार इस संघर्ष का एकमात्र समाधान यह है कि रूस अपनी आक्रामकता समाप्त कर यूक्रेन से पीछे हटे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युद्ध के दौरान कई गंभीर अपराध हुए हैं।
मिकेविचिएने ने कहा कि लिथुआनिया की जनता इस मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट है, क्योंकि उनकी मान्यता है कि यदि यूक्रेन अपनी रक्षा नहीं कर पाया तो भविष्य में यूरोप के अन्य देश भी ऐसी आक्रामकता का शिकार हो सकते हैं। उनके शब्दों में, यह केवल यूक्रेन पर नहीं बल्कि पूरे यूरोप पर हमला है, और दुनिया को आक्रामकता के विरुद्ध एकजुट होना चाहिए। लिथुआनिया हर संभव तरीके से यूक्रेन की मदद कर रहा है ताकि वह अपनी रक्षा कर सके।
भारत-लिथुआनिया द्विपक्षीय संबंध
राजदूत ने बताया कि भारत और लिथुआनिया के बीच सहयोग की मज़बूत नींव तैयार हो चुकी है। दोनों देशों के दूतावास पूरी तरह सक्रिय हैं और बहुपक्षीय मंचों पर अच्छा तालमेल है। वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में भी निरंतर प्रगति हो रही है।
गांधी और लिथुआनिया का ऐतिहासिक जुड़ाव
राजदूत ने राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के साथ मिलकर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य महात्मा गांधी और बाल्टिक देशों के ऐतिहासिक संबंधों का सम्मान करना था। इस अवसर पर एक लिथुआनियाई कलाकार द्वारा बनाई गई महात्मा गांधी की पेंटिंग संग्रहालय को भेंट की गई।
मिकेविचिएने ने कहा कि गांधी का शांति और अहिंसा का संदेश लिथुआनिया के लिए केवल सैद्धांतिक विचार नहीं है। उन्होंने एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य की ओर ध्यान दिलाया — गांधी के करीबी मित्र हर्मन कैलनबाख लिथुआनिया के लिटवाक यहूदी थे, जिन्होंने गांधी के सत्याग्रह और आत्मनिर्भरता के विचारों के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-यूरोप संबंध व्यापार, भू-राजनीति और सांस्कृतिक कूटनीति — तीनों मोर्चों पर एक नई गति पकड़ रहे हैं। आने वाले महीनों में एफटीए वार्ता की दिशा और लिथुआनिया की ईयू अध्यक्षता इस साझेदारी की असली परीक्षा होगी।