भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर 2026 के अंत तक हस्ताक्षर संभव: जर्मन राजदूत जैस्पर विक
सारांश
मुख्य बातें
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वर्ष 2026 के अंत से पहले औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। यह संकेत भारत में जर्मनी के राजदूत जैस्पर विक ने 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वार्ता वर्ष की शुरुआत में ही पूरी हो चुकी है और अब हस्ताक्षर की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना प्राथमिकता है।
समझौते की वर्तमान स्थिति
राजदूत जैस्पर विक ने कहा, 'समझौता साल की शुरुआत में पूरा हो गया था और साल के अंत तक इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका प्राथमिक उद्देश्य समझौते की आर्थिक क्षमता को साकार करना और भारतीय तथा जर्मन कंपनियों को इससे मिलने वाले अवसरों का पूरा लाभ दिलाना होगा।
विशेषज्ञों के हवाले से राजदूत ने बताया कि इस समझौते में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की क्षमता है, जो दोनों पक्षों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक लाभ का मार्ग खोल सकता है।
भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी का महत्व
विक ने वर्ष 2000 में स्थापित भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच यह साझेदारी पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई है। उन्होंने वर्तमान अंतरराष्ट्रीय माहौल को 'अप्रत्याशित' बताया, जहाँ देशों के बीच आपसी भरोसा घट रहा है और प्रमुख शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है।
राजदूत ने ज़ोर देकर कहा कि भारत और जर्मनी भरोसे, पूर्वानुमेयता और परस्पर विश्वास जैसे साझा मूल्यों से बँधे हैं, और यही गुण उभरती वैश्विक चुनौतियों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को अपरिहार्य बनाते हैं।
रूसी तेल और अमेरिकी टैरिफ पर स्थिति
रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर भारत पर संभावित अमेरिकी टैरिफ के खतरे को लेकर पूछे गए सवाल पर विक ने कहा कि अमेरिका ने अब तक भारत पर कोई टैरिफ या प्रतिबंध नहीं लगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति को अपने विवेकाधिकार से प्रतिबंध लगाने का अधिकार दिया है, परंतु अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों में टैरिफ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति नीति को संतुलित करने की कोशिश में है।
आम जनता और व्यापार जगत पर असर
यदि भारत-EU FTA पर वर्ष के अंत तक हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो इससे निर्यात-उन्मुख भारतीय उद्योगों — विशेषकर टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद और IT सेवाओं — को यूरोपीय बाज़ार में बेहतर पहुँच मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि EU भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों के बीच वर्तमान में अरबों डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है।
भारत-EU FTA पर बातचीत दो दशकों से अधिक समय से चलती रही है और पहले कई बार ठप हो चुकी है। इस बार समझौते को अंतिम रूप दिए जाने का दावा इसे एक ऐतिहासिक कूटनीतिक उपलब्धि बनाता है — बशर्ते हस्ताक्षर वास्तव में वर्ष के भीतर हों।
क्या होगा आगे
अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि भारत और EU के बीच हस्ताक्षर की तिथि और औपचारिक समारोह कब तय होता है। समझौते के लागू होने के लिए EU संसद और भारतीय संसद, दोनों की मंज़ूरी अपेक्षित होगी। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि क्रियान्वयन की वास्तविक प्रक्रिया हस्ताक्षर के बाद भी महीनों तक जारी रह सकती है।