16 सितंबर 2026
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जी-7 समिट में PM मोदी ने EU नेताओं से की बैठक, FTA पर हस्ताक्षर और IMEC को लेकर बनी सहमति

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जी-7 समिट में PM मोदी ने EU नेताओं से की बैठक, FTA पर हस्ताक्षर और IMEC को लेकर बनी सहमति

सारांश

एवियन जी-7 में पीएम मोदी की EU नेताओं से बैठक महज शिष्टाचार मुलाकात नहीं थी — यह भारत-EU एफटीए के औपचारिक हस्ताक्षर की दिशा में निर्णायक कदम था। साल के अंत तक हस्ताक्षर, आईएमईसी को गति और रक्षा सहयोग विस्तार — तीनों मोर्चों पर ठोस सहमति बनी।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 17 जून 2026 को एवियन, फ्रांस में जी-7 समिट के दौरान EU परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और EU आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से द्विपक्षीय बैठक की।
कोस्टा ने पुष्टि की कि भारत और EU इस वर्ष के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर करेंगे।
एफटीए वार्ता 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में हुए 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान संपन्न हुई थी।
दोनों पक्षों ने आईएमईसी (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर) को आगे बढ़ाने और सुरक्षा-रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
बैठक में विदेश मंत्री एस.
जयशंकर , विदेश सचिव विक्रम मिस्री और NSA अजीत डोभाल भी उपस्थित रहे।
यह जी-7 में भारत की 13वीं भागीदारी है; मोदी लगातार सातवीं बार इस सम्मेलन में शामिल हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जून 2026 को एवियन, फ्रांस में जारी जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (आईएमईसी) को आगे बढ़ाने और आर्थिक संबंधों को और गहरा करने पर महत्वपूर्ण सहमति बनी। मोदी ने इस बैठक को 'बहुत शानदार' करार दिया।

बैठक में क्या हुआ

विदेश मंत्रालय के अनुसार, तीनों नेताओं ने इस वर्ष की शुरुआत में नई दिल्ली में हुए 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन (27 जनवरी) में हुई प्रगति की समीक्षा की। उस सम्मेलन में भारत-ईयू एफटीए वार्ता को ऐतिहासिक रूप से संपन्न घोषित किया गया था, जिसे नेताओं ने 'सभी समझौतों में सबसे बड़ा समझौता' बताया था। इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी उपस्थित रहे।

एफटीए और आईएमईसी पर आगे की राह

एंटोनियो कोस्टा ने स्पष्ट किया कि भारत और ईयू इस वर्ष के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर करेंगे और निवेश समझौते पर भी काम तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ आईएमईसी के ज़रिए बेहतर कनेक्टिविटी के लिए मिलकर काम करेंगे। गौरतलब है कि आईएमईसी परियोजना भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ने की महत्वाकांक्षी पहल है, जो चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का एक विकल्प मानी जाती है।

मोदी और कोस्टा के एक्स पोस्ट

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, 'आज एवियन में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से मिलना बहुत अच्छा रहा। यह भारत-ईयू संबंधों के लिए बहुत अच्छा समय रहा है, क्योंकि हमने मुक्त व्यापार समझौता पूरा कर लिया है। भारत और ईयू का बढ़ता सहयोग आज की दुनिया में शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।' कोस्टा ने एक्स पर जवाब देते हुए लिखा, 'हमने दुनिया के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक को पूरा किया है और अब अपनी प्रतिबद्धताओं को तेजी से पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।'

जी-7 में भारत की भागीदारी का संदर्भ

फ्रांस की अध्यक्षता में एवियन में आयोजित इस जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की यह 13वीं भागीदारी है। प्रधानमंत्री मोदी लगातार सातवीं बार इस वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत अपने पश्चिमी साझेदारों के साथ संबंधों को नई ऊंचाई देने में जुटा है। उल्लेखनीय है कि कोस्टा और वॉन डेर लेयेन इस वर्ष भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि भी रहे थे।

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी संवाद

बैठक के दौरान तीनों नेताओं ने आपसी हित से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-ईयू एफटीए, जो वार्ता के लगभग दो दशकों के बाद संपन्न हुआ है, दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए व्यापार और निवेश के नए द्वार खोल सकता है। आने वाले महीनों में औपचारिक हस्ताक्षर समारोह और क्रियान्वयन की रूपरेखा पर नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा हस्ताक्षर के बाद क्रियान्वयन की होगी — खासकर जब यूरोप खुद व्यापार संरक्षणवाद की लहर से जूझ रहा है। आईएमईसी की घोषणाएँ पहले भी हो चुकी हैं, पर जमीनी प्रगति धीमी रही है; एवियन में बनी सहमति तभी सार्थक होगी जब समयसीमा और वित्तपोषण का खाका सामने आए। यह भी ध्यान देने योग्य है कि मोदी की लगातार सातवीं जी-7 उपस्थिति भारत की बढ़ती वैश्विक साख को दर्शाती है, लेकिन एफटीए से घरेलू उद्योग — खासकर डेयरी और कृषि — पर पड़ने वाले असर पर अभी तक पर्याप्त सार्वजनिक विमर्श नहीं हुआ है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एवियन जी-7 में पीएम मोदी की EU नेताओं से बैठक में क्या तय हुआ?
बैठक में भारत और EU के बीच साल के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर करने, आईएमईसी कॉरिडोर को आगे बढ़ाने और सुरक्षा-रक्षा सहयोग विस्तार पर सहमति बनी। तीनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) कब और कहाँ तय हुआ था?
भारत-EU एफटीए वार्ता 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में हुए 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान संपन्न हुई थी। इसे नेताओं ने 'सभी समझौतों में सबसे बड़ा समझौता' बताया था।
भारत-EU एफटीए पर हस्ताक्षर कब होंगे?
EU परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने एवियन में पुष्टि की कि एफटीए पर हस्ताक्षर इस वर्ष के अंत तक होंगे। निवेश समझौते पर भी काम तेज किया जाएगा।
आईएमईसी (IMEC) क्या है और इसका भारत के लिए क्या महत्व है?
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (आईएमईसी) एक महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी परियोजना है जो भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ेगी। इसे चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के विकल्प के रूप में देखा जाता है और भारत-EU बैठक में इसे गति देने पर सहमति बनी।
जी-7 समिट में भारत की भागीदारी का इतिहास क्या है?
एवियन जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की यह 13वीं भागीदारी है। प्रधानमंत्री मोदी लगातार सातवीं बार इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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