8 अक्टूबर 2026
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फिजी प्री-सीओपी31 बैठक: भूपेंद्र यादव बोले — सकारात्मक नतीजे अंताल्या तक ले जाएगा भारत

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फिजी प्री-सीओपी31 बैठक: भूपेंद्र यादव बोले — सकारात्मक नतीजे अंताल्या तक ले जाएगा भारत

सारांश

फिजी के नाडी में प्री-सीओपी31 वार्ता के समापन पर पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने साफ किया कि भारत इन चर्चाओं की सकारात्मक ऊर्जा को तुर्की के अंताल्या तक ले जाएगा। सीओपी31 से पहले लचीलेपन और आम सहमति का आह्वान करते हुए भारत ने वैश्विक जलवायु बहुपक्षवाद में अपनी सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया।

मुख्य बातें

भूपेंद्र यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को फिजी के नाडी में प्री-सीओपी31 वार्ता के समापन पर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत तुर्की के अंताल्या में होने वाले सीओपी31 में फिजी चर्चाओं के सकारात्मक नतीजे आगे ले जाएगा।
भारत ने सभी पक्षों से अधिक लचीलेपन, व्यावहारिकता और आपसी सम्मान की अपील की।
यादव ने क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और लक्षित समर्थन को बढ़ाने पर ज़ोर दिया।
ऑस्ट्रेलियाई मंत्री और सीओपी31 अध्यक्ष क्रिस बोवेन से यादव की द्विपक्षीय मुलाकात भी हुई।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को फिजी के नाडी में हुई प्री-सीओपी31 वार्ता के समापन पर स्पष्ट किया कि भारत इन चर्चाओं के सकारात्मक नतीजों को तुर्की के अंताल्या में होने वाले सीओपी31 जलवायु शिखर सम्मेलन तक ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत सीओपी31 प्रेसीडेंसी और सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

प्री-सीओपी31 वार्ता का समापन

कई दिनों की गहन द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत के बाद फिजी के नाडी में प्री-सीओपी31 वार्ता गुरुवार, 8 अक्टूबर को औपचारिक रूप से समाप्त हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अगले महीने अंताल्या में होने वाले सीओपी31 सम्मेलन से पहले आम सहमति की ज़मीन तैयार करना था।

यादव ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'फिजी से जाते समय हमारा मकसद बिल्कुल स्पष्ट है और वो इन चर्चाओं की सकारात्मक बातों को अंताल्या तक ले जाना है। पिछले कुछ दिनों से, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत के ज़रिए हमने सीओपी31 के लिए आम सहमति बनाने की दिशा में सार्थक और सकारात्मक प्रयास किए हैं।'

भारत की मुख्य माँगें और रुख

'पॉलिटिकल लैंडिंग जोन और नतीजों' पर हुई चर्चा के दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के तहत सभी पक्षों से अधिक लचीलापन, व्यावहारिकता और आपसी सम्मान प्रदर्शित करने का आह्वान किया।

यादव ने सत्र को संबोधित करते हुए ज़ोर दिया कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए अब केवल बातचीत पर्याप्त नहीं है — ज़रूरत अमल करने और वैश्विक स्तर पर तालमेल बिठाने की है।

क्षमता निर्माण और तकनीकी सहयोग पर ज़ोर

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, भूपेंद्र यादव ने सीओपी31 से क्षमता निर्माण के लिए जुड़ाव, तकनीकी सहयोग और लक्षित समर्थन को बढ़ाने का एक 'पक्का रास्ता' तय करने की उम्मीद जताई।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत सीओपी31 से पहले खुली और पारदर्शी बातचीत के लिए तत्पर है, ताकि वैश्विक समुदाय — और विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित लोगों — के लिए एक 'संतुलित, न्यायपूर्ण और ऐतिहासिक नतीजा' सुनिश्चित किया जा सके।

क्रिस बोवेन से मुलाकात

बैठक से पहले यादव ने ऑस्ट्रेलिया के जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा मंत्री तथा सीओपी31 अध्यक्ष क्रिस बोवेन से मुलाकात की और सीओपी31 प्रेसीडेंसी के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने तथा एक महत्वाकांक्षी और संतुलित नतीजे की दिशा में काम करने के भारत के संकल्प को दोहराया।

समापन टिप्पणी में यादव ने बोवेन को प्री-सीओपी31 के दौरान खुली और सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने के उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया और सीओपी31 की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

आगे क्या होगा

अगले महीने तुर्की के अंताल्या में आयोजित होने वाले सीओपी31 में भारत समेत तमाम देश जलवायु वित्त, उत्सर्जन कटौती और तकनीक हस्तांतरण जैसे बचे हुए मतभेदों को सुलझाने की कोशिश करेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फिजी में बनी सहमति की भावना अंताल्या में कितनी ठोस नीतिगत प्रतिबद्धताओं में तब्दील हो पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जलवायु वार्ताओं के इतिहास को देखें तो 'सकारात्मक नतीजों को आगे ले जाने' की भाषा अक्सर ठोस प्रतिबद्धताओं की कमी को ढकती है। असली कसौटी यह होगी कि भारत अंताल्या में जलवायु वित्त और 'लॉस एंड डैमेज' फंड पर विकसित देशों से कितनी पारदर्शी जवाबदेही सुनिश्चित करा पाता है। बहुपक्षवाद को मज़बूत करने की अपील सराहनीय है, पर पिछले कई सीओपी सम्मेलनों में यही भावना शिखर तक पहुँचते-पहुँचते कमज़ोर पड़ती रही है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिजी में प्री-सीओपी31 बैठक का मकसद क्या था?
फिजी के नाडी में आयोजित प्री-सीओपी31 बैठक का उद्देश्य तुर्की के अंताल्या में होने वाले सीओपी31 सम्मेलन से पहले आम सहमति बनाना था। इसमें कई दिनों तक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत हुई जिसमें 'पॉलिटिकल लैंडिंग जोन और नतीजों' पर केंद्रित चर्चा हुई।
सीओपी31 कब और कहाँ होगा?
सीओपी31 सम्मेलन अगले महीने तुर्की के अंताल्या शहर में आयोजित होने वाला है। इसकी अध्यक्षता ऑस्ट्रेलियाई जलवायु मंत्री क्रिस बोवेन कर रहे हैं।
भारत ने सीओपी31 में किन मुद्दों पर जोर दिया है?
भारत ने क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और लक्षित समर्थन को बढ़ाने पर ज़ोर दिया है। इसके साथ ही भारत ने सभी पक्षों से लचीलापन और व्यावहारिकता दिखाने का आह्वान किया, ताकि सबसे अधिक प्रभावित समुदायों के लिए संतुलित और न्यायपूर्ण नतीजे सुनिश्चित किए जा सकें।
भूपेंद्र यादव ने क्रिस बोवेन से मुलाकात में क्या कहा?
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सीओपी31 अध्यक्ष क्रिस बोवेन से मिलकर सीओपी31 प्रेसीडेंसी के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने का भारत का संकल्प दोहराया। उन्होंने अंताल्या में एक महत्वाकांक्षी और संतुलित नतीजे की दिशा में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
UNFCCC क्या है और सीओपी से इसका क्या संबंध है?
UNFCCC यानी संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो वैश्विक जलवायु कार्रवाई का आधार है। सीओपी (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़) इसी संधि के अंतर्गत प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला सर्वोच्च निर्णय-निर्माण निकाय है, जहाँ सदस्य देश जलवायु लक्ष्यों की समीक्षा और नई प्रतिबद्धताएं तय करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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