भूपेंद्र यादव ने फिजी के नाडी में शिव सुब्रमण्य मंदिर का दौरा किया, भारत-फिजी सभ्यतागत संबंधों पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 7 अक्टूबर 2026 को फिजी के नाडी में स्थित श्री शिव सुब्रमण्य स्वामी मंदिर का दौरा किया और इस अवसर पर भारत तथा फिजी के बीच गहरे आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित किया। यह यात्रा तब हुई जब यादव प्री-सीओपी 31 बैठकों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए फिजी में मौजूद हैं।
मंदिर दौरे का महत्व
यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'फिजी के नाडी में श्री शिव सुब्रमण्य स्वामी मंदिर का दौरा किया। यह मंदिर भारत और फिजी के बीच गहरे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों का एक जीवंत प्रमाण है।' श्री शिव सुब्रमण्य स्वामी मंदिर दक्षिण गोलार्ध में स्थित सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में से एक माना जाता है और यह दोनों देशों के ऐतिहासिक सांस्कृतिक संपर्क का प्रतीक है।
प्री-सीओपी 31 में प्रमुख द्विपक्षीय बैठकें
मंदिर दौरे से पूर्व यादव ने जर्मनी के संघीय पर्यावरण मंत्रालय के राज्य सचिव जोचेन फ्लासबार्थ से मुलाकात की। दोनों ने प्री-सीओपी चर्चाओं के दौरान मिटिगेशन ब्रेकआउट सत्र में महत्वपूर्ण एजेंडा बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया।
इसके अलावा यादव ने संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव अमीना जे. मोहम्मद और यूएनएफसीसीसी के कार्यकारी सचिव साइमन स्टिएल से भी मुलाकात की। इस बैठक में कार्यान्वयन के तरीकों, न्यायसंगत बदलाव, अनुकूलन और जलवायु वित्त पर विशेष जोर दिया गया।
यूरोपीय आयुक्त से चर्चा
यादव ने जलवायु, नेट जीरो और स्वच्छ विकास के लिए यूरोपीय आयुक्त वोपके होकस्ट्रा से भी भेंट की। इस वार्ता में स्वच्छ ऊर्जा तक पहुँच, समावेशी नीति-निर्माण और विज्ञान-आधारित समर्थन के महत्व पर चर्चा हुई। यादव ने कहा कि 'भारत और ईयू नवंबर में होने वाले सीओपी31 को सफल और समाधान-केंद्रित बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।' होकस्ट्रा ने एक्स पर यह बैठक साझा करते हुए लिखा, 'प्री-सीओपी में मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलकर अच्छा लगा। हमने सीओपी31 के लिए अपनी उम्मीदों पर चर्चा की, खासकर साफ-सुथरी बिजली व्यवस्था और विज्ञान की भूमिका पर।'
प्री-सीओपी 31 की पृष्ठभूमि
प्री-सीओपी एक तैयारी बैठक होती है जो वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) से कुछ सप्ताह पहले आयोजित की जाती है। इस बार की बैठक की सह-मेजबानी ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालु कर रहे हैं। सीओपी 31 इस वर्ष नवंबर में तुर्की में आयोजित होने वाला है, जिसके लिए भारत 'रचनात्मक भागीदारी और सभी आवश्यक सहायता' का आश्वासन दे चुका है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक जलवायु वार्ताओं में जलवायु वित्त, तकनीक हस्तांतरण और विकासशील देशों की जिम्मेदारियों पर गहरे मतभेद बने हुए हैं। भारत की सक्रिय कूटनीतिक उपस्थिति — यूएन, जर्मनी और यूरोपीय संघ से एक साथ संवाद — सीओपी31 से पहले अपना रणनीतिक रुख तय करने की कोशिश को दर्शाती है।