उच्चायुक्त प्रणय वर्मा की बांग्लादेश PM तारिक रहमान से विदाई भेंट, द्विपक्षीय सहयोग पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने 24 मई 2026 को ढाका में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से विदाई मुलाकात की और दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग को और गहरा करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। इस बैठक में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान भी उपस्थित रहे।
मुलाकात में क्या हुआ
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने उच्चायुक्त वर्मा को भारत-बांग्लादेश संबंधों को मजबूत बनाने में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया और उनके अगले कार्यभार के लिए शुभकामनाएँ दीं। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी विकास प्राथमिकताओं के आधार पर सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर भी संक्षिप्त चर्चा की।
प्रणय वर्मा की नई नियुक्ति
विदेश मंत्रालय ने अप्रैल 2026 में प्रणय वर्मा को बेल्जियम और यूरोपीय संघ में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है। वे 27 मई को ढाका छोड़ने वाले हैं। उनकी जगह पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का नया उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है।
दिनेश त्रिवेदी: नए उच्चायुक्त की पृष्ठभूमि
दिनेश त्रिवेदी 2009 से 2019 तक बैरकपुर से लोकसभा सांसद रहे हैं और इससे पहले कई बार राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संवाद को नई गति देने की कोशिश जारी है।
व्यापक द्विपक्षीय संदर्भ
गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात की थी, जिसमें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर भी शामिल थे। उस बैठक में जयशंकर ने बांग्लादेश की नई सरकार के साथ रचनात्मक जुड़ाव और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की थी।
उस दौरान विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भी मुलाकात की। दोनों देशों ने संबंधित द्विपक्षीय तंत्रों के जरिए साझेदारी को और गहरा करने के प्रस्तावों पर काम करने पर सहमति जताई है, और आगे जल्द ही और आधिकारिक बैठकें होने की उम्मीद है।
आगे क्या
प्रणय वर्मा के ढाका से प्रस्थान के बाद दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जो दोनों देशों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।