27 अक्टूबर 2026
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भारत-रूस संसदीय सहयोग: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने वोलोदीन से की द्विपक्षीय बैठक

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भारत-रूस संसदीय सहयोग: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने वोलोदीन से की द्विपक्षीय बैठक

सारांश

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के मौके पर नई दिल्ली में भारत-रूस के बीच संसदीय सहयोग की एक नई परत जुड़ी — उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और विदेश मंत्री जयशंकर दोनों ने अलग-अलग वोलोदीन से मुलाकात की। व्यापार, विज्ञान और सांस्कृतिक साझेदारी पर चर्चा यह संकेत देती है कि रिश्ते केवल ऊर्जा व्यापार से आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदीन से द्विपक्षीय बैठक की।
बैठक में संसदीय सहयोग, व्यापार संवर्धन तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी व सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर विस्तृत चर्चा हुई।
जयशंकर ने एक दिन पहले, 26 अक्टूबर को, वोलोदीन से मुलाकात कर संसदीय संपर्क गहरे करने पर विचार-विमर्श किया था।
वोलोदीन ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के उद्घाटन पर PM मोदी से भेंट की और राष्ट्रपति पुतिन की शुभकामनाएँ दीं।
वोलोदीन ने ब्रिक्स को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का प्रमुख स्तंभ बताते हुए संप्रभु विकास के अधिकार पर सदस्य देशों की एकता पर ज़ोर दिया।

उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदीन के नेतृत्व में आए रूसी संसदीय प्रतिनिधिमंडल से द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग को सुदृढ़ करने, व्यापार को प्रोत्साहित करने तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में साझेदारी के विस्तार पर विचार-विमर्श हुआ।

बैठक का संदर्भ और एजेंडा

यह महत्वपूर्ण बैठक नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 के इतर हुई। बैठक में भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव समेत दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। उपराष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बैठक में दोनों देशों के पारस्परिक हित के तमाम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।

जयशंकर की वोलोदीन से पूर्व मुलाकात

इससे एक दिन पहले सोमवार, 26 अक्टूबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी नई दिल्ली में वोलोदीन और उनके प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि उन्हें वोलोदीन और उनके प्रतिनिधिमंडल से मिलकर प्रसन्नता हुई और दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ भारत और रूस के बीच संसदीय संपर्कों को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा की।

ब्रिक्स मंच पर वोलोदीन का संबोधन

सोमवार को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए वोलोदीन ने कहा कि ब्रिक्स देश प्रत्येक राष्ट्र के संप्रभु विकास पथ के अधिकार को मान्यता देने के मुद्दे पर एकजुट हैं। उन्होंने कहा, 'हम अलग-अलग राजनीतिक व्यवस्थाओं, आर्थिक मॉडलों और परंपराओं वाले देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन हम बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण, विभिन्न दृष्टिकोणों और राष्ट्रीय कानूनों के सम्मान तथा प्रत्येक देश के संप्रभु विकास पथ के अधिकार को मान्यता देने के लिए एकजुट हैं।'

वोलोदीन ने यह भी कहा कि अपने 20 वर्षों के अस्तित्व में ब्रिक्स उभरती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में से एक बन गया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ब्रिक्स के भीतर सदस्य देशों के संबंध 'प्रभावी सहयोग का उदाहरण हैं, जहाँ संप्रभु राष्ट्र पारस्परिक लाभ की शर्तों पर काम करते हैं।'

PM मोदी से मुलाकात और पुतिन का संदेश

वोलोदीन ने नई दिल्ली में ब्रिक्स संसदीय मंच के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी भेंट की। इस दौरान उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। वोलोदीन रविवार, 25 अक्टूबर को भारत की आधिकारिक यात्रा पर पहुँचे थे और अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने विभिन्न देशों के अपने समकक्षों से भी द्विपक्षीय बैठकें कीं।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और रूस के बीच व्यापारिक संबंध लगातार प्रगाढ़ हो रहे हैं। संसदीय स्तर पर इस तरह की उच्च-स्तरीय वार्ताएँ दोनों देशों के द्विपक्षीय ढाँचे को और अधिक संस्थागत रूप देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में होने वाले संभावित सहयोग समझौतों पर आगामी महीनों में ठोस रूपरेखा तैयार होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह राजनयिक चैनलों से परे विधायिकाओं को सीधे जोड़ता है। ध्यान देने योग्य यह है कि वोलोदीन का बहुध्रुवीय विश्व पर ज़ोर और 'संप्रभु विकास' की भाषा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति के साथ सुविधाजनक रूप से मेल खाती है — पर यह साझा बयानबाज़ी वास्तविक आर्थिक और तकनीकी सहयोग में कितनी तब्दील होती है, यही असली कसौटी होगी।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और वोलोदीन की बैठक में क्या हुआ?
27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने, संसदीय सहयोग बढ़ाने, व्यापार को प्रोत्साहित करने तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान में साझेदारी के विस्तार पर चर्चा हुई। यह बैठक 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के इतर आयोजित हुई।
12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच क्या है और यह कहाँ हुआ?
12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। यह मंच सदस्य देशों की विधायिकाओं के बीच सहयोग और संवाद को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से आयोजित होता है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने वोलोदीन से कब और क्यों मुलाकात की?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में वोलोदीन और उनके प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग और भारत-रूस संसदीय संपर्कों को और गहरा करने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।
वोलोदीन ने PM मोदी से कब मुलाकात की और क्या संदेश दिया?
वोलोदीन ने नई दिल्ली में ब्रिक्स संसदीय मंच के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की। इस दौरान उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
ब्रिक्स पर वोलोदीन का क्या रुख है?
वोलोदीन ने कहा कि ब्रिक्स अपने 20 वर्षों के अस्तित्व में उभरती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का प्रमुख स्तंभ बन गया है। उन्होंने ज़ोर दिया कि ब्रिक्स देश प्रत्येक राष्ट्र के संप्रभु विकास पथ के अधिकार को मान्यता देने और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण के लिए एकजुट हैं।
राष्ट्र प्रेस
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